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सालभर में 17 हजार लोगों ने तोड़ा ट्रैफिक रूल, जुर्माना भरकर भी नहीं सुधरे

Updated: IST Balod : 17702 vehicles in a year broke the rules
यातायात सुरक्षा सप्ताह में जिले के प्रत्येक चौक-चौराहों पर समय व स्थान बदल कर चालकों को यातायात पुलिस व जिला पुलिस बल दुर्घटनाओं के प्रति सचेत कर रहे हैं।

बालोद.यातायात सुरक्षा सप्ताह में जिले के प्रत्येक चौक-चौराहों पर समय व स्थान बदल कर चालकों को यातायात पुलिस व जिला पुलिस बल दुर्घटनाओं के प्रति सचेत कर रहे हैं। इसके लिए वे लगातार वाहनों की जांच कर रहे हैं। इस दौरान नियमों का पालन न करने वाले चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। पुलिस से मिली जानकारी अनुसार 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2016 तक कुल 17702 वाहन चालकों पर केन्द्रीय मोटरयान अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। उनसे कुल 40,57,300 रुपए समझौता शुल्क वसूल किया गया।

दी जा रही यातायात की जानकारी
इसमें से 1573 बिना हेलमेट धारण किए दोपहिया चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर 3,88,700 रुपए समझौता शुल्क वसूल किया गया। 1809 ऐसे चालक जो दोपहिया वाहन में तीन सवारी बैठकर जाते समय पकड़ाए। इधर 28वीं यातायात सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान यातायात पुलिस के कर्मचारियों ने स्कूलों व कॉलेजों में जाकर यातायात के विषय में बताया गया। डेमो दिखाकर सड़क पर सावधानी के तरीके भी बताए। वहीं बालोद पुलिस ने नि:शुल्क ब्लड प्रेशर, शुगर व वाहन चालकों के आंखों का परीक्षण चिकित्सकों से कराया। एसपी द्वारा नि:शुल्क चश्मा देने की घोषणा भी की गई है।

60 चालक ऐसे रहे जो फोन पर बात करते हुए पकड़ाए
वहीं 73 शराब का सेवन कर वाहन चलाने वाले एवं 36 ओवर लोड तथा 60 मोबाइल फोन से बात करते हुए पाए जाने पर केन्द्रीय मोटरयान अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है और 29 माल वाहक में सवारी बैठाकर ले जाते हुए तथा 57 यात्री बस पर कार्रवाई की गई। शराब पीकर वाहन चलाने वाले माल वाहक में यात्री बैठाकर ले जाने वाले मोबाईल फोन से बात करते हुए व ओवरलोड वाहन चालकों का इस तरह कुल 126 चालकों का लाइसेंस निलंबन के लिए क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी को भेजा गया है।

जीव दया समिति की सक्रियता से आई मृतकों की संख्या में कमी
जानकारी दी कि समय-समय पर वाहन जांच कर चालानी कार्रवाई के कारण तथा मिशन जीव दया समिति की सक्रियता के कारण दुर्घटनाओं व मृतकों की संख्या में कमी आई है। वर्ष 2015 में 311, 2016 में 294 दुर्घटना हुई है। 2015 मृतकों की संख्या 125 थी, जबकि वर्ष 2016 में 88 हुई है। इस कार्रवाई में प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रानिक मीडिया, संभ्रांत व्यक्तियों, जनप्रतिनिधियों का सराहनीय सहयोग रहा है।

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