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मोदी सरकार ने MP से मांगे 'किराए' के 300 करोड़, जाने क्या है बात

Updated: IST Center asks for 300 crores instead of security, PH
मोदी सरकार के एक फरमान से मध्यप्रदेश सरकार का पुलिस विभाग हैरान है। प्रदेश की सीमा को नक्सलियों से बचाने के लिए जो केंद्रीय पुलिस बल तैनात किया गया था केंद्र सरकार ने अब इसी बल का किराया मांग लिया है।

ब्रजेश चौकसे. भोपाल.
मोदी सरकार के एक फरमान से मध्यप्रदेश सरकार का पुलिस विभाग हैरान है। प्रदेश की सीमा को नक्सलियों से बचाने के लिए जो केंद्रीय पुलिस बल तैनात किया गया था केंद्र सरकार ने अब इसी बल का किराया मांग लिया है। केंद्र ने इसके लिए 300 करोड़ रुपए मांग लिए है।

नक्सलियों से सुरक्षा के बदले मध्यप्रदेश पुलिस से 300 करोड़ रुपए की मांग की गई है। यह राशि कोई ओर नहीं, बल्कि केंद्र सरकार मांग रही है। पुलिस मुख्यालय से लेकर गृहमंत्री और मुख्यमंत्री तक केंद्र से इसकी माफी का आग्रह कर चुके हैं, लेकिन वह सुनने को राजी नहीं है। इस कारण अब प्रदेश पुलिस ने यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के सामने उठाकर उनसे हस्तक्षेप का आग्रह किया है।

सूत्रों ने बताया कि नक्सल प्रभावित बालाघाट सहित अन्य क्षेत्रों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 123वीं बटालियन की सात कंपनियां तैनात हैं। साथ ही कोबरा कमांडो भी तैनात है। जिन पर अब तक 298.77 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हो चुके है। केंद्रीय गृह मंत्रालय मध्यप्रदेश पुलिस से इस राशि की मांग कर रहा है। इसके लिए प्रदेश सरकार और पुलिस पर दबाव बनाया जा रहा है।

राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय यह रकम देने को राजी नहीं है। इस कारण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्र लिखकर और मौखिक रूप से केंद्रीय गृहमंत्री से इसे माफ करने का आग्रह किया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। केंद्र द्वारा लगातार पुलिस के बजट से भुगतान का दबाव बनाने पर डीजीपी ऋषि कुमार शुक्ला ने केंद्र सरकार के वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार विजय कुमार से मदद का आग्रह किया। डीजीपी का कहना है कि इतनी रकम देने से पुलिस विभाग का बजट गड़बड़ा जाएगा। नक्सल प्रभावित दूसरे राज्य भी नहीं दे रहे हैं, फिर हम पर क्यों इतना दबाव डाला जा रहा है।

कुमार ने एक बार फिर सीएम से पत्र लिखवाकर भेजने को कहा। पुलिस का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार भी केंद्र को सीआरपीएफ के बदले यह रकम नहीं दे रही है। उस पर 3000 करोड़ से अधिक बकाया है। यूपीए के बाद अब नरेंद्र मोदी सरकार भी छग से यह रकम मांग रही है, लेकिन वह नहीं दे रहे हैं। कुछ अन्य नक्सल प्रभावित राज्य भी भुगतान नहीं कर रहे हैं। छग ने साफ कह दिया कि इसका भुगतान करने पर उनके राज्य का करीब आधा बजट चला जाएगा।
माफी में आड़े आ रहा नियम
दरअसल नियमानुसार केंद्रीय रिजर्व बल उपलब्ध कराने पर राज्य सरकार को उसका भुगतान केंद्र को करना होता है। यदि यह रकम माफ की गई तो उसके लिए नियम में परिवर्तन करना होगा, जिसके लिए केंद्र राजी नहीं है। अभी नियमानुसार विशेष दर्जे वाले नार्थ-ईस्ट राज्यों, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश आदि को खर्च का कुल दस प्रतिशत भुगतान करना होता है। जबकि अन्य राज्यों को पूरी रकम देना पड़ती है। ज्ञात रहे कि नक्सल प्रभातिव नौ राज्यों में सीआरपीएफ की 90 से अधिक बटालियन तैनात हैं।

यह हैं सक्रिय
प्रदेश में मुख्य रूप से बालाघाट में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) के मलाजखंड दलम एवं टांडा दलम सक्रिय है। यहां से पुलिस ने वर्ष 2015 में पांच सक्रिय नक्सली गिरफ्तार हुए थे। इनमें 27 लाख का ईनामी नक्सली दिलीप उर्फ गुहा शामिल था। नक्सलियों ने विस्फोटक पदार्थ, बैटरी, डेटोनेटर, जिलेटिन, इलेक्टिंक वायर आदि जप्त किए गए थे। इससे पहले वर्ष 2014 में 14 नक्सली गिरफ्तार हुए थे और दो ने सरेंडर किया था। पिछले साल नक्सली गतिविधियों में इजाफा हुआ है। लेकिन केंद्र सरकार प्रदेश को नक्सल प्रभावित राज्यों की श्रेणी से बाहर करने जा रही है।

नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ राज्य भी रकम नहीं दे रहा तो हम क्यों दें। तीन सौ करोड़ देने से हमारा पूरा बजट और आगे की प्लानिंग गड़बड़ा जाएगी। हालांकि वे कई बार केंद्र से मिलने वाली रकम में से राशि काट लेते हैं। इसलिए हम चाहते हैं कि यह राशि माफ हो जाए।
-पवन जैन, एडीजी प्लानिंग

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