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आरबीआई की सलाह, किसानों के कर्ज माफ नहीं करें

Updated: IST bangalore news
किसानों के कृषि ऋण माफ करने की बढ़ती मांग के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कर्नाटक को चेतावनी दी है कि दूसरे राज्यों की देखादेखी वे उतावली में किसानों के ऋण माफ करने का फैसला नहीं

बेंगलूरु . किसानों के कृषि ऋण माफ करने की बढ़ती मांग के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कर्नाटक को चेतावनी दी है कि दूसरे राज्यों की देखादेखी वे उतावली में किसानों के ऋण माफ करने का फैसला नहीं करें। इससे साख अनुशासन पर असर पड़ेगा और कर्ज लेकर नहीं चुकाने की प्रवृत्ति बढ़ेगी।

आरबीआई ने अपने सुझाव में कहा है कि कर्ज माफी से कर्ज के भुगतान नहीं करने की प्रवृत्ति बढ़ती है और भविष्य में कर्ज माफी मिलने की प्रत्याशा में एक तरह का नैतिक संकट बढ़ता है। आरबीआई की करीब 363 पन्नों की रिपोर्ट में राज्यों का बजट और उनकी वित्तीय स्थिति के बारे में विस्तार से तथ्य रखे गए हैं। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि कर्ज माफी से राज्य का राजकोषीय घाटा बढ़ेगा और मध्यावधि वित्त पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

किसानों ने सहकारी समितियों से करीब 10 हजार करोड़ रुपए और वाणिज्यिक बैंकों से 35 हजार करोड़ रुपए का कर्ज ले रखा है। विधानसभा में राज्य के बजट पर बहस के दौरान भाजपा और जद ध ने किसानों का कर्ज माफ करने की पुरजोर वकालत की थी क्योंकि सूखे के कारण किसानों की माली हालत बहुत खराब हो चुकी है।

आरबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि यह कर्ज माफ किया गया तो परेशान किसानों के कर्ज की देनदारी भले ही घट जाएगी लेकिन यह वास्तव में करदाताओं का पैसा उधार लेने वालों को देने का मामला होगा। इसका राज्य की वित्तीय व्यवहार्यता पर बेहद प्रतिकूल असर होगा। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि राज्य दूसरों की देखा देखी कर्ज माफी के रथ की सवारी करेगा तो भविष्य में उसकी देनदारियां गंभीर रूप से बढ़ जाएंगी।

सोमवार को पंजाब की अमरिंदर सरकार ने भी छोटे कसिानों के कर्ज माफ करने की घोषणा कर दी है। जबकि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की सरकारें पहले ही किसानों के कर्ज मााफ करने की घोषणाएं कर चुकी हैं जबकि मध्य प्रदेश में भी इसकी तैयारी चल रही है।

लेकिन इन तीन राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं और कर्नाटक में भाजपा विपक्ष में है। भाजपा ने कर्नाटक सरकार पर इस मामले में राजनीति करने का आरोप लगा रही है। पार्टी ने राज्य सरकार पर किसानों के कर्ज माफ करने का लगातार दबाव बना रखा है लेकिन मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने चतुराई से इस मुद्दे को केंद्र सरकार के पाले में धकेल दिया है।

सिद्धरामय्या का तर्क है कि यदि केंद्र सरकार किसानों के वाणिज्यिक बैंकों से लिए गए कर्ज माफ कर देगी तो वे किसानों के सहकारी समितियों से लिए गए कर्ज को माफ करने के लिए तैयार हैं। वास्तविकता यह है कि किसानों का करीब 80 फीसदी कर्ज वाणिज्यिक बैंकों से लिया गया है यानि केंद्र सरकार को इतना हिस्सा खुद वहन करना होगा। सहकारी समितियों के कर्ज का हिस्सा महज 20 से 22 फीसदी है।

सिद्धरामय्या का कहना है कि यदि उन्होंने इसे माफ किया तो यह बाकी 80 फीसदी किसानों के साथ अन्याय होगा। आरबीआई ने दोनों ही प्रकार के कर्ज को माफ करने के विरुद्ध टिप्पणी की है।

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