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खेतों की उपजाऊ काली मिट्टी क्यों हो रही लाल, पढि़ए पूरी खबर

Updated: IST Over use of chemical fertilizer
जिले में रसायनिक उर्वरक के अधिक उपयोग से खेतों की काली मिट्टी धीरे-धीरे लाल मिट्टी में तब्दील हो रही है। मिट्टी के साथ ही उर्वरता भी धीरे-धीरे कम होती जा रही है।

बेमेतरा. जिले में रसायनिक उर्वरक के अधिक उपयोग से खेतों की काली मिट्टी धीरे-धीरे लाल मिट्टी में तब्दील हो रही है। मिट्टी के रंग में परिवर्तन के साथ ही उसकी उर्वरता भी धीरे-धीरे कम होती जा रही है। इसका नजारा बेरला ब्लॉक के गांवों में देखने को मिल रहा है। लेकिन कृषि विभाग के अधिकारी जमीनी हकीकत को सामने लाने से बचते हुए आंकड़ों की बाजीगरी में लगे हुए हैं।

किसान नासमझी में कर रहे उपयोग
जिले में रबी और खरीब फसल में यूरिया, डीएपी, पोटाश व अन्य तरह के 12 से भी अधिक किस्म के रसायनिक खाद का उपयोग किया जाता है। जानकार विजय तिवारी बताते हैं कि किसान नासमझी में इन रसायनिक खाद का निर्धारित अनुपात में उपयोग को समझ नहीं पा रहे हैं, जिसकी वजह से खेती की जमीन की अम्लीयता बढऩे के साथ काली से लाल होती जा रही है। इसके अलावा फसल के दौरान कीटनाशकों का इस्तेमाल स्थिति को और गंभीर बना देता है।

खपत में साल दर साल हो रही बढ़ोतरी
बताना होगा कि रसायनिक खाद का प्रयोग 6 साल पहले जहां 63,000 मीट्रिक टन हुआ करता था, जो अब बढ़कर 90 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा हो चुका है। खरीफ फसल के दौरान यूरिया की खपत 25400 मीट्रिक टन, डीएपी 16900 मीट्रिक टन, एसएस पी 5650 मीट्रिक टन, पोटाश 4500 मीट्रिक टन व अन्य उर्वरक 1100 मीट्रिक टन सहित 53550 मीट्रिक टन की खपत है। वहीं जारी रबी फसल के लिए यूरिया 14000 मीट्रिक टन, डीएपी 10700 मीट्रिक टन, एसएस पी 5900 मीट्रिक टन, पोटाश 4300 मीट्रिक टन, बारा बत्तीस 2200 मीट्रिक टन, सहित 37100 मीट्रिक टन खपत का लक्ष्य रखा गया है। इस तरह से दोनों फसल सत्र में कुल 90650 मीट्रिक टन की खपत है।

हरियाणा-पंजाब के किसान अग्रणी
जानकारों के अनुसार, जिले में हरियाणा-पंजाब व अन्य प्रदेशों से आकर खेती कर रहे किसान फसल उत्पादन के लिए रसायनिक खाद का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। यही वजह है कि बीते एक दशक में रसायनिक खादों की खपत में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। जानकार बताते हैं कि शुरुआती दौर में तो रसायनिक खाद लाब देते हैं, लेकिन इसके दूरगामी परिणाम हानिकारक होते हैं।

खाद में संतुलन होना जरूरी
कृषि उपसंचालक विनोद वर्मा का कहना है कि मिट्टी में पीएच मान का संतुलन होना जरूरी है, जिसे देखते हुए फसल को उर्वरक दिया जाना चाहिए। पीएच की जानकारी के लिए मिटटी की स्वास्थ्य जांच कराएं, जिसके बाद जरूरत के हिसाब से खाद का उपयोग करें। खेतों में उर्वरता को बरकरार रखने के लिए जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

जैविक खाद का करें उपयोग
कृषि वैज्ञानिक पीके गुप्ता का कहना है कि रसायनिक खाद के असंतुलित इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता कम होती है और बंजर होने लगती है। इसके साथ मिट्टी की जलधारण क्षमता भी प्रभावित होती है। रसायनिक खाद के इस्तेमाल से न केवल किसानों का अधिक खर्च हो रहा है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित हो रही है। किसानों को जैविक खाद का उपयोग करना चाहिए।

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