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नोटबंदी के बाद देश का 'अन्नदाता' परेशान, औने-पौने दाम पर बेच रहा है धान

Updated: IST barabanki
किसानों ने सोचा था कि धान की फसल के बाद परिवार में खुशहाली आएगी, लेकिन नोटबंदी ने उनकी कमर तोड़ दी है।

बाराबंकी. देश में नोटबंदी के बाद परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक तरफ जहां देश का आम आदमी कतारों में खड़ा होकर परेशान हो रहा है, तो वहीं देश का अन्नदाता भी अपनी आगे की फसल की बुवाई के लिए अपने तैयार धान को आधे अधूरे दामों में बेंचने को मजबूर हो रहा है। यह सब हो रहा है किसानों को बैंको से पर्याप्त पैसे न मिल पाने के कारण। किसान कहने को मजबूर हो रहे हैं कि मोदी जी हर साल मौसम की मार पड़ती है, लेकिन इस बार हमें सरकार की मार ने तोड़ दिया।

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हम बात कर रहे हैं बाराबंकी के किसानों की, जहां किसान अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने और अपने खेतों की आगे की बुवाई के लिए अपने खून पसीने से दिनरात मेहनत कर उगाई गयी धान की फसल को आधे-अधूरे दामों में बेंचने को मजबूर है।

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अब हम आपको बताते है कि किसानों की आखिर मजबूरी क्या है? दरअसल किसानों के धान सरकार 14 रुपये 70 पैसे प्रति किलो में धान क्रय केंद्रों पर खरीद रही है। मगर उसका भुगतान वह चेकों के माध्यम से कर रही है। जिसे किसानों को अपने बैंक खाते में जमा कराना होता है। जिसके बाद भी किसान की मुश्किल कम नहीं होती क्योंकि किसान फिर बैंको की लाइन में खड़ा हो और अपने पर्याप्त पैसे का इंतजार करे, जो कि बैंक अभी दे नहीं रहा है।

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इसलिए जब हमने किसानों से बात की तो किसानों ने बताया कि 14 रुपये 70 पैसे प्रति किलो वाला धान वह 9 रुपए प्रति किलो में बेचने के लिए मजबूर है। वर्ना उनकी आगे की खेती और वर्तमान की जरूरतें समय से पूरी नहीं हो पाएंगी।

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इस बात से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश में आम लोगो की नोटबंदी के बाद की स्थिति क्या है। जिस पर केन्द्र की मोदी सरकार को गंभीरता से विचार करना होगा।

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इस गंभीर मुद्दे पर भारतीय किसान यूनियन ने नाराजगी व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन से धान खरीद को जल्द शुरू करने की मांग की है।

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भारतीय किसान यूनियन के प्रांतीय महासचिव मुकेश सिंह ने कहा कि आज नोटबंदी की वजह से किसान परेशान हैं और जबकि आठ लाख कुंतल धान खरीद का लक्ष्य है, जिसके सापेक्ष 1 नवम्बर से अब तक अभी सिर्फ 40 हजार कुंतल धान ही खरीदा गया है। अभी लगभग 7 लाख कुंतल धान खरीदा जाना शेष है और धान खरीद बंद है। सरकार द्वारा धान का समर्थन मूल्य 1,470 रुपये तय है लेकिन नोटबंदी के चलते किसान मजबूरी में 900-1000 रुपये में धान बेचने को मजबूर हो गया है।

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