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बहू-बेटियों के शोषण से दागदार समाज, सात दिन में सामने आए दुष्कर्म के तीन मामले

Updated: IST Balod : Daughters, daughter-tainted society from e
जिले में बेटियां, महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। वे अपनों से ही खतरा महसूस कर रही हैं। आएदिन छेड़छाड़ व दुष्कर्म के मामले सामने आने से ये बात स्पष्ट है।

बालोद.जिले में बेटियां, महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। वे अपनों से ही खतरा महसूस कर रही हैं। आएदिन छेड़छाड़ व दुष्कर्म के मामले सामने आने से ये बात स्पष्ट है। वहीं नाबालिग लड़कियों का भी पूरी तरह ध्यान रखना अति आवश्यक हो गया है। पिछले सप्ताह तो ऐसे तीन सामने सामने आ गए। एक मामले में गरीब बेटी जीवन और मृत्यु के बीच झूलने को मजबूर है।

बदलनी होगी सोच
घटनाओं को रोकने के लिए बालिकाओं के साथ महिलाओं के लिए हर स्तर पर लगातार कार्यशाला आयोजित की जा रही है। पुलिस कानून की जानकारी भी दी जा रही है, पर भी ऐसी घटनाएं कम होने के बजाय बढ़ रही हैं। इससे पुलिस विभाग के साथ समाज चिंतक भी चिंतित हैं। जिला बनने के बाद से इन घटनों में लगातार वृद्धि हुई है। इसमें एक बात ये सामने आ रही है कि संस्कार के माध्यम से सोच बदलनी होगी।

पुलिस के आंकड़े हैं चौंकाने वाले
मामले में पुलिस विभाग से मिले आंकड़े भी चौकाने वाले मिले हैं। विभाग के आंकड़े के मुताबिक 2012 से अब तक जिले में 155 दुष्कर्म के मामले सामने आए हंै। इसमें से 185 दुष्कर्म के आरोपी को गिरफ्तार कर कार्रवाई की जा रहा है। साथ ही जिले के 114 नाबालिग लड़कियों के साथ दुष्कर्म के भी मामले सामने आए हंै। यह आंकड़े 2012 से अब तक की है। लगातार बढ़ रहे इस तरह के मामले गंभीर होती जा रही है। इसी एक सफ्ताह के भीतर ही 3 दुष्कर्म के मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस व जिला बाल संरक्षण विभाग द्वारा लगातार प्रचार-प्रसार के बाद भी इस तरह की घटनाओं पर रोक नहीं लग पा रहा। पुलिस विभाग की मानें तो दुष्कर्म की ये घटनाएं शराब के नशे में ज्यादा हुई हैं।

आखिर कब सुरक्षित होंगी बेटियां
लगातार बढ़ रहे दुष्कर्म के मामले से सब आहात है। 2 सप्ताह के भीतर ही 3 दुष्कर्म के मामले सामने आए हैं। एक घटना में तो रिश्तेदार ने ही घटना को 20 साल की युवती के साथ अंजाम दिया, तो दूसरे मामले में शराब के नशे में युवती को अपने हवस का शिकार बनाया। अब युवती अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। जानकारी के मुताबिक अब लड़कियां अपनों से भी सुरक्षित नहीं है। चिंता है कि आखिर जिले में कब सुरक्षित रहेगी बेटियां और कब रुकेगा दुष्कर्म। विभाग का प्रचार-प्रसार भी कोई जागरूकता नहीं ला पा रहा।

शराब के नशे में अधिकतर घटनाएं, अपनों से भी लगने लगा डर
पुलिस विभाग ने इस मामले पर कहा कि दुष्कर्म की अधिकतर घटनाएं आरोपियों द्वारा शराब के नशे में अंजाम दिया गया है। शराब ही इसका बड़ा कारण है। जानकारों की मानें तो पालक भी अपने बच्चों पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि लगातार घट रही घटनों में आरोपियों ने युवतियों व नाबलिगो को अकेला व सुनेपन का लाभ उठाकर घटना को अंजाम दिया है। इस तरह की घटनाओं से पालक भी चिंतित जरूर हैं पर पालकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझने की जरूरत है। जिले में हुए कई दुष्कर्म के मामले में तो पीडि़ताओं के अपनों ने ही घटना को अंजाम दिया है ऐसे में अब तो अपनो से ही बेटियां सुरक्षित नहीं है।

पुलिस व बाल संरक्षण विभाग चला रही जागरूकता
बढ़ते दुष्कर्म के मामले को रोकने के लिए पुलिस विभाग व जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा गांव गांव जाकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस विभाग लगातार सप्ताह में वर्क शाप लगाकर लोगों को इस तरह की घटनाओं को रोकने के प्रति जागरूक कर रहे हैं, तो जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा ग्राम पंचायत स्तरीय बाल संरक्षण समिति के साथ मिलकर प्रत्येक सप्ताह 2 दिन चौपाल, संगोष्ठी व बैठक लेकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा अब तक 106 गांव व स्कूलों में जाकर लोगों की इस कृत्य के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया पर अभी तक इस अभियान का सार्थक परिणाम नहीं आया है।

जागरूक करने किया जा रहा प्रयास
डीएसपी अमृता सोरी ने बताया दुष्कर्म की घटनाओं को रोकने के लिए कम्युनिटी पुलिसिंग के तहत व हर सप्ताह वर्कशॉप कर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं आरोपियों के खिलाफ कड़ाई से कार्यवाही भी की जा रही है। बीते कुछ सालों में दुष्कर्म की घटनाओं में कमी आई है। अधिकतर घटनाएं शराब के नशे में घटित हुई हैं। ऐसी घटनाओं को रोकने पुलिस सतत कार्य कर रही है। जिला बाल संरक्षण अधिकारी गजानंद साहू ने बताया ग्राम पंचायत स्तरीय बाल संरक्षण टीम के साथ गांव-गांव जाकर चौपाल, संगोष्ठी, बैठक के जरिए लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं। इस ओर लोगों को जागरूक होने की आवश्यकता है।

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