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अकाल के साए में कई गांव

Updated: IST bangalore
धारवाड़ जिले के विभिन्न तालुकों में गम्भीर अकाल का साया मंडरा रहा है। हालही में केंद्रीय सूखा अध्ययन दल

हुब्बल्ली।धारवाड़ जिले के विभिन्न तालुकों में गम्भीर अकाल का साया मंडरा रहा है। हालही में केंद्रीय सूखा अध्ययन दल ने जिले के अकाल प्रभावित गांवों का दौरा कर जायजा लिया।

केंद्रीय दल के इस दौरे के दौरान में भयंकर अकाल की छाया दिखाई दी। वहां के हालात देखकर भय लग रहा था।

अभी अभी गर्मी ने दस्त दी है और सिर पर सूरज आग उगल रहा है। सभी को अन्न देने वाली जमीन पर दरारें पड़ी हैं। जहां कहीं भी नजर घुमाने पर सूखी, मुरझाई फसल नजर आ रही है। तालाबों में पानी पाताल पहुंचा है। तालाब, कुएं सब सूख गए हैं। एक बूंद पानी के लिए आहाकार आरम्भ हो चुका है। लोग व मवेशियों को गम्भीर अकाल में फंसने का भय सता रहा है। धारवाड़ जिले के विभिन्न तालुकों में रविवार को सूखे के हालात का जायजा लेने आए केंद्रीय सूखा अध्ययन दल को इसके साक्षात दर्शन हुए।

प्यास बुझाने को पानी दें

जलापूर्ति के लिए जिस दिन टैंकर आते हैं उस दिन तड़के ही गांव में स्थित सभी खाली मटकियां कतार में लगी रहती हैं। इन सभी मटिकियों पर घर की मालकीन का नाम लिखा होता है। सुबह 9 बजे आने वाले टैंकर कई बार दोपहर 12 बजे बाद भी नहीं आते। गांव की महिलाएं सभी कामकाज छोड़कर तपती गर्मी में टैंकर का इंतजार करती हैं। जब सूखा अध्ययन दल गांव पहुंचा तो महिलाएं पानी के लिए टैंकर का इंतजार कर रही थीं। दल के सदस्यों ने इन महिलाओं से बातचीत की। महिलाओं ने बताया कि हम आप से घर, रुपए कुछ नहीं मांगेंगे। प्यास बुझाने के लिए पर्याप्त पानी दी जिए। छोटे छोटो बच्चे हैं साथ में मवेशी भी हैं। दो दिन में एक बार दिए जाने वाले पांच मटकी पानी को कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके साथ एक और मटकी पानी अधिक दिलवाएं।

एक व्यक्ति को एक मटकी पानी

कुंदगोल तालुक के रोट्टिगवाड़ गांव में पांच हजार की आबादी है। इस गांव में एक भी तालाब नहीं। इस गांव के लिए पेयजल का स्रोत गांव में स्थित चार बोरवेल ही हैं। एक माह से इन बोरवेल में खारा पानी आ रहा है। इस्तेमाल करने के लिए भी योग्य नहीं होने के बीावजूद कुछ ग्रामीण मजबूरी में इसे पीने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। यहां के हालात को जानकर जिला प्रशासन गांव में प्रतिदिन पांच टैंकर पानी की सुविधा उपलब्ध कर एक सदस्य के लिए एक मटकी के हिसाब से जलापूर्ति कर रहा है।

भयंकर सूखे का साया

कुंदगोल तालुक के चाकलब्बी गांव में तालाब सूखा गया है। लगभग दस एकड़ में फैले तालाब के निछले हिस्से में मात्र थोड़ा पानी बचा है। वह भी पूरी तरह गंधा है। कितना भी भयंकर सूखा पडऩे पर भी इस तालाब के सूखने का उदाहरण नहीं है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि आगामी 15 दिनों में नीचे स्थित थोड़ा पानी भी सूख जाएगा। मौजूदा पानी को ही गांव की महिलाएं दैनिक उपयोग के लिए जार ही हैं।

काली मिट्टी के खेतों पर पड़ी दरारें

कोंकण कुरहट्टी के मल्लिकार्जुन नेकार की आठ एकड़ जमीन पर ज्वार के पौधे दो फीट भी नहीं उगे हैं। ऐसे में फसल कहां से होगी।

जहां कहीं पर भी नजर दौड़ाने पर काली मिट्टी के खेत पर सूखे ज्वार के पौधे ही नजर आ रहे थे। एकाध जगह पर फसलवाले पौधे, बिना पानी के सूख गए हैं। नेकार ने सूखा अध्ययन दल के सामने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि इतनी जमीन रह कर भी क्या फायदा। ज्वार के पौधे नहीं उगने से मवेशियों के लिए चारा भी नहीं है। रबी के मौसम में बारिश नहीं होने से एकड़ को 25 हजार रुपए खर्च कर उगाई गई सारी फसल बर्बाद हो गई है। सूखा अध्ययन दल के सदस्यों ने रोट्टिगवाड ग्राम पंचायत क्षेत्र में मनरेगा के तहत दैनिक वेतन भोगी के तौर पर काम कर जीवन गुजारने वालों से कुशल क्षेम पूछा तथा समय पर मेहनताना मिल रहा है या नहीं इसकी जानकारी हासिल की।

घटिया गुणवत्ता का चारा

कुंदगोल के संशी कृषि उपज मंडी के गोदाम में स्थापित चारा बैंक में स्थित चारे की गुणवत्ता की जांच की। किसानों ने शिकायत की कि घटिया गुणवत्ता का चारा वितरित किया जा रहा है। किसानों की शिकायत सुनने के बाद अधिकारियों ने जिलाधिकारी को उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। किसानों ने तीन रुपए किलो के हिसाब से दिए जा रहे चारे को दो रुपए किलो या फिर निशुल्क वितरित करने की बिनती की।

सूखा जीवन

लंबी-लंबी कतारों में खली मटकियां, सूखे तालाब व कुएं, दरार पड़े खेतों पर मुरझाई फसल, बिना चारे के दुर्बल हुए मवेशी, पेयजल के लिए तरसते हजारों हाथ। यह नजारा हुब्बल्ली, कुंदगोल तथा नवलगुंद के ग्रामीण इलाकों में केंद्रीय सूखा अध्ययन दल के दौरे के दौरान दिखाई दिया। ऐसा सूखा पहले कभी नहीं पड़ा था जो इस वर्ष पड़ा है। खरीफ तथा रबी के मौसम में बारिश नहीं होने से खेत-खलिहान सब बंजर जमीन में परिवर्तित हुए हैं। बोई गई तमाम फसल वही काली पड़ गई है। दिन ब दिन गर्मी की तपीश भी बढ़ गई है। तालाबों में स्थित थोड़ा बहुत पानी भी सूख गया है। लोगों को ही पीने के लिए पानी नहीं है तो बेचारे मवेशियों को कहां से मिलेगा। इस प्रखार के बिना उत्तर के प्रश्नों से जनता परेशान है। खेत-खलिहानों में काम नहीं होने से किसान आगे का क्या होगा इसी सोच में डूबे हुए हैं।

बेजुबान जानवरों का सहारा बनें

&आपात हालात में जिला प्रशासन एक मटकी पानी की आपूर्ति कर पुण्य का काम कर रहा है परन्तु हमारे साथ कई वर्षों तक साथ रहे मवेशियों के लिए भी पानी कौन देंगे। उनमें भी हमारी तरह प्राण है। मेहरबानी करके एक और मटकी पानी अधिक देकर बेजुबान जानवरों के जीवन के लिए सहारा बनें।

रामचंद्र बुडण्णवर, किसान, रोट्टिगवाड

केंद्र ने मंजूर किया 450 करोड़

&केंद्र सरकार ने सूखा राहत कार्य के लिए 450 करोड़ रुपए मंजूर किया है। मनरेगा योजना के तहत 16 00 करोड़ रुपए दिए गए हैं। राज्य सरकार इस राशि को शीघ्र जिलावार बांटकर किसानों को उपलब्ध करने की कार्रवाई करेगी।

प्रहलाद जोशी, सांसद, धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र

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