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देश में मौसम पूर्वानुमानों को मिला नया आयाम

Updated: IST bangalore news
आम आदमी के दैनिक जीवन को बेहद करीब से प्रभावित करने वाले मौसम की सटीक भविष्यवाणी को एक नया आयाम मिला है। हाल ही में पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया गया अत्याधुनिक उपग्रह इनसैट 3डीआर

बेंगलूरु. आम आदमी के दैनिक जीवन को बेहद करीब से प्रभावित करने वाले मौसम की सटीक भविष्यवाणी को एक नया आयाम मिला है। हाल ही में पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया गया अत्याधुनिक उपग्रह इनसैट 3डीआर ने पूर्व में छोड़े गए इसी श्रृंखला के अन्य उपग्रह इनसैट 3डी के साथ मिलकर देश की मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। इन दोनों उपग्रहों की जोड़ी पृथ्वी और वातावरण की बहु-वर्णक्रमीय तस्वीरें लगातार उपलब्ध करा रही है, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप में उपयुक्त समय पर मौसम के पैटर्न की सटीक भविष्यवाणी करने की क्षमता में अद्भूत वृद्धि हुई है।

अत्याधुनिक उपग्रहों का कमाल

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कहा है कि मौसम पूर्वानुमानों के लिए स्थल और समुद्र के साथ संपूर्ण वातावरण का त्रि-विमीय (थ्री डाइमेंशनल) अवलोकन बेहद जरूरी है। इस अवलोकन क्षमता में तब आशातीत वृद्धि हुई जब भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम (आईएसपी) के तहत इनसैट श्रृंखला के अत्याधुनिक उपग्रह इनसैट-3डी को जुलाई 2013 में छोड़ा गया। इस उपग्रह में 19 चैनल साउंडर और 6 चैनल इमेजर थे। इसके बदौलत देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, चक्रवात, जंगल में आग, कुहरा, ऊपरी वायुमंडल में हलचल अथवा आंधी-तूफान आदि की समय पर पहचान होने लगी।

पिछले 8 सितंबर 2016 को इनसैट-3 डीआर के प्रक्षेपण के बाद मौसम पूर्वानुमानों को एक नई ऊंचाई मिली। संरचना में इनसैट-3डी और इनसैट-3डीआर दोनों उपग्रह एक समान हैं और इनके सक्रिय होने के साथ ही लंबवत रूप में वायुमंडलीय तापमान और आद्र्रता का अवलोकन होने लगा है। इन उपग्रहों में लगे साउंडर तीव्र गति से बदलते मौसम की निगरानी एवं भविष्यवाणी करने में अतिरिक्त रूप से अहम भूमिका निभाते हैं। दरअसल, साउंडर भारतीय उपमहाद्वीप के वायुमंडल में उष्मा संचरण की त्रि-विमीय संरचनात्मक तस्वीर उपलब्ध कराते हैं।

इससे मौसम की भविष्यवाणी करने वाले काफी पहले और आसानी से उन क्षेत्रों की पहचान कर पाते हैं कि कहां मौसम खराब होने वाला होता है अथवा कहां आंधी-तूफान की आशंका है। इन उपग्रहों के इमेजर से हर 15 मिनट में और साउंडर से हर 30 मिनट के अंतराल पर तस्वीरें प्राप्त हो रही हैं।

पहले वेधशालाओं से मिलती थी सूचनाएं

दरअसल, देश में पहले मौसम सूचनाएं जमीनी वेधशालाओं के नेटवर्क से प्राप्त की जाती थीं। मगर यह सूचनाएं कुछ चयनित शहरों तक ही सीमित थीं। वहीं उपग्रहों के जरिए पूरे क्षेत्र जैसे स्थल, समुद्र, मरुस्थल, पहाड़ों आदि पर एक साथ लगातार नजर रखी जा सकती है और यह सुविधा जमीनी वेधशालाओं के नेटवर्क से प्राप्त नहीं की जा सकती। इसी को ध्यान में रखकर इसरो ने 12 सितम्बर 2001 को पहले समर्पित मौसम उपग्रह कल्पना-1 को छोड़ा। कल्पना-1 उपग्रह में तीन चैनलों के साथ अति उच्च रिजोल्यूशन वाले रेडियोमीटर लगे थे। इससे वायुमंडलीय परिवर्तनों, वर्षा पूर्वानुमानों, ऊपरी क्षोभमंडल की आद्र्रता, विकिरण, समुद्री सतह के तापमान आदि की जानकारी मिलने लगी। लगभग एक दशक बाद वर्ष 2013 में 19 चैनल साउंडर एवं 6 चैनल इमेजर वाले अत्याधुनिक मौसम उपग्रह इनसैट 3 डी प्रक्षेपण के साथ ही भारतीय मौसम पूर्वानुमान के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं।

धुंध एवं फसलों पर भी नजर

इनसैट 3डी के साथ इनसैट-3डीआर के जुड़ जाने से अब रुटीन मौसम जानकारियों के अलावा भी कई अहम आंकड़ें प्राप्त होने लगे हैं। अब हर 15 मिनट के अंतराल पर वर्षा पूर्वानुमान जाहिर किया जा सकता है। बेहतर रिजोल्यूशन वाली स्थानीय एवं आकाशीय तस्वीरें देश में चक्रवात के पैटर्न की उत्कृष्ट जानकारी प्रदान करती हैं। जब आसमान साफ होता है तब इससे खेती योग्य भूमि, मरुस्थल, वन, चारागाह, झीलों, जल निकायों, ग्लेशियर आदि पर भी नजर रखी जाती है। यहां तक की धूल और धुएं के कारण वायुमंडल में छाई धुंध की भी निगरानी हो रही है।

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