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अपने ही कर रहे भाजपा की फजीहत

Updated: IST bhopal
गौर व पटेल भी नहीं करते पार्टी लाइन की फिक्र...

भोपाल. नेताओं का बड़बोलापन प्रदेश भाजपा संगठन के लिए सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है। आलम ये है कि खुद की लकीर खींचने वाले ये नेता सीएम शिवराज सिंह चौहान और प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान की हिदायतों को भी गंभीरता से नहीं लेते। मंत्री गौरीशंकर बिसेन इसमें लिस्ट में सबसे ऊपर हैं, वे पिछले 15 दिनों से विवादों में बने हुए हैं। किसान आंदोलन के बीच पूर्व गृहमंत्री बाबूलाल गौर का बयान और पूर्व मंत्री कमल पटेल रेत उत्खनन को लेकर पार्टी की नाक में दम किए हुए हैं। उधर, दिग्विजय सिंह को लेकर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा की बयानबाजी से चौहान ने किनारा कर लिया है।

बिसेन का नया विवाद

किसान आंदोलन को जैसे-तैसे मैनेज करने की मुहिम को बिसेन ने ये कहकर ठोकर मार दी कि किसानों के नेता शिवकुमार शर्मा कक्काजी असामाजिक तत्व हैं। प्रदेश संगठन इस मामले में सफाई तक नहीं दे पा रहा है। बिसेन को इससे पहले चुप रहने की नसीहत सीएम हाउस में आयोजित विधायक दल की बैठक में खुद सीएम ने दी थी, लेकिन वे इसके बाद भी नहीं बदले।


सीट छोडऩे को तैयार नहीं हैं बाबूलाल गौर

गोविंदपुरा विधानसभा से नए चेहरे को मौका दिए जाने का बाबूलाल गौर ने विरोध किया है। पार्टी लाइन से इतर गौर अगला चुनाव लडऩे के लिए तैयार हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से बयान देकर प्रदेश संगठन को इससे अवगत करा दिया है। गौर किसान आंदोलन पर बोलकर अपनी ही सरकार की मुश्किलें भी बढ़ा चुके हैं।

पार्टी लाइन से अलग चलने की बात गलत है। वैचारिक रूप से मुद्दों पर असहमति हो सकती है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि सार्वजनिक बोला जाए। अनुशासन सभी के लिए अनिवार्य है।

नंदकुमार ङ्क्षसह चौहान, प्रदेशाध्यक्ष

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