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प्रधानमंत्री के नाम, दो लाख पैगाम

Updated: IST bangalore
प्राकृतिक सुषमा से परिपूर्ण गदग जिले के कप्पतगुडा परिक्षेत्र में खनन की मंजूरी पाने निजी कंपनियों में होड़ और

बेंगलूरु। प्राकृतिक सुषमा से परिपूर्ण गदग जिले के कप्पतगुडा परिक्षेत्र में खनन की मंजूरी पाने निजी कंपनियों में होड़ और राज्य सरकार की दुविधा के बीच लोगों का संघर्ष चरम पर है। तोंटदार्य मठ प्रमुख स्वामी सिद्धलिंग के नेतृत्व में गदल जिला मुख्यालय पर बीते चार दिनों से भूख हड़ताल के साथ ही विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है।

कप्पतगुडा क्षेत्र रक्षा संघर्ष के सिलसिल में बुधवार को स्कूल, कॉलेज के विद्यार्थियों ने हस्ताक्षर अभियान चलाया और 2 लाख से अधिक खत प्रधानमंत्री मोदी के नाम लिखकर पोस्ट किए। लोगों ने पीएम से गुहार लगाई है कि इस क्षेत्र का दर्जा वन परिक्षेत्र का रहे और यहां किसी भी प्रकार के खनन आदि को मजंूरी न मिले। पोस्ट कार्ड की खरीदारी का आलम यह रहा कि स्थानीय डाक घरों में सामान्य उपभोक्तओं को कार्ड बमुश्किल मिले। लोगों ने मानव शृंखला बनाकर सरकारी नीतियों की मुखालफत की। स्वामी सिद्धलिंग के साथ प्रदर्शन कर रहे छात्रों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि हस्ताक्षर अभियान आगे भी जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि सरकार ने विधानसभा में इस क्षेत्र की रक्षा करने का आश्वासन दिया है, लेकिन उन्हें सरकार की बातों पर विश्वास नहीं है। सरकार द्वारा आमंत्रित निवेशकों की नजर इस क्षेत्र पर है। यहां कई देशी-विदेशी कंपनियां सरकार से मंजूरी और लाइसेंस लेकर खनन आरंभ करने की कोशिश कर रही हैं। अगर यहां खदानें खुलीं या कारखाना स्थापित हुआ तो क्षेत्र का सर्वनाश होगा। इस क्षेत्र में दुर्लभ प्रजातिके पेड़ और वनस्पतियां हैं। अनेकों जीव-जंतु हैं।

ऐसे में कंपनियां आईं तो प्रकृति का विनाश निश्चित है। सरकार इस क्षेत्र को सुरक्षित रखने का लिखित आश्वासन दे। साहित्यकार डॉ. चन्नवीर कणवी ने कहा कि राजनेता अपने स्वार्थ साधने को इस प्राकृतिक संपदा को बेचने का प्रयास कर रहे हैं।इन प्रयासों का संगठित विरोध करते हुए राज्य की जनता को ऐसे राजनेताओं के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए। अगर सरकार जनता के पक्ष में कार्यवाही नहीं करती है तो सभी जिला मुख्यालयों में विरोध प्रदर्शन किए जाएं। समाज परिवर्तन समुदाय के प्रमुख एस.आर. हिरेमठ ने कहा कि राज्य सरकार तत्काल कोई फैसला नहीं करती है तो मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या के पैतृक गांव मैसूरु जिले के सिद्धरामय्यन हुंडी से बेंगलूरु तक प्राकृतिक संपदा की रक्षा के लिए रैली निकाली जाएगी।

पांच की हालत बिगड़ी

भूख हड़ताल कर रहे दलित नेता नारायण स्वामी समेत पांच लोगों की हालत गंभीर हो गई है। मौके पर कोई भी एंबुलेंस या चिकित्सक न होने पर प्रदर्शनकारी नाराज हो गए, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के खिलाफ नारे लगाए। सूचना मिलने पर जिला सर्जन डॉ. पी.एच. कबाड़ी ने मौके पर पहुंच इलाज किया। प्रदर्शन में भाग लेने के लिए धारवाड़, हावेरी, बेंगलूरु ग्रामीण और अन्य जिलों से आने वालों की संख्या बढ़ रही है

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