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नन्हों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमाल

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कहावत है कि पूत के पांव पालने में नजर आ जाते हैं। हाईटेक सिटी बेंगलूरु में प्रवासरत राजस्थानी व्यवसायी परिवार के दो नन्हे कराटेबाजों पर यह कहावत चरितार्थ हो रही है

बेंगलूरु. कहावत है कि पूत के पांव पालने में नजर आ जाते हैं। हाईटेक सिटी बेंगलूरु में प्रवासरत राजस्थानी व्यवसायी परिवार के दो नन्हे कराटेबाजों पर यह कहावत चरितार्थ हो रही है। आठ और ग्यारह वर्ष की वय के इन सितारों ने अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर वह उपलब्धि पाई है, जिसके लिए बड़े-बड़े खिलाड़ी तरसते हैं। ये बच्चेे हैं राजस्थानी प्रवासी व्यवसायी सुभाष मेवाड़ा के पुत्र 11 वर्षीय कार्तिक सिंह मेवाड़ा और 8 वर्षीय ज्योत्सना सिंह मेवाड़ा।

दुबई में पिछले दिनों आयोजित बुडकॉन कप-2017 अंतरराष्ट्रीय कराटे चैपियनशिप में इन दोनों बच्चों ने इतनी कम वय में कमाल का प्रदर्शन कर प्रतियोगिता के आयोजकों का भी दिल जीत लिया। ज्योत्सना ने तीन स्वर्ण पदक जीते तो कार्तिक ने एक रजत और एक कांस्य पदक जीतकर धूम मचाई। ज्योत्सना ने कट्टा, कुमिटे और ऑरेन्ज बेल्ट के मुकाबलों में स्वर्ण पदक जीते वहीं कार्तिक ने कुमिटे वर्ग में रजत और कट्टा वर्ग में कांस्य पदक पर कब्जा किया। प्रतियोगिता में कर्नाटक स्कूल गेम्स स्पोट्र्स कराटे डो एसोसिएशन से संबद्ध बेंगलूरु के ज्योशीमोन शोरिन र्यू कराटे स्कूल के छह बच्चों ने हिस्सा लिया था। इन्हीं में ये दो बच्चे शामिल हैं।

शेष में मध्य प्रदेश के अमन, असम के देवराज और कर्नाटक के रॉबिन्सन और सुन्नार हरिहरन भी शामिल थे। इनमें से असम के 25 वर्षीय देवराज ने भी दो स्वर्ण पदक जीते। इनके प्रशिक्षक कराटे मास्टर ज्योशीमोन शोरिन र्यू कराटे स्कूल के एस.षणमुगम और रैन्सी सुन्दरम ने ज्योत्सना और कार्तिक के प्रदर्शन पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इन बालकों ने हमारी उम्मीद से भी बेहतर प्रदर्शन किया है। हमें इतने जबर्दस्त प्रदर्शन की उम्मीद नहीं थी। इन बालकों ने अपनी मेहनत और कौशल के बलबूते हमारा, उनके माता-पिता, हमारे कराटे स्कूल, बेंगलूरु और कर्नाटक ही नहीं, अपने गृह राज्य राजस्थान और देश का नाम भी रोशन किया है।

कार्तिक और ज्योत्सना के पिता राजस्थानी प्रवासी व्यवसायी सुभाष मेवाड़ा और माता संतोष देवी मेवाड़ा तो इस छोटी वय में अपनी संतान की इस अन्तरराष्ट्रीय उपलब्धि पर फूले नहीं समा रहे। वे कहते हैं कि उन्हें बच्चों की इस उपलब्धि पर गर्व है। उन्होंने बताया कि रुचि के मद्देनजर ही इन दोनों बच्चों को मार्शल आर्ट स्कूल में भर्ती कराया गया था और उनका यह निर्णय सही साबित हुआ।

माता संतोष देवी कहती हैं कि जब बच्चे प्रतियोगिता में हिस्सा लेने जा रहे थे तब उन्होंने कहा था कि उन्हें ज्योत्सना और कार्तिक से श्रेष्ठ प्रदर्शन की उ?मीद है और वे पदक जरूर लाएंगे। दोनों बच्चे मेरी उ?मीद पर खरे उतरे हैं। मुझे मेरे बच्चों पर गर्व है। इस उम्र में वे यह उपलब्धि पा रहे हैं तो भविष्य में वे वरिष्ठ वर्ग में भी देश का नाम रोशन करेंगे। सुभाष मेवाड़ा पाली जिले के सिरियारी के हैं। उनके पुरखे रियासत कालीन मेवाड़ क्षेत्र के राजसमन्द जिले के मूल निवासी थे और वहां से पलायन कर वे पाली क्षेत्र के सिरियारी में जा बसे थे।

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