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अब प्राइम टाइम में नहीं आएगा कार्यस्थगन प्रस्ताव

Updated: IST bangalore news
अब राज्य विधानमंडल में कार्यस्थगन स्थगन प्रस्ताव प्राइम टाइम में नहीं आ सकेगा। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही किसी ज्वलंत मुद्दे पर कार्यस्थगन प्रस्ताव लाकर सरकार को घेरने की कोशिश करने

बेंगलूरु. अब राज्य विधानमंडल में कार्यस्थगन स्थगन प्रस्ताव प्राइम टाइम में नहीं आ सकेगा। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही किसी ज्वलंत मुद्दे पर कार्यस्थगन प्रस्ताव लाकर सरकार को घेरने की कोशिश करने वाले विपक्ष को अब इसके लिए प्रश्रकाल और शून्यकाल के खत्म होने तक इंतजार करना पड़ेगा।

राज्य विधानसभा ने मंगलवार को सदन की कार्यवाही संचालन से संबंधित नियमों में बदलाव को मंजूरी दे दी। नए नियमों के मुताबिक अब प्रश्नकाल और शून्यकाल स्थगित नहीं होंगे। पुरानी व्यवस्था में सदन की कार्यवाही शुरू होने के साथ ही कार्यस्थगन प्रस्ताव आने और सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तकरार के कारण प्रश्नकाल और शून्यकाल भी बाधित होता था। इस समस्या को हल करने के लिए विधानमंडल के दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों के नेतृत्व में संयुक्त नियम समिति गठित की गई थी। समिति ने सदन में बेहतर कार्य संचालन के लिए नियमों में कई बदलावों को सुझाव दिया था जिसे विपक्ष के विरोध के बीच मंगलवार को विधानसभा ने मंजूरी दे दी।

विधि व संसदीय कार्यमंत्री टी बी जयचंद्रा ने सदन के कार्य संचालन नियमों में बदलाव का प्रस्ताव पेश किया। विपक्ष के नेता जगदीश शेट्टर ने प्रस्तावित सुझावों का विरोध करते हुए कहा कि यह सदन के अंदर विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश है।

उन्होंने कहा कि भाजपा इस प्रस्ताव का तार्किक विरोध नहीं कर रही है। कार्यस्थगन प्रस्ताव पेश करने से पहले सदन में विपक्ष के नेता को अपनी बात रखने के लिए दस मिनट का समय मिलना चाहिए लेकिन गंभीर मामलों को केवल प्रश्नकाल तथा शून्यकाल के बाद ही उठाना अनिवार्य बनाने से विपक्ष के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष कार्यस्थगन प्रस्ताव का तभी उपयोग करता है जब किसी गंभीर मामले को लेकर अपना दायित्व निभाने में सरकार विफल रहती है। ऐसी स्थिति में विपक्ष को सदन की कार्यवाही शुरु होते ही कार्यस्थगन प्रस्ताव रखने की अनुमति मिलनी चाहिए। विपक्ष की आपत्ति को खारिज करते हुए विधानसभाध्यक्ष के. बी. कोलीवाड ने इस प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित किए जाने की घोषणा कर दी जिसका सत्ता पक्ष के सदस्यों ने स्वागत किया।

नए नियमों के मुताबिक अब शून्यकाल में सिर्फ दस मामले उठाए जा सकेंगे। शून्यकाल में उठाए गए मामलों का सरकार को दो दिन में जवाब देना अनिवार्य होगा।

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