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कहीं पानी के लिए तो कहीं पानी से हाहाकार

Updated: IST bangalore news
राज्य में एक तरफ कावेरी नदी सूखने से पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है और तमिलनाडु के साथ विवाद चरम पर है तो दूसरी ओर उत्तर कर्नाटक में कृष्णा नदी उफान पर है

बेंगलूरु. राज्य में एक तरफ कावेरी नदी सूखने से पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है और तमिलनाडु के साथ विवाद चरम पर है तो दूसरी ओर उत्तर कर्नाटक में कृष्णा नदी उफान पर है। महाराष्ट्र में स्थित ऊपरी बांधों से बड़े पैमाने पर पानी छोड़ा जा रहा है जिससे कृष्णा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है हालांकि, अभी बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है।

अधिकारियों के मुताबिक महाराष्ट्र के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद राजापुर एवं कोयना बांध से 38 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। चिक्कोड़ी जिले के अधिकारी ने बताया कि हालात नियंत्रण में हैं लेकिन अगर नदी में जल प्रवाह और बढ़ा तो कुछ इलाकों के डूबने का खतरा है। इस बीच नदी का जलस्तर बढऩे से कल्लोल-यद्दूर बांध/पुल पर सुबह के समय पानी ऊपर बहने लगा था लेकिन बाद में उसे वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया। चिक्कोड़ी तहसीलदार के मुताबिक महाराष्ट्र के बांधों से 38 हजार 307 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।

इसमें से 636 क्यूसेक डूम डैम, 674 क्यूसेक कनेरी, 3555 क्यूसेक वरणा तथा 2 हजार क्यूसेक राधानगरी से छोड़ा जा रहा है। उधर, विजयापुर से मिली खबरों के मुताबिक नदी के निचले इलाके में कृष्णा भाग्य जल निगम लिमिटेड (केबीजेएनएल) के अधिकारी भी अलमत्ती बांध से नदी में पानी छोड़ रहे हैं।

अलमत्ती बांध का जलाशय अपनी पूरी क्षमता 519.6 मीटर तक भर चुका है। केबीजेएनएल सूत्रों के मुताबिक निचले इलाके में स्थित नारायणपुर बांध के लिए 56 हजार 253 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इस जलाशय की अधिकतम भंडारण क्षमता 124 टीएमसी फीट है। हालांकि, अधिकारियों ने कहा है कि बाढ़ की आशंका नहीं है। बाढ़ के हालात तभी पैदा होंगे जब नदी में पानी छोड़े जाने की मात्रा 2.5 लाख क्यूसेक पहुंच जाएगी। फिलहाल नदी का जलस्तर बढ़ता है तो और अधिक पानी निचले इलाकों के लिए छोड़ा जाएगा।

अधिकारियों का कहना है कि अगर अक्टूबर के आखिर तक नदी में पानी की आवक ऐसी ही रही तो अगले मार्च महीने तक नहरों में पानी छोड़ा जा सकेगा। यह कृष्णा बेसिन के किसानों के लिए वरदान जैसा होगा। नहरों के जरिए इस बांध से छोड़े जा रहे पानी से बेसिन में लगभग 6 लाख हेक्टेयर रकबे में सिंचाई हो रही है। पिछले 12 जुलाई से लगातार 12 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।

जलाशय का जलस्तर अभी भी नीचे नहीं आया है। इस बीच अधिकारियों ने एहतियाती कदम उठाते हुए नदी के किनारे बसे इलाकों में चेतावनी जारी कर लोगों को सावधान रहने को कहा गया है। किसानों को अपने मवेशी नदी किनारे नहीं लाने तथा नदी किनारे खड़ा रहने से मना किया गया है।

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