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UP Election 2017

आखिर बसपा की ओर क्यों आकर्षित हो रहा है मुस्लिम मतदाता ? 

Updated: IST MAYA MULAYAM
ताज बाबा राईन के मुताबिक यहीं बाराबंकी में 2012 चुनाव की पहली जनसभा में सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने मुसलमानों से 18 प्रतिशत आरक्षण का लाभ देने की बात कही थी।

बाराबंकी।सूबे में सत्ताधारी समाजवादी पार्टी को अपनी पहली पसंद के तौर पर देखने वाला मुस्लिम मतदाता उससे रूठा हुआ दिखाई दे रहा है। अब आज के समय में मुस्लिम मतदाताओं की पहली पसंद समाजवादी पार्टी नहीं बल्कि मायावती के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी हो गयी है। मुसलमानों के अंदर अचानक जागे इस बसपा प्रेम ने समाजवादी पार्टी को सदमे में लाने का काम किया है। यह कैसे हुआ और क्यों हुआ यह जानने के लिए बाराबंकी के मुस्लिम मतदाताओं से बात करनी शुरू की तो कुछ मुख्य वजह समझ में आयी जो इनको समाजवादी पार्टी से दूर करती दिखाई दे रही हैं।
18 प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण है मुख्य वजह
बाराबंकी के मुस्लिम मतदाताओं से जब बात की गयी तो सबसे बड़ा कारण जो समझ में आया वह था समाजवादी पार्टी की वादा खिलाफी का। पिछड़े मुसलमानों के नेता के तौर पर अपनी पहचान बना चुके ताज बाबा राईन के मुताबिक यहीं बाराबंकी में 2012 चुनाव की पहली जनसभा में सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने मुसलमानों से 18 प्रतिशत आरक्षण का लाभ देने की बात कही थी जो अब तक अमल में नहीं लाया जा सका। इस कारण बाराबंकी का मुस्लिम मतदाता अबकी बार सपा को सबक सिखाने के लिए बसपा की ओर जाता दिखाई दे रहा है।

मुस्लिम विद्वान भी जाहिर कर चुके हैं अपनी नाराजगी

लगभग एक साल पहले यहीं बाराबंकी के एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्तर के मुस्लिम विद्वान और जमीयत उलेमा हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने भी समाजवादी सरकार पर इसी 18 प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण की बात को लेकर वादा खिलाफ का आरोप लगाकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया था। मौलाना अरशद मदनी ने कहा था कि यदि 18 प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण देने में संविधान आड़े आ रहा है तो सरकार अपनी योजनाओं में मुसलमानों को आरक्षण देने का काम करे। अब शायद चुनाव के समय यहां का मुस्लिम मतदाता मौलाना अरशद मदनी की कही बातों को याद कर रहा है।

चुनावी सर्वे से बढ़ी बेचैनी

ताज़ा चुनावी सर्वे में जिस तरह से किसी बुलेट ट्रेन की तरह बहुमत की ओर फर्राटा भरती हुयी भाजपा दिखाई दे रही है उससे मुस्लिम समाज असमंजस की स्थिति में है। अब उनको यह डर सताने लगा है कि अगर उनका मत कई जगह बंटा तो इस बिखराव का सबसे ज्यादा लाभ भारतीय जनता पार्टी को ही मिलेगा। शायद इसी डर की वजह से मुस्लिम मतदाता समाजवादी पार्टी से बेहतर विकल्प बहुजन समाज पार्टी को मानने लगे हैं।

समाजवादी पार्टी के अन्दर मचा घमासान

जिस तरह से समाजवादी परिवार में चाचा-भतीजे की लड़ाई चल रही है और जिस तरह से उनके नेता अपने ही नेताओं के खिलाफ सड़कों पर उतर कर पिछले दिनों नारेबाज़ी करते दिखाई दिए। उससे पार्टी की साख को एक बहुत बड़ा धक्का लगा है। जनता में ऐसा संदेश गया जैसे यह पार्टी अब अपनों को ही हराने का काम करेगी। इस संदेश मुस्लिम मतदाताओं को उनसे दूर करने का सीधा काम किया है।

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