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40 वर्षों से इस गांव में चली ली आ रही है ये प्रथा, 8वीं पढऩे के बाद ब्याह दी जाती है बेटिंयां

Updated: IST Balod : Daughters-in-law are sent to school in the
व्यक्तिगत उपलब्धियों के साथ समाज विकास में बाधक परंपराओं और समाज की पुरानी कुरीतियों को दूर कर नवाचार के माध्यम से आधुनिकता के साथ शिक्षा के प्रति भी सचेत होने लगे हैं।40

सतीश [email protected]आज हर वर्ग में जागरूकता आ रही है। हर गांव, समाज के लोग विकास की मुख्यधारा से जुडऩा चाहते हैं। व्यक्तिगत उपलब्धियों के साथ समाज विकास में बाधक परंपराओं और समाज की पुरानी कुरीतियों को दूर कर नवाचार के माध्यम से आधुनिकता के साथ शिक्षा के प्रति भी सचेत होने लगे हैं। पर जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर डौण्डी विकासखंड के ग्राम पंचायत कुंजकन्हार का आश्रित ग्राम लैनकसा नहरपारा के लगभग 100 की जनसंख्या वाले रहवासियों में विकास की मुख्यधारा से जुडऩे की कोई मंशा नहीं दिखती। वे पठार के बीच खेतों से घिरे कच्चे आवासों में रहकर बांस से बनी सामग्रियां बनाकर बेचना और जीवनयापन करना ही उद्देश्य बनाए रखा है।

बेटी 8वीं तक, बेटा 10वीं तक शिक्षित
दशकों से परिवार एक सीमा में ही अपनी पीढ़ी को रखना चाहते हैं। इसलिए इस गांव में बेटियां 8वीं से आगे और बेटे 10वीं से आगे की शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाए। ताज्जुब की बात ये है कि यह स्थिति बीते 40 सालों से ऐसे ही है। यहां आठवीं के बाद बेटियों की शादी करवा देना और दसवीं के बाद बेटों का केवल रोजगार पर ही ध्यान देना ही जीवन बन गया है। मामले में विकास की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए इस गांव को सरपंच से लेकर जनपद सदस्य व शिक्षक भी लगातार समझा चुके हैं, पर ग्रामीण आगे बढऩा ही नहीं चाहते।

बांस की सामग्रियां बेचकर जीवन-यापन तक सीमित ग्रामीण
पत्रिका टीम ने जब इस गांव का जायजा जनपद सदस्य व ग्राम पंचायत सरपंच के साथ लिया, तो पाया कि गांव के सभी लोग अपने घरों में बांस से सुपा, टोकरी, झाड़ू सहित अन्य सामग्री बनाकर उसे बेचते हंै और उससे मिलने वाली राशि से अपना जीवन चलाते हैं। यहां के लोग पढ़ाई के प्रति कोई खास रूचि ही नहीं दिखाते। सरपंच के मुताबिक यह गांव लगभग 40 सालो से बसा हुआ है। जहां शासन की योजनाएं नहीं पहुंच पा रही है। बिजली, पानी, सड़क की सुविधा से वंचित है। पता चला कि हर बार सहवासियों को शिक्षा के प्रति जागरूक व शासन की योजनाओ के बारे में बताया जाता है, पर भी पढ़ाई के बजाय बांस से सामान बनाकर व अन्य जगह जाकर काम कर रोजगार चलाने में वे ज्यादा रूचि रखते हैं।

गांव में प्राथमिक, 3 किमी में मिडिल और 5 किमी में है हाइयर सेकंडरी, फिर भी सूची नहीं
बता दें कि ग्राम लैनकसा में प्राथमिक शाला तक स्कूल है। माध्यमिक शाला की पढ़ाई के लिए बच्चों को गांव से 3 किमी दूर ग्राम डोरिठेमा जाना पड़ता है। वहीं हाई स्कूल की पढ़ाई के लिए 5 किमी दूर ग्राम भर्रीटोला में शिक्षा की सुविधा है। प्राथमिक तक पढ़ाई गांव में ही कर लेते हंै। माध्यमिक की पास के गांव में, पर हाई स्कूल की पढ़ाई के लिए गांव के गिने-चुने ही लोग 10वीं तक पढ़ पाते हैं। जानकारी मिली कि इस गांव से मात्र एक व्यक्ति है जिन्होंने कक्षा 11वीं तक की पढाई कर पाया और वह भी कहीं और रोजगार के लिए चला गया। पालक भी अपने बच्चों को पढ़ाई के प्रति प्रेरित नहीं करते। ऐसे में कहा जाए शासन के शिक्षा की योजना यहां प्रकाश नहीं फैला पा रही है।

कोई स्कूल की दूरी को कारण मानते हैं, तो कई निजी कारण
सरपंच गोविन्द राम कौमार्य ने बताया गांव के कई लोग अनपढ़ हैं। जैसे तैसे अपने बच्चों को प्राथमिक व माध्यमिक शाला की पढ़ाई करवाने भेजते हैं पर आगे की कक्षा में भेजने से कतराते हैं। ग्रामीण पांचो बाई ने बताया वह अनपढ़ है, पर अपने बच्चों को अच्छे से पढ़ाना चाहती हैं। पर बेटे ही ध्यान नहीं देते। ब्रिज लाल ने बताया बच्चे कक्षा 5वीं, 8वीं के बाद आगे की पढ़ाई नहीं करना चाहते। स्कूल की दूरी अधिक व आगे की पढ़ाई के लिए भी पैसे नहीं होने को कारण बताया। इसलिए रोजगार करना ठीक मानते हैं। बाहर जाने के बाद वे 2 से 3 साल में वापस आते हैं।

गांव तक पहुंचना है तो पगडंडी ही है सहारा
पिछले दिनों ग्रामीण जनपद सदस्य पुनीत राम के नेतृत्व में कलक्टोरेट आए थे। ग्रामीण श्रवण कुमार ने बताया गांव से मुख्य मार्ग तक सड़क बनाने की मांग 20 साल से कर रहे हैं, पर मांग पूरी नहीं हो पाई। कोई इस ओर ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों के अनुसार लगानी जमीन होने के कारण इस पर कुछ नहीं किया जा सकता। प्रशासन ही कुछ करे क्योंकि गांव तक बारिश के दिनों में तो आना-जाना मुश्किल हो जाता है। सड़क न होने के कारण बच्चे खेत खलिहानों से होकर एक किमी दूर प्राथमिक शाला पढऩे जाते हैं।

लोग आगे की पढ़ाई करना ही नहीं चाहते
जनपद सदस्य पुनीत राम सेन का कहना है इन ग्रामीणों को जागरूक करने का प्रयास किया गया। पर यहां के लोग आगे की पढ़ाई करना ही नहीं चाहते। लोग सालो से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं। कई बार उनकी इस मांग को अधिकारियों के पास रखी गई है, पर अब तक कुछ नहीं हो पाया। कुंजकन्हार सरपंच गोविन्द राम कौमार्य ने बताया ग्रामीणों को शिक्षा का महत्व समझाने का प्रयास किया। शिक्षकों ने भी आकर समझाया पर लोग अपनी परंपरागत काम बांस से सामान बनाकर रोजगार चलाना चाहते हैं। माध्यमिक शाला तक की पढ़ाई कर ही सीमित हो जाते हैं। इस गांव से एक भी युवा कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई नहीं कर पाए हैं।

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