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पंचायत में प्रस्ताव 15 का और काट दिए 38 पेड़

Updated: IST Balod
सरपंच ने कहा कि वह लकड़ी का पांच हजार रुपए गांव की मूलभूत सुविधाओं में खर्च करने के बजाय मुख्यमंत्री रमन सिंह के बालोद आगमन पर खर्च कर दिया।

बालोद/गुंडरदेही. ब्लॉक मुख्यालय से 8 किलोमीटर दूर ग्राम भरदाखुर्द में 38 बबूल के सालों पुराने पेड़ फिर काट दिए गए। सड़क किनारे लगे सालों पहले के इन पेड़ों के स्थान पर अब लाइन से केवल ठूंठ ही दिख रही है। इस काम में माफिया खुलकर काम कर रहे हैं। इसमें उन्हें शासन की योजना और भविष्य में होने वाली परेशानी से मतलब नहीं है, उन्हें तो केवल पैसे से मतलब है।

शिकायत पर तहसीलदार ने नहीं की कार्रवाई

ज्ञात रहे इस मामले में ग्रामीणों ने तहसीलदार आरके सोनकर से एक दिन पूर्व शिकायत की थी, लेकिन शिकायत को हल्के में लिया गया। ग्रामीणों के अनुसार तहसीलदार ने समय रहते अवैध कटाई को नहीं रोक पाया। बता दें कि इसी माह एक और गांव में इसी तरह के दर्जनभर पेड़ काट दिए गए थे। जब मामला पत्रिका में समाचार से सामने आया, तब प्रशासन सक्रिय हुआ था और कई पेड़ कटने से बचे।

15 पेड़ का प्रस्ताव कटा 38 पेड़

प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार घास जमीन पर उगे 15 पेड़ काटने के लिए सरपंच कमलकांत सिन्हा ने पंचायत में प्रस्ताव लाया था और उसे गांव के पुनुराम ठाकुर नामक व्यक्ति को बेच दिया। बाकी पेड़ों की कटाई अवैध रूप से हुई। पटवारी के पंचनामे के अनुसार गांव में 38 पेड़ों की कटाई हुई है। सरपंच कमलकांत सिन्हा ने कहा कि वह लकड़ी का पांच हजार रुपए गांव की मूलभूत सुविधाओं में खर्च करने के बजाय मुख्यमंत्री रमन सिंह के बालोद आगमन पर खर्च कर दिया। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम भरदा में अब तक 200 पेड़ काटे जा चुके हैं।

तो बच जाते बलि चढऩे से

दूसरे दिन पटवारी लक्ष्मीन आदिले के पहुंचते तक 38 पेड़ों की बलि चढ़ गई थी। गांव पहुंचने के बाद महिला पटवारी ने शिकायतकर्ता के समक्ष लकड़ी का पंचनामा बनाकर सरपंच के सुपुर्द कर दिया। जांच प्रतिवेदन बनाकर तहसीलदार सोनकर को सौंप दिया गया। कुल मिलाकर राजस्व विभाग की लापरवाही के चलते गांवों में पेड़ों की अवैध कटाई बेरोकटोक जारी है। कार्रवाई होते तक पेड़ों की बलि चढ़ जाती है और अधिकारी मुंह ताकते रह जाता है।

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