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बेंगलूरु के खिलाफ एक बड़ी साजिश: खरगे

Updated: IST bangalore news
लोकसभा में कांग्रेस के नेता एम. मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु को कावेरी पानी छोडऩे संबंधी सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ के फैसले के पीछे कोई बड़ी साजिश रची गई है

बेंगलूरु. लोकसभा में कांग्रेस के नेता एम. मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु को कावेरी पानी छोडऩे संबंधी सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ के फैसले के पीछे कोई बड़ी साजिश रची गई है। खरगे ने गुरुवार को यहां कांग्रेसी सांसदों के साथ विधानसौधा व विकास सौधा के बीच स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के धरना दिया।

इस मौके पर उन्होंने कहा कि बेंगलूरु आज वैश्विक स्तर पर अत्यंत तेजी से विकास कर रहा शहर है। ऐसे शहर में पेयजल की समस्या होने पर यहां कोई भी निवेश करने नहीं आएगा। खरगे ने आशंका जताई कि बेंगलूरु का नाम बदनाम करने के मकसद से यह फैसला किया गया। उन्होंने कहा कि बेंगलूरु में बुनियादी सुविधाओं की समस्या होने पर यहां पर उद्योगपति या निवेशक नहीं आएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि मायानगरी के तौर पर उभर रहे बेंगलूरु पर कलंक लगाने के मकसद से यह फैसला आया है।

उन्होंने कहा कि अंतरराज्यीय जल बंटवारा विवाद होने पर प्रधानमंत्री को ही मध्यस्थता करनी चाहिए। उन्होंने कावेरी मामले में मोदी के दखल की पुरजोर मांग करते हुए कहा कि पूर्व में इंदिरा गांधी, पी.वी.नरसिंह राव, अटलबिहारी वाजपेयी ने दखल देकर समस्याओं को सुलझाया है। वे सफल रहे तो भला मोदी का दखल संभव क्यों नहीं है।

उन्होंने कहा कि कावेरी मसला सुलझाने के लिए प्रधानमंत्री को तत्काल कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल तथा पुदुच्चेरी के मुख्यमंत्रियों की बैठक कर समस्या का समाधान करना चाहिए। दोनों राज्यों के बीच पहले से तनावपूर्ण हालात हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री के मौन का क्या औचित्य है? खरगे ने कहा कि तमिलनाडु या कर्नाटक में से किसी ने कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन की मांग नहीं की। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का 4 सप्ताह में बोर्ड के गठन का आदेश आश्चर्यजनक है।

खरगे ने राज्य सरकार द्वारा अब तक उठाए कदमों को सकारात्मक करार देते हुए कहा कि कहा कि शुक्रवार को राज्य विधानमंडल का विशेष अधिवेशन बुलाया गया है। सर्वदलीय बैठक में व्यक्त राय के अनुसार मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने राज्य की जनता के हित में सही निर्णय किया है।

सांसद के.एच. मुनियप्पा ने इस अवसर पर कहा कि कावेरी मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा किया गया निर्णय अवैज्ञानिक है। राज्य के जमीनी हालात का अध्ययन किए बगैर कावेरी निगरानी समिति का आदेश अनुचित है। किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले यह जानना जरूरी था कि केआरएस बांध व मेट्टूर का जलस्तर कितना है। लेकिन इस तरफ ध्यान दिए बगैर ही फैसला कर लिया गया जो स्वीकार्य नहीं है।

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