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नोटबंदी के बाद पहली बार मिलेगी सैलरी, यह है नए नियम

Updated: IST Note ban new rules of withdrawl
यदि आपका वेतन सीधे बैंक में जमा होता है तो आप एक बार में पूरी सैलरी नहीं निकाल सकते हैं। यदि 24 हजार से कम वेतन है तो आप पूरी सेलरी निकाल सकते हैं।

भोपाल। नोटबंदी के बाद पहला सैलरी डे आ गया है। सरकारी से लेकर ज्यादातर प्राइवेट नौकरी वालों को 30 से 7 तारीख के बीच वेतन मिलता है। सिर्फ केंद्र सरकार के ही 50 लाख कर्मचारियों और 58 लाख पेंशनर्स को इन्हीं दिनों में पैसा मिलता है। इधर, जनधन खाते से पैसा निकालने की भी लिमिट आरबीआई ने तय कर दी है।

इस माह के वेतन से पहले जानिए ये जरूरी बातें...।
-यदि वेतन सीधे बैंक में जमा होता है तो आप एक बार में पूरी सैलरी नहीं निकाल सकते हैं। यदि 24 हजार से कम वेतन है तो आप पूरी सेलरी निकाल सकते हैं। यदि इससे अधिक है तो हर सप्ताह में 24-24 हजार की किस्तों में पैसा निकाला जा सकता है।
- बैंकों को कहा गया है कि वे कर्मचारियों को वेतन बांटने के लिए स्पेशल कैम्प लगाएं और एकाउंट खुलवाएं।
- कई बैंकों ने एटीएम में काफी कैश का इंतजाम कर रखा है। कुछ बैंक समय से पहले खुलेंगी। सीनियर सिटीजन्स के लिए पेंशन बांटने के लिए अतिरिक्त काउंटर बनाए हैं।

जनधन खाते की लिमिट तय
आरबीआई ने जनधन अकाउंट की लिमिट तय कर दी है। नए नियमों के अनुसार प्रधानमंत्री जनधन अकाउंट से एक माह में दस हजार रुपए ही निकाले जा सकेंगे। मध्यप्रदेश में 2 करोड़ 22 लाख से अधिक जनधन खाते हैं।

1. देश में 25 करोड़ जनधन अकाउंट खुल चुके हैं। इस अकाउंट में 50 हजार रुपए जमा करने की लिमिट है। हालांकि आरबीआई का कहना है कि पैसा निकालने की लिमिट टेंपरेरी है।
2. अकाउंट होल्डर के लिए एक माह में पैसा निकालने की लिमिट 5000 रुपए है, यदि उसने 9 नवंबर के बाद 500 और 1000 रुपए के नोट जमा किए हैं।
3. यदि किसी खाताधारक ने 9 नवंबर के पहले जनधन अकाउंट में रुपए जमा किए थे, तो वह एक माह में 10 हजार रुपए निकाल सकता है।
4. प्रधानमंत्री जनधन योजना 28 अगस्त 2014 को शुरू की गई थी। इस योजना में 25.58 करोड़ अकाउंट खोले जा चुके हैं।

ज्यादा पैसों की जरूरत है तो क्या करें
- RBI के मुताबिक KYC वाले अकाउंट होल्डर ब्रांच मैनेजर से बात कर सकते हैं और 10,000 की तय लिमिट से ज्यादा पैसा निकाल सकते हैं।
- इस बात की भी आशंका रीह है कि जनधन अकाउंट का इस्तेमाल ब्लैकमनी खपाने में किया गया है।
- यह खाते पिछड़े और गरीब तबके के लोगों के लिए थे।
-नोटबंदी एक पखवाड़े में ही जनधन खातों में 28 हजार करोड़ रुपए जमा किए गए।

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