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जननी वाहन के अभाव में घर में करना पड़ा प्रसव

Updated: IST
आमला विकासखंड के ग्राम सोनतलाई में जननी एक्सप्रेस के नहीं पहुंचने पर महिला का घर में ही प्रसव करना पड़ा। हालत बिगडऩे के कारण कुछ देर बाद ही महिला ने दम तोड़ दिया।

बैतूल। महिलाओं के सुरक्षित प्रसव का दावा करने वाले स्वास्थ्य विभाग की पोल एक बार फिर खुल गई है। आमला विकासखंड के ग्राम सोनतलाई में जननी एक्सप्रेस के नहीं पहुंचने पर महिला का घर में ही प्रसव करना पड़ा। हालत बिगडऩे के कारण कुछ देर बाद ही महिला ने दम तोड़ दिया। यदि समय रहते महिला को वाहन की सुविधा उपलब्ध करा दी जाती तो आज उसकी मौत नहीं होती। इधर पूरे मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग चुप्पी साधे बैठा है। इसके पहले जननी वाहन चालकों की लापरवाही सामने आ चुकी है। जिसमें एक प्रसूता को अस्पताल छोडऩे की जगह खेड़ी में उतार दिया गया था। इलाज में देरी के कारण डॉक्टर प्रसूता का बच्चा नहीं बचा सके थे।
जानकारी के मुताबिक आमला के सोनतलई गांव में रहने वाली 35 वर्षीय पूनम पत्नी सुनील निगम को बुधवार शाम से प्रसव पीड़ा शुरू हो गई थी। परिजनों ने तत्काल इसकी सूचना आशा कार्यकर्ता को देने के साथ-साथ जननी एक्सप्रेस को भी कॉल कर दिया था, लेकिन दो घंटे बीतने के बाद भी आशा कार्यकर्ता मौके पर नहीं पहुंची और न ही जननी एक्सप्रेस पहुंची। जिसके बाद पूनम का घर में ही प्रसव करना पड़ा। पूनम ने स्वस्थ्य बच्चे को जन्म दिया, लेकिन इसके बाद भी उसे कोई सरकारी वाहन की मदद नहीं मिल सकी। पड़ोसी इंद्रजीत परमार ने बताया कि रात 11 बजे अचानक पूनम की तबीयत बिगडऩे लगी।परिजनों ने 108 को फोन लगाया लेकिन वह भी नहीं आई।रात करीब 12 बजे तड़प-तड़पकर पूनम ने दम तोड़ दिया। वाहन के अभाव में पूनम की मौत हो जाने से परिजनों में खासा आक्रोश देखा जा रहा है। बताया गया कि पूनम के दो अन्य बच्चे भी है तीसरी बच्ची हुई थी। इस संबंध में बीएमओ मनीष जौंजारे का कहना था कि जननी एक्सप्रेस और 108 के नहीं पहुंचने की जानकारी उन्हें भी मिली है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। जो भी मामले में दोषी पाया जाएगा उसके विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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