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पुलिसकर्मियों के वेतन वृद्धि पर उलझे सिद्धरामय्या-शेट्टर

Updated: IST  bangalore news
पुलिसकर्मियों की वेतन वृद्धि की मांग को लेकर विधानसभा में मंगलवार को मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या तथा नेता प्रतिपक्ष जगदीश शेट्टर के बीच तीखी नोंक-झोंक हुई

बेलगावी. पुलिसकर्मियों की वेतन वृद्धि की मांग को लेकर विधानसभा में मंगलवार को मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या तथा नेता प्रतिपक्ष जगदीश शेट्टर के बीच तीखी नोंक-झोंक हुई। मुख्यमंत्री ने प्रश्नकाल के दौरान पुलिस कर्मियों के लिए 30 फीसदी वेतन वृद्धि की मांग कर रहे जगदीश शेट्टर पर निशाना साधते हुए कहा कि शेट्टर जब मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने पुलिस कर्मियों की वेतन वृद्धि को लेकर क्या किया था? इस बात को सदन में स्पष्ट करें।

मंगलवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान भाजपा के सदस्य सी.टी. रवि के प्रश्न का गृहमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर से जवाब दिया। इस दौरान गृहमंत्री ने कहा कि गत 40 वर्षों से पुलिसकर्मियों के वेतन पर किसी भी सरकार ने ध्यान नहीं दिया अब सरकार ने पुलिस कर्मियों की समस्याओं के समाधान के लिए पहल की है। पुलिसकर्मियों को राघवेंद्र औरादकर समिति की सिफारिशों के तहत मासिक भत्तों में 2000 रुपए की वृद्धि की गई है।

गृहमंत्री की इस टिप्पणी पर आपत्ति व्यक्त करते हुए नेता प्रतिपक्ष जगदीश शेट्टर ने कहा कि अगर वेतन आयोग या वेतन समिति ही पुलिस कर्मियों के वेतन के बारे में फैसला करेगी तब सरकार ने राघवेंद्र औरादकर समिति का गठन क्यों किया था?

राज्य सरकार को वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार न करते हुए पहले 30 फीसदी वेतन वृद्धि घोषित करनी चाहिए क्योंकि जब राज्य की पुलिस ने विभिन्न मांगों को लेकर 4 जून को सामूहिक अवकाश पर जाने की चेतावनी दी थी तब पुलिसकर्मियों को वेतन वृद्धि समेत कई सुविधाएं देने का आश्वासन देकर उन्हें सामूहिक अवकाश लेने से रोका गया था। अब सरकार ने पुलिसकर्मियों को केवल नाम के वास्ते दो हजार रुपए का भत्ता बढ़ाया है, सरकार के इस फैसले से राज्य के 8 0 हजार पुलिस कर्मी स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। मानसिक तनाव से जूझ रहे पुलिसकर्मियों के साप्ताहिक अवकाश की मांग को लेकर भी कोई स्पष्ट फैसला नहीं किया गया है।

बहस में हस्तक्षेप करते हुए मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि सरकार पुलिसकर्मियों की मांगों के प्रति संवेदनशील है। पुलिसकर्मी हमेशा अपनी जान की परवाह न करते हुए समाज की सुरक्षा में लगे रहते हैं। ऐसे कर्मियों की जो मांगें हैं, ये गत कई वर्षों से लंबित थीं। यह कोई नई मांगें नहीं हैं, लेकिन इससे पहले किसी भी सरकार ने इस समस्या का समाधान करने का प्रयास तक नहीं किया था। उनकी नेतृत्व वाली सरकार ने ही पुलिसकर्मियों की इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।

जगदीश शेट्टर भी राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, लेकिन उनके कार्यकाल में भी पुलिसकर्मियों की वेतन वृद्धि का फैसला नहीं किया गया था। क्या जगदीश शेट्टर को जब वे (शेट्टर) मुख्यमंत्री थे तब पुलिसकर्मियों की समस्याओं की जानकारी नहीं थी? विपक्ष के नेता बनने के बाद ही उन्हें पुलिसकर्मियों की समस्याएं क्यों सता रही हैं? मुख्यमंत्री के इस बयान से आक्रोशित भाजपा के कई सदस्यों ने एक साथ उठकर जवाब देना शुरू किया, जिसके कारण सदन में काफी देर तक शोरगुल चलता रहा। इस दौरान कौन, क्या बोल रहा है, किसी को समझ में नहीं आया।

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