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नहीं लगेगी महिलाओं की नाइट शिफ्ट पर रोक!

Updated: IST bangalore news
एक तरफ जहां राज्य विधानसभा की संयुक्त समिति ने महिला कर्मचारियों को रात्रिकालिन ड्यूटी पर नहीं बुलाने और उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों की सेवाएं लेने की सिफारिश की है

बेंगलूरु. एक तरफ जहां राज्य विधानसभा की संयुक्त समिति ने महिला कर्मचारियों को रात्रिकालिन ड्यूटी पर नहीं बुलाने और उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों की सेवाएं लेने की सिफारिश की है, वहीं राज्य सरकार के एक मंत्री ने इसका विरोध किया है।

राज्य सरकार के श्रम मंत्री संतोष एस लाड ने है कहा कि आधुनिक युग में हम काफी आगे निकल चुके हैं। महिलाओं ने खुद को एक क्षमतावान एवं योग्य प्रतिस्पद्र्धी के रूप में साबित किया है। उनमें वो तमाम योग्यताएं हैं जो एक पुरुष में है। मेरी व्यक्तिगत राय में महिलाएं पुरुषों के बिल्कुल बराबर हैं और वे सरकार की इस सिफारिश के पूरी तरह खिलाफ हैं।

महिला एवं बाल कल्याण के लिए विधानमंडलीय समिति के प्रमुख एन.ए. हैरिस ने पिछले 29 मार्च को सौंपे रिपोर्ट में महिलाओं की सुरक्षा एवं अभिरक्षा को ध्यान में रखते हुए सिफारिश की थी कि महिलाओं को रात्रिकालिन ड्यूटी पर नहीं लगाया जाए। समिति ने आईटी-बीटी कंपनियों को यह सुझाव दिया है वह महिलाओं से नाइट शिफ्ट नहीं कराए और उनकी जगह पुरुष कर्मचारी की सेवाएं लें।

हैरिस ने यह भी कहा था कि दूसरों की तुलना में एक महिला के ऊपर अधिक जिम्मेदारी होती है। उसे मातृत्व का कर्तव्य भी पूरा करना है और अगली पीढ़ी को पालना है। अगर उनसे रात में सेवाएं ली जाएंगी तो एक बच्चा अपनी मां से नहीं मिल पाएगा और वह नजरअंदाज होगा। इस सिफारिश को लेकर राज्य सरकार की पूरे देश में आलोचना हुई थी और उसपर पितृसत्तात्मक व महिला विरोधी होने का आरोप लगा था।

लाड ने कहा कि इस सिफारिश को लागू नहीं किया जाएगा और उसकी जगह महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर कड़े दिशा निर्देश लागू किए जाएंगे जिसे आईटी-बीटी सहित अन्य सभी क्षेत्रों को मानना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार महिला सुरक्षा के प्रति काफी गंभीर है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें नाइट शिफ्ट से मना ही कर दिया जाएगा। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह रात में ड्यूटी करने वाली महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

उन्होंने कहा कि सरकार नए दिशा निर्देशों में यह सुनिश्चित करेगी कि नाइट शिफ्ट में कभी कोई अकेली महिला नहीं हो। कम से कम दो महिलाओं को ड्यूटी पर लगाया जाए। महिलाओं को ड्यूटी के बाद घर छोडऩे वाले चालक प्रबंधन को यह बताए कि वह कब उन्हें घर पर छोड़ा।

चालक को प्रबंधन अच्छी तरह जानता हो। अगर वाहन चालक बदला जाता है तो प्रबंधन को उससे अवगत होना चाहिए। इसके अलावा पुरुष कर्मचारियों से पहले महिला कर्मचारियों को उनके घर छोडऩे का बंदोबस्त हो। इसके अलावा महिला कर्मचारी की जहां ड्यूटी लगती है वहां शिशु गृह स्थापित किया जाए ताकि अगर वह चाहे तो अपने कार्यस्थल पर बच्चों की भी देखभाल कर सके।

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