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गठबंधन से कांग्रेस को मिली संजीवनी, सपा को नहीं मिला फायदा !

Updated: IST rahul and akhilesh
कांग्रेस को समाजवादी पार्टी से गठबंधन के बाद नई संजीवनी मिली है।

बरेली। 1985 के बाद से हाशिए पर चल रही कांग्रेस को समाजवादी पार्टी से गठबंधन के बाद नई संजीवनी मिली है। पिछले चुनाव में जहां कांग्रेस मुख्य मुकाबले में भी नहीं थी। वहीं इस बार बरेली मंडल में कांग्रेस के ज्यादातर प्रत्याशी इस बार मुख्य मुकाबले में नजर आए। जबकि सपा को गठबंधन का ज्यादा फायदा मिलता नहीं दिखा।

छह सीटों पर हैं कांग्रेस प्रत्याशी

सपा-कांग्रेस गठबंधन के बाद मंडल की 25 सीट में से छह सीट पर कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी उतारे हैं। जिसमें बरेली की तीन शहर, कैंट और मीरगंज, पीलीभीत की बीसलपुर, शाजहांपुर की तिलहर और बदायूं की दातागंज सीट पर कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी उतारे। बरेली कैंट और शहर सीट पर पिछले चुनाव में बरेली कैंट सीट पर चौथे स्थान पर रहने वाली कांग्रेस इस बार चुनाव में भाजपा के साथ मुख्य मुकाबले में नजर आई और कांग्रेस के नवाब मुजाहिद ने भाजपा के पांच बार के विधायक राजेश अग्रवाल को कड़ी टक्कर दी।

कांग्रेस प्रत्याशियों ने दी कड़ी टक्कर

शहर विधानसभा में 2012 में कांग्रेस पांचवें स्थान पर थी। इस बार कांग्रेस के प्रेम प्रकाश भाजपा के विधायक डॉक्टर अरुण के साथ मुख्य मुकाबले में नजर आए। कुछ यही हाल मीरगंज विधानसभा का भी रहा। मीरगंज में 2012 में कांग्रेस को महज 3910 वोट मिले थे जबकि इस बार के चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी भाजपा और बसपा के साथ मुकाबला करते नजर आए। कांग्रेस ने यहां त्रिकोणीय मुकाबला कर दिया है। जबकि अन्य सीटों पर सपा को कांग्रेस से गठबंधन का ज्यादा लाभ मिलते नहीं दिखा। जिन सीट पर बसपा ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारे वहां मुस्लिम वोट को रोकने में गठबंधन असफल साबित हुआ।

तिलहर में भी मुख्य मुकाबले में

अगर बात करे शाहजहांपुर की तिलहर सीट की तो यहां पर कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद को चुनाव मैदान में उतारा था। जितिन प्रसाद यहां मुख्य मुकाबले में नजर आए। पिछले चुनाव में कांग्रेस यहां तीसरे नम्बर पर थी लेकिन इस बार जितिन प्रसाद मुकाबले में नजर आए लेकिन जनपद की बाकी सीट पर गठबंधन का असर देखने को नहीं मिला। बसपा ने यहां मुस्लिम वोटों में खूब सेंध लगाई। जिसे गठबंधन रोकने में कामयाब नहीं रहा।

फूलबाबू दे रहे टक्कर

पीलीभीत में बीसलपुर सीट पर चुनाव लड़े अनीस अहमद खां उर्फ फूलबाबू पिछले चुनाव में नम्बर दो पर थे और मंडल में सिर्फ इस सीट पर ही कांग्रेस मुकाबले में नजर आई थी। जिसका कारण फूलबाबू का क्षेत्र में खुद का भी वोट है। सपा ने इस सीट पर ज्यादा जोर नहीं लगाया। इस बार भी कांग्रेस से फूलबाबू चुनाव मैदान में है। वो भाजपा के राम सरन वर्मा को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

यहां गठबंधन को नहीं मिल रहा फायदा

बदायूं की दातागंज सीट पर कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी उतारा है और कांग्रेस नेता सलीम इकबाल शेरवानी ने बदायूं में गठबंधन के लिए प्रचार किया लेकिन यहां पर बसपा ने मुस्लिम वोट बैंक में जमकर सेंध लगाई। जबकि दातागंज सीट पर सपा के बागी प्रत्याशी ने कांग्रेस का खेल बिगाड़ दिया।

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