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कलेक्टर के खिलाफ लामबंद कर्मचारी मोर्चा

Updated: IST MLA
कलेक्टर शंशाक मिश्र की कार्यप्रणाली को लेकर गुरुवार को कर्मचारियों का आक्रोश फूट पड़ा।कर्मचारीविधायक के निवास पर अपनी पीड़ा सुनाने जा पहुंचे।

बैतूल। बैतूल जिले के इतिहास में संभवत: पहली बार ऐसा हुआ है कि कर्मचारी तबका जिले के मुखिया के खिलाफ लामबंद हुआ हो। कलेक्टर शंशाक मिश्र की कार्यप्रणाली को लेकर गुरुवार को कर्मचारियों का आक्रोश फूट पड़ा। मान्यता प्राप्त एवं गैर मान्यता प्राप्त 22 संगठनों के वरिष्ठ पदाधिकारी एकराय होकर सुबह विधायक के निवास पर अपनी पीड़ा सुनाने जा पहुंचे। संगठनों का कहना था कि कर्मचारी एवं अधिकारियों के प्रति उचित कार्यप्रणाली अपनाई जाए तथा शासन द्वारा निर्देशित समय में ही कार्य कराया जाए। कर्मचारियों की इस खिलाफत के बाद प्रशासनिक महकमे में भूचाल आ गया है। वैसे जिले की आमजनता कलेक्टर की कार्यप्रणाली को लेकर संतुष्ठ हैं, क्योंकि उनके आने के बाद प्रशासनिक मशीनरी में कसावट आई हैं और लोगों की समस्याओं का त्वरित निराकरण हो रहा है।
इसलिए लेना पड़ी विधायक की शरण
कलेक्टर की कार्यप्रणाली को लेकर कर्मचारी महकमा पहले से परेशान हैं। सीधे तौर पर कर्मचारी कलेक्टर के समक्ष अपनी बात रखने से भी डर रहे थे। इसलिए सभी संगठनों के पदाधिकारियों ने एकजुट होकर विधायक से मामले में बात करने का मन बनाया। चूंकि विधायक ही एक ऐसे व्यक्ति हैं जो कर्मचारियों की बात सही तरीके से कलेक्टर के समक्ष रख सकते हैं। यहीं कारण था कि कर्मचारी संगठन गुरुवार सुबह गुपचुप तरीके से विधायक खंडेलवाल के निवास पर जा पहुंचे। कर्मचारियों ने ज्ञापन के माध्यम से विधायक के समक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त की। कर्मचारी संगठनों का कहना था कि वे कलेक्टर की व्यक्तिगत बुराई करने नहीं आए हैं बल्कि वे कहना यह चाहते हैं कि कलेक्टर जो भी कार्रवाई करे वह न्यायसंगत हो। यदि किसी कर्मचारी पर आरोप-प्रत्यारोप लग रहे हैं तो पहले जांच कराई जाए उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाए। बगैर सोचे-समझे कर्मचारी के विरूद्ध एक्शन नहीं लिया जाए। कर्मचारियों का कहना था कि वे भयभतीत एवं असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और मानसिक रूप से प्रताडि़त हो रहे हैं। आधारहीन कार्रवाईयों के कारण जनमानस में उनकी छवि को धूमिल किया जा रहा है।
कर्मचारी संगठनों ने यह लगाए आरोप
1.शासन के द्वारा निर्धारित कार्य समय सुबह10:30 बजे से शाम 5:30 बजे के अलावा देर रात तक शासकीय कार्य कर्मचारियों से कराया जा रहा है। विशेष परिस्थितियों में ठीक हैं लेकिन इसे परंपरा बना दिया गया है जो न्याय संगत नहीं है।
2. कलेक्टर द्वारा बिना किसी वजह के कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया जाता है। बिना जांच, बिना पक्ष सुने एवं साक्ष्य के बगैर सीधे कर्मचारी/अधिकारी पर कार्रवाई करके वेतन वृद्धि रोकना, निलंबन करना एवं बिना जांच के सीधे वेतन कटौती की जा रही है।
3. कलेक्टर किसी भी प्रकरण में त्वरित कार्रवाई की जा रही है जबकि हितग्राहियों से दस्तावेज मिलने, ऑनलाइन पंजीयन, स्वीकृति के बाद विभागीय लक्ष्य आवंटन होने के बाद ही हितग्राही को लाभ दिया जा सकता है। मैदानी कर्मचारियों के पास एक से अधिक तीन, चार, छह, आठ पंचायतों का प्रभार हैं ऐसे में सभी हितग्राहियों का कार्य त्वरित किया जाना संभव नहीं है।
4. जिले में महिला कर्मचारी/ अधिकारी कार्यरत हैं जिन्हें देर रात तक कार्य कराया जाना उचित नहीं है। जो देर रात्रि में अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रही है।
5. कलेक्टर द्वारा पद्भार ग्रहण करने से आज दिनांक तक कर्मचारी/ अधिकारियों के प्रति बिना जांच के जो भी कार्रवाईयां की गई है उसे निरस्त किया जाए। तथा झूठी शिकायत करने वाले पर कार्रवाई की जाए।

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