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यहां डिग्री नहीं रखती इलाज के लिए मायने खुलेआम चल रही झोलाछाप डॉक्टरों की दुकान

Updated: IST Quack becoming threat for people
स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता का आलम यह है कि नवागढ़ को छोड़कर जिले के अन्य ब्लॉको में कार्यरत झोलाछाप डॉक्टरों की सूची तक उपलब्ध नहीं है।

बेमेतरा.स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता से जिले में झोलाछाप डाक्टरों बेखौफ होकर प्रेक्टिस कर लोगों की जान खतरे में डाल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता का आलम यह है कि नवागढ़ को छोड़कर जिले के अन्य ब्लॉको में कार्यरत झोलाछाप डॉक्टरों की सूची तक उपलब्ध नहीं है। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग जिले में नर्सिंग होम एक्ट का क्रियान्वयन करने में पूरी तरह से असफल साबित हो रहा है।

नहीं बनी झोलाछाप डॉक्टरों की सूची
स्वास्थ्य विभाग को जिले में प्रैक्टिस कर रहे झोलाछाप डाक्टरों की पहचान कर सूची बनाने के निर्देश मिले थे, लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने बाद भी विभाग झोलाछाप डाक्टरों की सूची बनाने में नाकाम रहा, कार्रवाई तो दूर की बात रही। खानापूर्ति के लिए वर्ष भर में एक दो कार्रवाई कर ली जाती है। ऐसी स्थिति में विभाग के संबंधित अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर सवाल उठते है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय झोलाछाप डॉक्टर
गौरतलब हो कि शहर की तंग गलियों व ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार है। जिनकी संख्या में दिनोंदिन वृद्धि देखने को मिल रही है। झोलाछाप डॉक्टरों के गलत इलाज की वजह से कई लोगों की जान चली गई। बीते दिनों ग्राम बावामोहतरा में झोलाछाप डॉक्टर के गलत इलाज की वजह से एक महिला की जान चली गई। इसके अलावा जिले में कई ऐसे प्रकरण सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद कार्रवाई को लेकर कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

संस्थागत प्रसव में पिछडऩे बाद जागा महकमा
बताना होगा कि जिले के बेमेतरा, नवागढ़, बेरला व साजा ब्लॉक की तुलना संस्थागत प्रसव में नवागढ़ काफी पिछड़ चुका है। आलम यह है कि करीब 40 प्रतिशत प्रसव घर में हुए। संस्थागत प्रसव की स्थिति में सुधार लाने कलक्टर के निर्देश पर झोलाछाप डॉक्टरों की सूची तैयार तो कर ली गई, लेकिन कार्रवाई को लेकर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। स्थिति यह है कि काफी प्रयासों के बाद भी नवागढ़ ब्लॉक में संस्थागत प्रसव के मामलों में वृद्धि देखने को नहीं मिल रही है।

नर्सिंग होम एक्ट के क्रियान्वयन में फेल
गौरतलब हो कि स्वास्थ्य सुविधाओं व सेवाओं में सुधार को लेकर नर्सिंग होम एक्ट के तहत स्वास्थ्य संस्थाओं का पंजीयन होना है। एक्ट के तहत पंजीयन के लिए जिले भर 300 से अधिक स्वास्थ्य संस्थानों के आवेदन जिला स्वास्थ्य विभाग को मिले। लेकिन एक्ट के मापदण्डों को पूरा करने वाले मात्र 65 संस्थानों को पंजीयन किया गया। शेष संस्थानों के आवेदन खारिज कर दिया गया। ऐसी स्थिति में आवेदन खारिज स्वास्थ्य संस्थानों पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

कागजों पर बनी ब्लॉक व जिला स्तरीय टीम
बताना होगा कि झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई को लेकर शासन के निर्देश पर ब्लॉक व जिला स्तरीय टीम का गठन किया गया था, लेकिन टीम का गठन कागजों तक ही सीमित रहा। टीम में एसडीएम, नगरीय निकाय अधिकारी, बीएमओ, सीएमएचओ शामिल है। लेकिन कार्रवाई के नाम पर ब्लॉक व जिला स्तरीय टीम द्वारा एक भी प्रकरण नहीं बनाया गया है। ऐसी स्थिति में आमजनों के स्वास्थ्य को लेकर विभागों की गंभीरता जाहिर होती है।

कलक्टर के आदेश बाद भी कार्रवाई नही

जिला स्वास्थ्य विभाग की बेपरवाह कार्यप्रणाली का आलम यह है कि कलक्टर रीता शांडिल्य के आदेश के 8 माह से अधिक समय बीत जाने बाद भी जिला मुुख्यालय में प्रैक्टिस कर रहे झोलाछाप डाक्टर की जांच शुरू नही हो पाई है। मामले में सीएमएचओ-बेमेतरा डॉ एसके शर्मा ने कहा कि बीएमओ से सूची मंगाकर, नर्सिंग होम एक्ट के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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