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महादायी पर पार्सेकर ने की राजनीति

Updated: IST kolkata
गोवा विधानसभा चुनाव के बाद महादायी मसले का समाधान होने की उम्मीद पर गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत

।गोवा विधानसभा चुनाव के बाद महादायी मसले का समाधान होने की उम्मीद पर गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पार्सेकर ने पानी फेर दिया है। चुनाव में जाने से पूर्व पार्सेकर के केंद्रीय जलसंसाधन मंत्री उमा बारती को लिखा पत्र आम हो गया है। इस पत्र में पार्सेकर ने लिखा है कि न्यायालय के जरिए ही महादायी मुद्दे के समाधान होगा तो ठीक रहेगा।

महादायी नदी जल बंटवारे के मुद्दे की सुनवाई न्यायाधीकरण में चल रही है। इसी बीच न्यायाधीकरण के प्रमुख, न्यायाधीश पांचाल ने ही गोवा, कर्नाटक तथा महाराष्ट्र राज्य को बातचीत के जरिए समस्या का समाधान करने की सलाह दी थी। इस दिशा में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेद्र फडनवीस से समझौता बेठक का आयोजन भी किया था परन्तु इस बैठक में भाग लेने के बजाए गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पार्सेकर, कोल्हापुर के महालक्ष्मी के दर्शन के लिए गए थे।

ऐसे समझा जा रहा था कि आगामी गोवा विधानसभा चुनाव के चलते पार्सेकर बातचीत के लिए पीछे हट रहे हैं। इसके पूरक तौर पर कर्नाटक प्रदेश भाजपा नेताओं ने भी गोवा चुनाव के बाद बातचीत होगी कहा था परन्तु अब किसी को बताए बिना पार्सेकर ने उमाभारती को गोपनीय पत्र विखने के साथ आगामी दिनों में गोवा का मुख्यमंत्री कोई भी बनें आसानी से बातचीत के जरिए समस्या का समाधान नहीं कर सकते इस प्रकार अडंगा खड़ा किया है।

राजनीतिक लाभ के लिए खेल

यह स्पष्ट है कि पार्सेकर ने महादायी मुद्दे को विवाद बनाकर चुनाव में राजनीतक लाभ प्राप्त करने का प्रयास किया था। केंद्र सरकार को लिखा पत्र किसी भी कारण चुनावी मुद्दा ना बने इस पर ध्यान दिया। इसके लिए दो कारण हैं। पहला, खुद इस मुद्दे को पूरे गोवा में घूमकर राजनीतिक लाभ प्राप्त करने का प्रयास था। इसके पूरक तौर पर चुनाव से तीन दिन पूर्व पत्र के बारे में पूरे गोवा में चर्चा करवाई। दूसरा गोवा विधानसभा चुनाव में कर्नाटक के भाजपा नेता पूर्व मंत्री मुरगेश निराणी, महेश टेंगिनकाई समेत दो सौ से अधिक कार्यकर्ताओं का दल चुनाव प्रचार के लिए गया था। गोवा में बसे विजयपुर, गदग, बागलकोट, बेलगावी, धारवाड़, कोप्पल क्षेत्र की जनता के वोट खिंचने के प्रयास किए गए थे। ऐसे मौके पर महादायी का पानी कर्नाटक को नहीं देंगे कहा तो इनके वोट नहीं पडऩे की सम्भावना था। इसके चलते पार्सेकर ने संवेदनशील राजनीतक कदम रखा।

पार्सेकर ने चली चतुर चाल

आगामी दिनों में गोवा में भाजपा या फिर कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद भी महादायी समस्या का समाधान बातचीत के जरिए आसानी से ना हो ऐसा माहौल पैदा हो गया है। एक ओर बातचीत के लिए रुझान दिखाकर दूसरी ओर केंद्र सरकार को पत्र लिखकर न्यायाधीकरण में ही मामले का समाधान करने का पक्ष रखकर पार्सेकर ने चतुर राजनीतिक चाल चली है। अगर खुद के सत्ता में आने पर इस मुद्दे पर बातचीत को नहीं करनेे तथा कांग्रेस या अन्य दल सत्ता में आए तो वह भी बातचीत के लिए नहीं जा सके इस प्रकार अडंगा डाला है। कांग्रेस इस मुद्दे के सामाधान के लिए बातचीत करने गई तो पार्सेकर ने उमा भारती को लिखे पत्र के सहारे भविष्य में राजनीतिक लाभ प्राप्त करने का अभी से मंच तैयार कर लिया है।

आंदोलनकारियों को लगा झटका

गोवा बाजपा ने अपने राजनीतिक लाभ के लिए महादायी का इस्तेमाल किया। यहां कर्नाटक में महादायी नदी के पानी के लिए जनता प्रतिदिन आंदोलन किया जा रहा है। इसके साथ ही सूखे से जनता परेशान है। ऐसे मौके पर भी पार्सेकर के केंद्रीय मंत्री उमा भारती को पत्र लिखकर राजनीति करने से महादायी आंदोलनकारियों को बड़ा झटका लगा है।

भाजपा की ओछी राजनीति

&पानी के लिए ओछी राजनीति कर रहे गोवा का रुख अक्षम्य है। न्यायाधीकरण के बातचीत के जरिए समस्या का समाधान करने की सलाह देने के बाद भी पार्सेकर ने गुप्त रूप से उमा भारती को पत्र लिखकर बातचीत नहीं चाहिए कहना सही नहीं है। यह भाजपा की ओछी राजनीति को दर्शाता है।

बसवराज होरट्टी, विधान परिषद सदस्य

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