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GMC में बनेगा सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल, स्टार्टअप पॉलिसी को मंजूरी

Updated: IST shivraj singh chouhan
शुक्रवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में दैवेभो के प्रस्ताव को फिलहाल होल्ड पर रख लिया गया। अब ये प्रस्ताव 4 अक्टूबर को होने वाली बैठक में रखा जाएगा।

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने दैनिक वेतनभोगियों (दैवेभो) के नियमितीकरण, वेतनवृद्धि का मामला फिलहाल अटक गया है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में दैवेभो के प्रस्ताव को फिलहाल होल्ड पर रख लिया गया। अब ये प्रस्ताव 4 अक्टूबर को होने वाली बैठक में रखा जाएगा।

कैबिनेट में भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज को सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल बनाने के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया। ये अस्पताल पूरी तरह सुविधायुक्त होगा और इसमें करीब 2000 बिस्तर होंगे। इस प्रस्ताव को चिकित्सा शिक्षा विभाग ने पेश किया था, जिसे अब जाकर मंजूरी मिली। इसके अलावा कैबिनेट में नवकरणीय ऊर्जा के तहत उत्पादित बिजली की निकासी के लिए ग्रीन कॉरीडोर परियोजना के प्रथम चरण का भी मसौदा मंजूर हो गया।

स्टार्टअप पॉलिसी को मंजूरी
- कैबिनेट में स्टार्टअप पॉलिसी को भी मंजूरी मिल गई। मप्र 11वां राज्य बना है, जिसकी अपनी स्टार्ट अप पॉलिसी है।
- इस नीति में राज्य सरकार स्टार्टअप लाने वालों को पूरी तरह मदद करेगी। उन्हें उद्योग नीति 2014 की तमाम सुविधाएं मिलेंगी।
- इसमें वैट, प्रवेश कर के साथ विद्युत शुल्क में रियायत शामिल है।
- साथ ही इन्क्यूबेशन सेंटर (यहां स्टार्टअप विकसित होते हैं), मेंटर यानी मददगार और पैसा लगाने वालों को भी सरकार राहत देगी।
- उद्योगों के लिए जो वेंचर फंड बनाया गया है, उससे भी स्टार्टअप को मदद दी जाएगी।
- मप्र से पहले राजस्थान, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, गुजरात, ओडिशा, बिहार और छत्तीसगढ़ की स्टार्टअप पॉलिसी आ गई है।
- स्टार्टअप नीति में हर निवेशक को पहले पांच साल तक ही स्टार्टअप की सुविधा मिलेगी।
- इसमें यह भी ध्यान रखा जाएगा कि उनका बिजनेस 25 करोड़ रुपए से अधिक न हो।

दैवेभो को होगा ये फायदा
दैनिक वेतन भोगियों के नियमितीकरण का प्रस्ताव यदि मंजूर हुआ तो दैवेभो को वेतनवृद्धि, 125 फीसदी महंगाई भत्ता, एक लाख रुपए की जगह 2 लाख रुपए ग्रेज्युटी मिलेगी। साथ ही उनका वेतन 3 से 5 हजार रुपए तक बढ़ जाएगा। जिलों में चतुर्थ श्रेणी के पद खाली होते ही उन्हें पदस्थापना मिलेगी।

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