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यू-टर्न पर सिद्धू-ईश्वरप्पा में नोंक-झोंक

Updated: IST bangalore news
पहली जुलाई से लागू होने वाले माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के लिए राज्य में वैधानिक औपचारिकता पूरी हो चुकी है। विधानसभा के बाद विधान परिषद ने भी सोमवार को विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया

बेंगलूरु. पहली जुलाई से लागू होने वाले माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के लिए राज्य में वैधानिक औपचारिकता पूरी हो चुकी है। विधानसभा के बाद विधान परिषद ने भी सोमवार को विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया। मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने सदन में विधेयक पेश करते हुए कहा कि संसद इस विधेयक को पहले ही पारित कर चुकी है।

संविधान के मुताबिक विधेयक को देश के सभी राज्यों को भी इस विधेयक को पारित करना अनिवार्य है। विधानसभा में यह विधेयक पहले ही पारित किया गया है और वे चाहते हैं कि विधान परिषद में भी इसे सर्वसम्मति से पारित किया जाए। कर्नाटक ने हमेशा देश में सबसे पहले कर तथा प्रशासनिक सुधारों के मामले में पहल की है।

कर ढांचे के सुधार में अग्रणी

मुख्यमंत्री ने कहा कि कर तथा प्रशासनिक सुधार के मामलों में कर्नाटक हमेशा अग्रणी रहा है। वर्ष 1994-95 में कर्नाटक में ही देश में सबसे पहले मूल्य वर्धित कर (वैट) लागू किया गया था। अब राज्य जीएसटी लागू करने के लिए भी तैयार है। वर्ष 2006-07 में ही तत्कालीन संप्रग सरकार के कार्यकाल में वित्त मंत्री चिदंबरम ने जीएसटी लागू करने की तैयारियां शुरू कर वर्ष 2010-11 में ही पूरे देश में लागू करने का लक्ष्य रखा था। लेकिन गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, मध्यप्रदेश तथा तमिलनाडु ने विरोध किया था। आज वही भाजपा नेता यू-टर्न लेकर जीएसटी का समर्थन कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री के इस बयान पर नेता प्रतिपक्ष के. एस. ईश्वरप्पा समेत भाजपा के कई नेताओं ने कड़ा विरोध किया। सदन में कांग्रेस तथा भाजपा सदस्यों के बीच काफी देर कर नोक-झोंक चलती रही। बहस में हस्तक्षेप करते हुए उपसभापति मरितिब्बे गौड़ा ने कहा कि विधेयक पर दलगत राजनीति नहीं होनी चाहिए।

अब केंद्र सरकार की मेहरबानी की आस

जनता दल (ध) के रमेश बाबू ने आशंका जताई कि जीएसटी के कारण राज्य के राजस्व में कटौती होगी। साथ में राज्यों का कर वसूल करने के अधिकार का हरण होगा। जनता दल (ध) के सरवण ने ज्वेलरी उद्यमियों पर पर लगाए 5 फीसदी जीएसटी में कटौती की मांग उठाई। भाजपा के भानूप्रकाश ने कहा कि जीएसटी के कारण आनेवाले दिनों में अब दो राज्यों के बीच नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा होगी।

कांग्रेस की डॉ जयमाला ने कन्नड़ फिल्मों के लिए रियायतें जारी रखने की मांग रखी तो मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि राज्य सरकार हमेशा की तरह कन्नड़ फिल्मों के हितों की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करेगी।

बहस के बाद उपसभापति ने मुख्यमंत्री को इस विधेयक को सदन में मंजूरी के लिए रखने को कहा।

उसके पश्चात सदन में विधेयक ध्वनिमत से पारित होने की घोषणा की गई। विधेयक पारित होने का सदस्यों ने मेज थप-थपाकर स्वागत किया।

लहरसिंह की मुख्यमंत्री से रोचक बहस

भाजपा के लहरसिंह सिरोया ने सदन में बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि सरल कर भुगतान प्रणाली से उत्पादक तथा उपभोक्ता दोनों को लाभ होगा। कर संग्रहण में वृद्धि होने से राज्य तथा केंद्र दोनों का राजस्व कई गुणा बढ़ेगा। सरकारों का राजस्व बढऩे से बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सरकारों को अतिरिक्त धन मिलेगा अंतत: गुणवत्तापूर्ण बुनियादी सुविधाओं के माध्यम से जीएसटी का लाभ देश की जनता को ही मिलेगा। जीएसटी के कारण ही अब केंद्र सरकार के विभिन्न प्रकार के 'सेस' बंद हो जाएंगे। इस विधेयक के लिए केंद्र तथा राज्य सरकार दोनों भी साधुवाद के पात्र है।

इस दौरान मुख्यमंत्री तथा लहर सिंह के बीच कई बार रोचक बहस के साथ नोकझोंक चलती रही। जिस कारण सदन में कई बार हंसी के ठहाके सुनाई दिए। एक बार तो मुख्यमंत्री ने सीधे उनसे पूछा क्या वे उनको (मुख्यमंत्री) सुन भी रहे हैं? इसके पश्चात बहस के दौरान कई बार मुख्यमंत्री ने सिंह को छेड़ते हुए कहा कि वे (भाजपा में) किसका समर्थन करते हैं। इस पर सिंह ने कहा कि वे भाजपा में होने के कारण येड्डियूरप्पा और ईश्वरप्पा समेत सभी भाजपा नेताओं का समर्थन करते है।

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