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फोरव्हीलर की जगह मोटरसाइकिल से दफ्तर आ रहे साहब

Updated: IST PHE department has had four crores incomplete.
करोड़ों रुपए के बजट वाले पीएचई विभाग में आज स्थिति यह हो गई है कि गाडिय़ों में डीजल भरवाने के लिए अधिकारियों के पास एक ढेला तक नहीं है।

बैतूल। करोड़ों रुपए के बजट वाले पीएचई विभाग में आज स्थिति यह हो गई है कि गाडिय़ों में डीजल भरवाने के लिए अधिकारियों के पास एक ढेला तक नहीं है। पेट्रोल पंप संचालक ने भी डीजल देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में भला गाड़ी मालिक कैसे पीछे रहता। उसने भी अनुबंध समाप्त कर गाड़ी विभाग से खींच ली है। जिसके बाद विभाग के मुखिया को मोटरसाइकिल से दफ्तर आना पड़ रहा हैं। सोमवार को कलेक्टोरेट में आयोजित जनसुनवाई में कर्मचारी के साथ मोटरसाइकिल पर पहुंचे पीएचई के ईई चर्चा का विषय बने रहे। बताया गया कि विगत छह माह से शासन से बजट नहीं मिलने के कारण पीएचई विभाग पर पौने चार करोड़ रुपए का कर्ज आ गया है।
करोड़ों का भुगतान बताया
पीएचई विभाग की मुताबिक पौने चार करोड़ रुपए का भुगतान अधूरा पड़ा है। इनमें 80 लाख हैंडपंप संधारण कार्य, 90 लाख नलजल योजनाओं के मेंटेनेंस और 40 लाख बसाहट में नवीन हैंडपंप कार्य जाने की राशि शामिल है। इसके अलावा डीजल, वाहनों के किराए, बिजली आदि का भी लाखों रुपए बकाया होना बताया गया है। जिसका शासन स्तर से पिछले छह महीनों से कोई भुगतान नहीं किया गया है। स्थिति यह है कि भुगतान को लेकर विभाग कई बार शासन स्तर तक पत्राचार भी कर चुका है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसे में विभाग का कामकाज भी ठप हो गया है।
अनुबंधित वाहनों को किया बंद
शासन स्तर से बजट नहीं मिलने के कारण विभाग ने अनुबंधित वाहनों को पहले ही बंद कर दिया था, लेकिन अब विभाग प्रमुख को भी अपना वाहन बंद करना पड़ा है। बताया गया कि विगत छह माह से पेट्रोल पंप मालिक को डीजल का भुगतान नहीं किए जाने के कारण उसने डीजल देने से हाथ खड़े कर दिए। इसी प्रकार गाड़ी मालिक ने भी लंबे समय से किराया नहीं मिलने वाहन वापस ले लिया है। जिसके कारण विभाग के कार्यपालन यंत्री को भी मोटरसाइकिल से दफ्तर आना-जाना करना पड़ रहा है। जो स्थिति है उसमें बिजली बिल का भी बकाया चल रहा है। विभाग के कर्मचारियों की माने तो कभी भी लाइन कट सकती है। उल्लेखनीय हो कि पिछले दो सालों से शासन स्तर से नए कार्यों को मंजूरी प्रदान नहीं की गई है।
इनका कहना
- विगत दो सालों से नए कार्यों को मंजूरी नहीं मिली है। पुराने कार्यों का ही पौने चार करोड़ रुपए का भुगतान अभी बकाया है। विभाग का संचालन करना मुश्किल हो रहा है। बजट के अभाव में अनुबंधित वाहनों को भी बंद करना पड़ रहा है।
- पंकज विजयवर्गीय, ईई पीएचई विभाग बैतूल।

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