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जीवन है पानी की बूंद, कब मिट जाए रे

Updated: IST bhind
जैन संत आचार्य विनम्र सागर का भव्य स्वागत

भिण्ड .ख्यात जैन संत गणाचार्य विराग सागर के परम् शिष्य विनम्र सागर का गुरुवार को नगर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। इंदिरा गांधी चौराहा इटावा रोड से बैंड बाजों के साथ सकल जैन समाज एवं सामाजिक संगठनों ने जगह- जगह रंगोली बनाकर तथा उनका पाद प्रक्षालन कर स्वागत किया। इसके बाद संतजन हजारों श्रद्धालुओं के साथ परेट चौराहा, सदर बाजार, गोल मार्केट, फ्रीगंज, बताशा बाजार होते हुये चैत्यालय जैन मंदिर ऋषभ सत्संग भवन में पहुंचे।

नगर प्रवेश के बाद सुबह ऋषभ सत्संग भवन में आचार्य विनम्र सागर ने अपनी स्वरचित कविता Óजीवन है पानी की बूंद कब मिट जाए रेÓ के साथ मंगल प्रवचन शुरू किए। उन्होंने कहा कि दुनिया में हर व्यक्ति चाहता है कि उसके पास अपार लक्ष्मी हो जो हमेशा उसके पास ही रहे, लेकिन हर बात अपने मन की नहीं होती। चाहते हुए भी लक्ष्मी आकर चली जाती है । उन्होंने कहा कि, हम अपनी दिनचर्या में कुछ ऐसे कार्य करते हैं जो पूर्वाचार्यों के व शास्त्रों के अनुसार नहीं होते उनसे विपरीत होते हैं जिससे हमारे घर की आई हुई लक्ष्मी भी अकारण ही हमारे हाथ से निकल जाती है । सात स्थान ऐसे हंै जहां पर प्राणी को मौन धारण करना चाहिए। मल-मूत्र विसर्जन के समय, स्नान व भोजन के समय, भोग के समय और भजन-पूजन के समय मौन रखना चाहिए।उन्होंने कहा कि दांत से काटकर कोई वस्तु नहीं खाना चाहिए ऐसा करने से भी लक्ष्मी स्थिर नहीं रहती।कार्यक्रम का शुभारंभ में मंगलाचरण हेमा दीदी व निक्कू जैन ने किया। गणाचार्य विराग सागर के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्जवलन चैत्यालय जैन मंदिर कमेटी के रतनलाल जैन, सुरेन्द्र जैन, महेन्द्र जैन, राकेश जैन के साथ रविसेन जैन, संजू जैन ने किया। पाद प्रक्षालन प्रद्युम्र जैन ने, शास्त्र भेंट चन्द्रप्रभु महिला मंडल ने किया। कार्यक्रम का संचालन मनोज जैन ने किया। इस मौके पर जगदीश जैन, उपस्थित रहीं।

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