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PMT: भोपाल में इन 22 डॉक्टर्स के एडमिशन होंगे कैंसिल, जानें क्यों...

Updated: IST vyapam scam
इस मामले में अब सुनवाई गुरुवार को होगी। सूत्रों के मुताबिक कॉलेज प्रशासन हाईकोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति भी प्रस्तुत करेगी।

भोपाल। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2008 से लेकर 2012 बैच के 634 एमबीबीएस छात्रों के प्रवेश रद्द करने के बाद सीबीआई मामले को लेकर फिर सक्रिय हो गई है। सीबीआई ने मंगलवार को भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के 22 छात्रों के रिकॉर्ड तलब किए हैं। यह सभी 2013 बैच के हैं। व्यापमं कांड की जांच के लिए गठित की गई स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने इन छात्रों को संदिग्ध पाया है।

इधर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने छात्रों के प्रवेश रद्द करने की तैयारी कर ली है। घोटाले में नाम आ जाने के बाद भी कुछ स्टूडेंट्स मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं। गांधी मेडिकल कॉलेज में 2009 बैच की दो छात्राएं ऐसी हैं, जो यहां इंटर्न कर रही हैं। इनमें एक धार जिले की भारती अचाले हैं। जबकि, दूसरी सीहोर निवासी आकृति वर्मा। जीएमसी डीन डॉ. एमसी सोनगरा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद स्टूडेंट को न तो डिग्री देंगे और न ही इंटर्नशिप का सर्टिफिकेट।

मामले में आरटीआई एक्टीविस्ट अभय चौपड़ा ने बताया कि 2013 में करीब 300 मेडिकल स्टूडेंट्स ने फर्जी तरीके से प्रवेश लिया था। इनमें से 60 पर एफआईआर काी की गई है जिसमें से 22 छात्र जीएमसी में पढ़ रहे हैं। बाकी प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में हैं। 2013 बैच के फर्जी स्टूडेंट्स का मामले में फिलहाल जांच चल रही है जिसपर फैसला आना बाकी है।

5 छात्रों की सुनवाई आज
- मप्र हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में उन पांच छात्रों की याचिका पर बुधवार को सुनवाई होनी थी जिनके एडमिशन 2009 में फोटो मैच नहीं होने से एमजीएम मेडिकल कॉलेज ने निरस्त किए थे।
- इस मामले में अब सुनवाई गुरुवार को होगी। सूत्रों के मुताबिक कॉलेज प्रशासन हाईकोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति भी प्रस्तुत करेगी।

2013 में निरस्त हुई थी पीएमटी
- नकल की पुष्टि होने के बाद 9 अक्टूबर 2013 को व्यापमं ने 345 छात्रों की पीएमटी निरस्त कर दी थी। 110 छात्र ऐसे थे जो प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन ले चुके थे।
- इसमें भोपाल जीएमसी के 24 छात्र भी थे। पीएमटी निरस्त होने के बाद इन छात्रों के एडमिशन निरस्त करने का निर्णय लिया गया था। छात्र हाईकोर्ट गए तो राहत मिल गई।

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