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शासन ने दिए थे 50 लाख रुपए लेकिन इन बांधों में नहीं रोक पाए एक बूंद पानी

Updated: IST dam
20 हेक्टेयर में किसान गर्मी में करते हैं खेती, बांध में पानी नहीं होने से क्षेत्र के किसानों को सिंचाई की समस्या का करना पड़ रहा सामना

राजपुर. राजपुर विकासखंड के आधा दर्जन बांधों की मरम्मत के नाम पर पिछले वर्ष शासन से मिली लाखों रुपए खर्च कर दिए गए। आज ये स्थिति है कि एक-दो बांध को छोड़ दिया जाए तो किसी मे पानी नहीं है। सिंचाई विभाग द्वारा बाढ़ आपदा एवं मनरेगा मद से किए गए मरम्मत कार्य के बाद भी आज स्थिति जस की तस बनी हुई है। इलाके में करीब 20 हेक्टेयर में किसान गर्मी में खेती करते हैं। ऐसे में बांधों में पानी नही होने से किसानों के सामने सिंचाई की समस्या हैं।

राजपुर विकासखंड में करीब आधा दर्जन बांध सिंचाई विभाग के हैं। इसमें झिंगो, कोटागहना, उलिया, मुरका, करवां, सेमरा, बकसपुर, मदनेश्वरपुर व बदोली शामिल हैं। इन बांधों की मरम्म्त के लिए सिंचाई विभाग को पिछले वर्ष बाढ़ आपदा व मनरेगा मद से करीब 50.50 लाख रुपए की स्वीकृति मिली थी। इस राशि से सिंचाई विभाग को बांधों की सफाई, गहरीकरण, लाइनिंग, मुरूम छिड़काव सहित अन्य काम करना था। लेकिन मरम्मत के बाद भी आज स्थिति जस की तस है।

समिति के अध्यक्ष एवं सिंचाई विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा मात्र बांधों में मेड़ पर मुरूम व मिट्टी का छिड़काव कर खानापूर्ति कर दी गई। इसका खामियाजा आज ग्रामीणों व किसानों को भुगतना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि एक-दो बांध को छोड़कर किसी में पानी नहीं है। इससे किसानों को काफी परेशानी हो रही है।

सिंचाई के अभाव में सूख रही फसल

ग्राम कोटागहना, उलिया, मुरका, करवां, सेमरा, मदनेश्वरपुर व बदोली के ग्रामीण बांध के आसपास करीब 10-10 हेक्टेयर में खेती करते हैं। सिंचाई विभाग द्वारा बांध के मरम्मत में ध्यान नही दिए जाने व भीषण गर्मी से बांध में पानी काफी कम बचा है। इससे खेतों में फसल सूखने लगी है। किसानों का कहना है कि विभाग द्वारा मरम्मत के नाम पर बांध में कुछ भी नहीं किया गया है। इस वर्ष बांध में पानी नहीं होने के कारण खेतों में सिंचाई नहीं हो पा रही हैं।

बांध किनारे बने प्रतीक्षालय में बांधे जा रहे मवेशी

बांध किनारे सुरक्षा की दृष्टि से देख-रेख एवं घूमने आने वालों के लिए प्रतीक्षालय बनाया गया है। इसकी मरम्मत कराने भी राशि आती है लेकिन प्रतीक्षालय में आज खड़े होने के लिए भी जगह नहीं है। ग्रामीण इस प्रतीक्षालय में मवेशी को बांध रहे हैं।

बांधों में मात्र मिट्टी व कचरा

बाढ़ आपदा मद व मनरेगा से लाखों खर्च करने बाद भी बांधों में गंदगी है। साफ-सफाई, गहरीकरण, लाइनिंग आदि के नाम पर सिंचाई विभाग ने पिछले साल काम कराया है। लेकिन आज बांधों में मात्र मिट्टी, कचरा, पेड़ों की ठूंठ का ढेर दिखाई पड़ता है। हर साल एक बांध की सफाई, गहरीकरण व मरम्मत के लिए करीब 50.50 लाख रुपए मिलते हैं। इसके बाद भी बांधों में पानी नहीं बच रहा है।

ग्रामीणों ने की जांच की मांग

ग्रामीणों ने बताया कि पिछले साल बांधों की मरम्मत, लाइनिंग, स्टाप डेम, पुलिया, सहपुलिया सहित आधा दर्जन कार्य के लिए करीब 3 करोड़ रुपए आया था। इस राशि की विभागीय स्तर पर जमकर बंदरबाट हो गई है। विभाग के अधिकारियों ने चहेते ठेकेदारों को कमीशन पर काम देकर काम का बेड़ागर्क कर दिया। मैटेरियल सप्लाई व मस्टर रोल भी फर्जी भरा गया है।

जो लोग निर्माण कार्य स्थल तक नही पहुंचे है उनका भी मस्टर रोल में नाम अंकित है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि लाइनिंग निर्माण कार्य स्टीमेट से कम कराकर पूर्ण राशि आहरण कर ली गई है । मजदूरों का आज तक भुगतान भी नहीं हो पाया है। भुगतान के किए कलक्टर को आवेदन देकर गुहार भी लगाई जा चुकी है। ग्रामीणों ने पूरे काम की जांच की मांग की है।

मौके पर जाकर करूंगा निरीक्षण

मैं अभी बाहर हूं। आने के बाद मौके का निरीक्षण करूंगा, गलत पाए जाने पर संबधित लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।

राम टेकर, ईई, सिंचाई विभाग

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