Patrika Hindi News

GAS TRAGEDY: इन FACT को पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि कितने बड़े खतरे में है भोपाल?

Updated: IST Bhopal gas tragedy
जहरीली हो रही हवा, जमीन और भूजल, 21 साल में 22 बस्तियों का भू-जल जहरीला, 15 और शामिल होने की आशंका, 2005 में पहली बार जमा कराया गया था कचरा

भोपाल। दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी के बाद बड़ी आबादी भू-जल और जमीन प्रदूषण की मार झेल रही है। इसकी मुख्य कारण मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित यूनियन कार्बाइड की बंद पड़ी फैक्ट्री के बाहर खुले में पड़ा हुआ 11 हजार मीट्रिक टन कचरा है। हर बरसात के साथ इसके रसायन पानी में मिल रहे हैं। इनमें 22 बस्तियों को तो सुप्रीम कोर्ट पहले ही प्रभावित घोषित कर चुका है। इसके बाद अब करीब 15 और बस्तियों के भूजल में ये जहरीले रसायन पहुंच गए हैं।

गैस पीडि़त संगठनों के लिए काम करने वालों का दावा है जब तक यूनियन कार्बाइड कारखाने में फैले इस कचरे को साफ नहीं किया जाएगा यहां की स्थिति में कोई सुधार आने की गुंजाइश नहीं है। यूनियन कार्बाइड कारखाना के 332 मीट्रिक टन कचरे को पीथमपुर में नष्ट किया जाएगा। इसके लिए बजट की मंजूरी हो गई, लेकिन जिस कचरे के कारण प्रदूषण फैल रहा है अब तक उसकी सही तरीके से जांच भी नहीं कराई गई। यह वह कचरा है जिसे कारखाने के तीन तालाब में दबा दिया गया था। करीब 32 एकड़ में बने इन तालाब में कारखाने का जहरीला पानी जमा होता था। ये परिसर के बाहर है। इसके जमीन में मिलने से मिट्टी और पानी दूषित हुआ।

21 साल में 22 बस्तियां का पानी दूषित
पहली बार 1991 में यूनियन कार्बाइड के पास भूमिगत जल प्रदूषित होने का पता चला। प्रदेश सरकार की जांच के बाद ट्यूबवैल को बंद कराने की प्रक्रिया शुरू हुई। पहले चरण में 14 बस्तियां भू-जल प्रभावित घोषित हुई। इसके बाद इनकी संख्या बढ़कर 18 हो गई। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च लखनऊ की रिपोर्ट के बाद 2012 में 22 बस्तियां पानी प्रभावित मानी गईं। पेयजल के लिए अलग लाइन बिझाई गई है।

रिपोर्ट में यह मिली स्थिति
- 2009-10 में नेशनल इनवायरमेंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट नागपुर (नीर) और नेशनल जियो फिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट हैदराबाद (एनजीआर) के अध्यक्ष से पता चला कि यूका के जहरीले कचरे से दूषित मिट्टी 11 हजार मीट्रिक टन है।
ठ्ठ कार्बाइड से लगी जमीन जहां सोलर पॉन्ड थे वहां 11 हजार मीट्रिक टन दूषित मिट्टी को साफ करना सबसे बड़ी समस्या।
- 67 एकड़ में कारखाना, 32 एकड़ में तीन सोलर पॉन्ड जहां दूषित पानी जमा होता था। 1996 में जांच के दौरान 11 ट्यूबवैल का पानी दूषित मिला। इसके बाद नगर निगम ने पेयजल सप्लाई की व्यवस्था की।

2005 में इकट्ठा कराया गया था 332 मीट्रिक टन कचरा
हा ईकोर्ट के आदेश के बाद 2005 में यूनियन कार्बाइड परिसर में फैले कचरे को इक_ा किया गया। यह करीब 332 मीट्रिक टन है। गोदाम में रखे इसी कचरे को नष्ट करने अब तक कवायद हो रही है। परिसर के बाहर जमीन में मिले कचरे पर अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया।

इनका कहना है...
यूनियन कार्बाइड के आसपास खुले में कचरा फैला हुआ है। यह मिट्टी में दब गया है। प्रदूषण की यह मुख्य जड़ हैं। इसी के कारण जहरीले रसायन पानी में मिल रहे हैं। इसे हटाए जाने की जरूरत ज्यादा है। मगर इस दिशा में अब तक कोई काम नहीं किया गया है।
- पुणेन्दू शुक्ला, सदस्य मॉनिटरिंग कमेटी

यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के कारण भूजल लगातार दूषित हो रहा है। इसकी विस्तृत जांच की जरूरत है। हाल में 20 जगह के भूजल के नमूने लेकर जांच कराई गई। इसमें करीब 12 से 15 बस्तियों के पानी में प्रदूषण का पता लगा है। यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप रहे हैं।
- रचना ढींगरा, संयोजक भोपाल ग्रुप ऑफ इन्फारमेंशन एवं एक्शन

यूनियन कार्बाइड के पॉन्ड में जहरीला पानी जमा होता था। इसके जहरीले रसायन मिट्टी में मिल रहे हैं। प्रदूषण की यह मुख्य वजह है। इस कचरे को हटाने के लिए सबसे पहले कोई एक्शन प्लान बनाने की जरूरत है। जिस 332 मीट्रिक टन कचरे को नष्ट करने बात हो रही है वह गोदाम मे रखा है।
- अब्दुल जब्बार, संयोजन भोपाल गैस पीडि़त महिला उद्योग संगठन

यह भी पढ़े :
अपने विवाह के सपने को सपने भारत मैट्रीमोनी से साकार करे।- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन करे!
Patrika.com

लेटेस्ट ख़बरें ई-मेल पर पाने के लिए सब्सक्राइब करें

Dus ka Dum
Ad Block is Banned Click here to refresh the page

???? ??????? ?? ??? ???? ????? ???