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हृदय दान से मिली जिंदगी

Updated: IST bangalore news
जर्मनी में काम करने वाला 28 वर्षीय एनआरआई अभय (परिवर्तित नाम) कई वर्ष से छुट्टियों पर बेंगलूरु आता-जाता रहा है

बेंगलूरु. जर्मनी में काम करने वाला 28 वर्षीय एनआरआई अभय (परिवर्तित नाम) कई वर्ष से छुट्टियों पर बेंगलूरु आता-जाता रहा है। लेकिन इस बार का सफर उसकी मौत और किसी और के लिए नई जिंदगी साबित हुआ। अभय नहीं रहा लेकिन उसका हृदय अब 63 वर्षीय राघवेंद्र (परिवर्तित नाम) के शरीर में धड़क रहा है। ब्रेन डेथ के बाद परिजनों द्वारा अभय के हृदय को दान किए जाने के बाद चिकित्सकों ने इस हृदय को राघवेंद्र के लिए प्रमाणित किया।

हृदय दान के बाद ग्रीन कॉरिडर बना शहर की यातायात पुलिस ने एम्बुलेंस को रास्ता दिया। एम्बुलेंस ने 13 मिनट के रिकार्ड समय में हवाई अड्डा स्थित मणिपाल अस्पताल से धड़कते दिल को करीब 16 किलोमीटर दूर स्थित एमएस रामय्या नारायण हार्ट केंद्र पहुंचा दिया। जहां चिकित्सकों की टीम ने राघवेंद्र को हृदय का सफल प्रत्यारोपण किया।

अभय कुछ दिनों पहले ही जर्मनी से बेंगलूरु आया था। बिदाई पार्टी की अगली सुबह गुरुवार को वह अपने कमरे में बेहोश मिला। जिसके बाद उसे मणिपाल अस्पताल भर्ती कराया गया था।

हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. नागमलेश यू. एम. ने बताया कि राघवेंद्र हृदय को रक्त पंप नहीं करने लायक बना देने वाली बीमारी इस्केमिक डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी से पीडि़त था। 5 महीने पहले उसने हृदय दान के लिए राज्य के क्षेत्रीय अंगदान सहयोग समिति (जेडसीसीके) में पंजीकरण कराया था।

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