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बीमारियों से लड़ता है कान का मैल, दूर करें ये भ्रांतियां, जानें सच्चाई

Updated: IST Ear wax
कान के मैल व सफाई को लेकर कई गलत धारणाएं व भ्रांतियां लोगों में हैं। जानते हैं सच्चाई क्या है:

बारिश के दिनों मे नमी व उमस के चलते कान की बीमारियों मे इजाफा हो जाता है। दूसरी तरफ आज भी कान के मैल व सफाई को लेकर कई गलत धारणाएं व भ्रांतियां लोगों में हैं। जानते हैं सच्चाई क्या है:

भ्रांति : कान मे वेक्स नहीं होनी चाहिए। यह नुकसानदायक है
वास्तविकता : इयरवेक्स( जिसे सामान्य बोलचाल में मैल कहते हैं) जो कान में कुदरती तरीके से बनता है और कई तरह से फायदेमंद है। यह धूल व अन्य बाह्य पदार्थों को अपने में समायोजित करने के साथ साथ कई संक्रमण से बचाता है।

भ्रांति: रोजाना कान साफ करें
वास्तविकता : कान से वेक्स खुद-ब-खुद बाहर निकलता है। कभी-कभी कान की गुहा पतली या टेड़ी मेड़ी होने पर यह अंदर जमा हो जाता है। या फिर पानी जाने से फूल जाता है तब व्यक्ति असहज महसूस करता है। ऐसे में विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए। कान के अंदर कुछ डाले बिना बाहरी सतह पर त्वचा को गीले कपड़े से हल्का साफ कर सकते हैं।

भ्रांति : कान की इयरबड से सफाई सुरक्षित व कारगर है?
वास्तविकता: इयरबड, तीली या इसी प्रकार की अन्य वस्तुएं वेक्स के केवल बाहरी सतही भाग को छूकर निकाल पाते हंै। लेकिन साथ ही मुख्य भाग को और अन्दर धकेल देते हैं। कान के पर्दे के पास वेक्स के फंसने का मुख्य कारण इन चीजों का इस्तेमाल करना ही है। इन वस्तुओं से कान के पर्दे में चोट और संक्रमण का खतरा रहता है।

भ्रांति: गरम तेल फायदेमंद है
वास्तविकता : दर्द होने, सुन्न होने आदि पर कान में गरम तेल डालने से कान मे फंगल संक्रमण व अन्य समस्याएं पैदा कर सकता है।

ध्यान रखें
जुकाम की अनदेखी न करें: ज्यादातर कान के पर्दे व हड्डी के रोग लम्बे समय से जुकाम रहने पर होते हैं। नाक बन्द रहने या जुकाम रहने पर नाक व कान के मध्य स्थित यूस्टेकियन ट्यूब के उचित कार्य न करने की दशा में कान पर प्रतिकूल असर होने लगता है। वही यहां का संक्रमण भी कान मे पहुंच सकता है। कान बहने या अन्य तकलीफ होने पर कान को सूखा रखें। इसमें पानी न जाने दें। नहाते समय कान में तेल या वेसलीन से चिकनी की हुई रुई लगाई जा सकती है। छोटे बच्चों को लिटाकर दूध न पिलाएं। उनका सिर थोडा उंचा रखें तथा दूध पिलाने के बाद पीठ थपथपाएं खुद ही दवाओं का इस्तेमाल न करें। ज्यादा शोरगुल से भी बचें।

जुकाम की अनदेखी न करें: ज्यादातर कान के पर्दे व हड्डी के रोग लम्बे समय से जुकाम रहने पर होते हैं। नाक बन्द रहने या जुकाम रहने पर नाक व कान के मध्य स्थित यूस्टेकियन ट्यूब के उचित कार्य न करने की दशा में कान पर प्रतिकूल असर होने लगता है। वही यहां का संक्रमण भी कान मे पहुंच सकता है। कान बहने या अन्य तकलीफ होने पर कान को सूखा रखें। इसमें पानी न जाने दें। नहाते समय कान में तेल या वेसलीन से चिकनी की हुई रुई लगाई जा सकती है।

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