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कैशलेस का MP पर नेगेटिव असर, 35 % तक बाज़ार से कम हुई नकदी

Updated: IST Bhopal
केंद्र सरकार की कैशलेस स्कीम तीन माह बाद फिर कैश-कैश होती दिखाई दे रही है। बाजार में नकदी का चलन फिर बढऩे लगा है।

भोपालकेंद्र सरकार की कैशलेस स्कीम तीन माह बाद फिर कैश-कैश होती दिखाई दे रही है। बाजार में नकदी का चलन फिर बढऩे लगा है। कुछेक सेक्टरों को छोड़ दें तो पेट्रोल पम्प, ग्रासरी, वैवाहिक समारोहों में की जाने वाली खरीदी, कैटरिंग, बिल्डिंग मटेरियल, रेस्टॉरेंट, इलेक्ट्रानिक आयटम सहित विलासिता की वस्तुओं का नकदी में ही लेन-देन हो रहा है।

पेटीएम, स्टेट बैंक की बडी एवं मोबाइल से पेमेंट, कार्ड पेमेंट का उपयोग बाजारों में कम हो रहा है। एक अनुमान के मुताबिक राजधानी में कैशलेस की व्यवस्था में 30 से 35 प्रतिशत की कमी आई है। मार्केट एक्सपर्ट का मानना है कि अभी लोग पूरी तरह से कैशलेस सिस्टम में ढल नहीं पाए हैं, ऊपर से 2000 रुपए के चलन से भी भुगतान के लिए नकदी का प्रयोग ही उन्हें आसान लग रहा है।

EXPERT: चेक लेने से इंकार

चेक से लेन-देन काफी बढ़ा था, लेकिन यह व्यवस्था कमजोर हो रही है। जानकारों का कहना है कि चेक बाउंस होने के भय से कारोबारी चेक लेने से इनकार कर देते हैं। ग्राहकों के सामने नकदी से पेमेंट देने का ही उपाय बचता है। हालांकि नियमानुसार कोई भी व्यक्ति चेक लेने से इनकार नहीं कर सकता। व्यापारियों का कहना है कि पहले से ही चेक डिस्ऑनर के प्रकरण न्यायालय में चल रहे हैं। चेक वाउंस होने पर कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाना कष्टकारक होता है। सरकार ने कैपिटल गुड्स की श्रेणी में आने वाली वस्तुओं में भी कैश लिमिट 20 हजार से घटाकर 10 हजार रुपए कर दी है। टैक्स एक्सपर्ट बताते हैं कि इससे नकदी की जगह चेक या अन्य माध्यमों से पेमेंट सिस्टम बढ़ सकता है। जागरूकता के अभाव में नकदी का चलन बढऩे लगा है। लोगों को चाहिए कि वे इलेक्ट्रानिक मोड का उपयोग करके भुगतान करें।

राजेश जैन, सीए

कैशलेस पर क्या कहते हैं व्यापारी

ओवरऑल कैश पेमेंट मार्केट में दोबारा होने लगा है। नकदी की सेल बढऩे लगी है। हालांकि कार्ड से भी पेमेंट हो रहा है लेकिन चेक से भुगतान कम हो रहा है। जहां तक बिजनेस की बात है तो कारोबार पिछले तीन माह में 25 फीसदी तक डाउन हो गया है।

श्याम बंसल, इलेक्ट्रानिक्स कारोबारी

फर्क तो पड़ा है। लेकिन सभी लोगों के पास कार्ड नहीं है। इसलिए नकदी से भी भुगतान हो रहे हैं। चेक से भुगतान कम ही हो रहा है।

गिरधर बिंदल, सचिव, श्री सराफा एसोसिएशन

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इलेक्ट्रानिक भुगतान के लिए लोग पूरी तरह से डायवर्ट नहीं हुए हैं। इसमें समय लगेगा। धीरे-धीरे उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ रही है। मार्केट में नकदी भी ज्यादा हो गई है।

देवेन्द्र पाल शर्मा, जोनल मैनेजर

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बैंकों में लंबी-लंबी लाइनें लगी

- दर्जनों लोगों की बैंक लाइन में मौत

-दो नंबर में सोने की खूब बिक्री हुई

-कई बैंक अधिकारी सस्पेंड हुए

-व्यापार में गिरावट आई

-सोने का भाव 55 हजार तक गया

-बड़े कॉन्टे्रक्टर को लेवर पेमेंट में दिक्कत

-सभी तरह के बाजारों में व्यवसाय कमजोर

-चेक से पेमेंट लेने से इनकार

-वेतन नहीं मिलने से मजदूरों का पलायन

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