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गन्ने की फसल से बस्ती के किसानों का मोह हुआ भंग 

Updated: IST farmer,
बस्ती के किसानो का मोह भंग हो गया, गन्ने की मिठास बढ़ने की बजाय कम हो गई है।

बस्ती. उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अपने चरम सीमा पर है। नेतागण तरह-तरह के वादे और दिलासे देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहें हैं, लेकिन इस चुनावी साल में गन्ने की फसल से बस्ती के किसानो का मोह भंग हो गया, गन्ने की मिठास बढ़ने की बजाय कम हो गई है।

जनपद में गन्ने के बेहतर उत्पादन के लिए जाना जाता है। यहां के किसान ज्यादातर केवल गन्ने के फसल पर निर्भर रहते हैं, लेकिन इस बार नगदी फसल उधारी हो गया। हालत यह है कि 14 दिन में भुगतान देने की बात करने वाले चीनी मिलें सालभर से गन्ना किसानों के बकाए का भुगतान नहीं कर पा रही हैं।

किसानों को गन्ने की अगली फसल बोने में दिक्कत आ रही है। समय से गन्ना बेचने के बाद भी उसका भुगतान नहीं मिलना किसानों की परेशानी का बड़ा कारण है। जो किसान केवल गन्ना फसल पर निर्भर रहते थे वह अब दूसरी फसल की ओर रुख कर रहे हैं।
किसानों का सबसे ज्यादा बकाया वाल्टरगंज चीनी मिल पर 3467.71 है, वहीं अठदमा 7419.48 बभनान 1290.43 लाख रुपये बकाया है। सदर ब्लॉक के किसान झिनकान यादव और ईश्वरचंद्र ने बताया कि पिछला गन्ना बकाया तो मिला नहीं इस बार का कब मिलेगा पता नहीं। यहां तक कि कटौती का भी भुगतान वाल्टरगंज चीनी मिल से नहीं मिला है।

गन्ना बकाया भुगतान रोज किया जा रहा है, जिसकी सूचना प्रतिदिन अपडेट की जा रही है। अभी तक 28909.32 लाख के सापेक्ष 16731.48 लाख भुगतान किया जा चुका है। बाकी 12177.84 लाख रुपये भुगतान की प्रक्रिया चल रही है। गन्ना बोआई फीसद कम न हो इसके लिए प्रयास जारी है।

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