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दादरी की पूनम मेहला ने संजोया है जहां में छा जाने का सपना

Updated: IST Poonam Mehla
जीवन में कुछ पाने व जहां में छा जाने का सपना हर कोई देखता है, यह बढ़ती प्रतिस्पर्धा और समय की मांग है

भिवानी। जीवन में कुछ पाने व जहां में छा जाने का सपना हर कोई देखता है, और यह बढ़ती प्रतिस्पर्धा और समय की मांग है, कि अब एक नहीं बहुक्षेत्रों में प्रतिभावान खुद ही को श्रेष्ठ साबित कर पाते हैं। यानी दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि आज के युग में बहुमुखी प्रतिभा के धनी लोग ही सफलता का प्रबंध पाते हैं। इसी बात को आत्मसात करते हुए चरखी दादरी निवासी डा. पूनम महेला की बहुमुखी प्रतिभा के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में खुद को साबित करने के लिए सपना संजोए है। इसलिए उन क्षेत्रों में केवल प्रयासरत है बल्कि अपने हिस्से में दर्ज होने वाली उपलब्धियों से सीख ले कर निरंतर आगे बढ़ गई।

चरखी दादरी के प्रोफेसर कालोनी की रहने वाली डा. पूनम मेहला दादरी के एक निजी अस्पताल में साइक्लोजिस्ट हैं। पूनम का हाल ही में पुनम मेहला का चयन इसी वर्ष अक्टूबर माह में दिल्ली में होने वाली मैसेज इंडिया अर्थ प्रतियोगिता में हुआ इसके लिए वह दिन रात मेहनत करते हुए अभ्यासरत हैं। वह कहती हैं कि इस सत्र की हर प्रतियोगिता में अत्यधिक प्रतिस्पर्धा होती है तथा प्रतियोगिता में देश भर से अनेक प्रतिभागी भाग लेते हैं इसलिए खुद को श्रेष्ठ सिद्ध करने के लिए अतिरिक्त मेहनत वह अभ्यास की आवश्यकता होती हैं। इसी कारण वह अलग-अलग शहरों में अलग-अलग व्यवहार विधाओं का प्रशिक्षण ले रही हं। इससे पूरा उन्होंने इस प्रतियोगिता में भागीदारी करने के लिए कठिन चयन प्रक्रिया को मेहनत के बल पर पार किया।

दो साक्षात्कारों से गुजरने के बाद उनकी मेहनत रंग लाई और वह चयनित हुई पूनम का कहना है कि वह कभी भी सफलता पाकर मंत्रमुग्ध नहीं होना चाहिए बल्कि उस सफलता को कम मानते हुए और मेहनत के साथ आगे बढऩा चाहिए सिर्फ ग्लैमर की दुनिया में नहीं। मैं शिक्षा के क्षेत्र में भी हमेशा अगर नहीं रही हैं शायद इसलिए वे चिकित्सा के क्षेत्र में भी नाम कमाने के लिए संकल्पबद्ध है।

पूनम मेहला का कहना है कि फिलहाल वह अपना पूरा ध्यान अक्टूबर में होने वाली मिस इंडिया अर्थ प्रतियोगिता पर केंद्रित किए हुए है उनका सपना इस सफलता में श्रेष्ठता पाकर चरखी दादरी का नाम रोशन करने का है हालांकि पूनम की बचपन की शिक्षा दादरी में ही संपन्न हुई उसके बाद दिल्ली के यूनिवर्सिटी में उच्च शिक्षा ग्रहण करने के दौरान शिक्षा के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में आगे बढऩे की सोची। इसलिए वह निरंतर सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विभाग लेती रही हैं।

वह बताती हैं वैसे तो स्कूल स्तर से ही बाल सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उन्होंने अभिनय से प्रेरित होकर अनेक बार विश्वविद्यालय स्तर पर खुद प्रतिभा का लोहा मनवाया और अपनी अभिनय कला को तराशा। विश्वविद्यालय छतरपुर के अनेक बड़े कार्यक्रमों में प्रस्तुतियां दी। जिससे उनका मनोबल बढ़ता गया तथा इन्हीं कार्यक्रमों ने उनको निरंतर आगे बढऩे के लिए प्रेरित भी किया, क्षेत्र में आने के लिए उनके परिजनों का भरपूर सहयोग रहा है। इतना ही नहीं पूनम सांस्कृतिक कार्यक्रमों के इलावा सामाजिक कार्यों में भी हमेशा आगे रहती हैं वह अनेक छात्रों को सामाजिक कार्यों के लिए प्रेरित कर चुकी हैं। उनका कहना है कि जीवन में किसी एक क्षेत्र को प्रमुख मानते हुए लक्ष्य निर्धारण करना चाहिए, लेकिन साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए, विशेषकर समाज हित कार्यों के लिए समय पर जरुर निकालना चाहिए।

अभी तुम मानव सामाजिक प्राणी हैं लेकिन प्रकृति बिना किसी का भी अस्तित्व नहीं है। इसलिए वह जीवन में प्रकृति को अहम मानते हुए संरक्षण की सीख भी देती हैं। वह कहती है कि बेटियों को बाधाओं को चुनौती समझकर पार करना चाहिए तथा परिजनों के सहयोग से अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढऩा चाहिए। उच्च शिक्षा के दौरान सीखी गतिविधियां दिल्ली यूनिवर्सिटी में उच्च शिक्षा ग्रहण करने के दौरान उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में आगे बढऩे की सोची इसके लिए वह निरंतर सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेती रही। पूनम सांस्कृतिक कार्यक्रमों के इलावा शामिल सामाजिक कार्य में भी भाग लेती है।

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