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बढऩे जा रहा है बाघों का घर, भोपाल के जंगलों में मिलेगा बड़ा ठिकाना

Updated: IST tiger attack human
राजधानी के करीब बाघओं ने अपना कुनबा आबाद किया है। जंगल में शिकार कम हैं और जवां हुए बाघों में ठिकाने को लेकर जोर-आजमाइश है।

भोपाल. राजधानी के करीब बाघओं ने अपना कुनबा आबाद किया है। जंगल में शिकार कम हैं और जवां हुए बाघों में ठिकाने को लेकर जोर-आजमाइश है। इसी कारण यदा-कदा शहर की सरहद के अंदर भी बाघ पहुंच रहे हैं। बहरहाल, बाघों की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने राजधानी के करीब के जंगलों को लोक संरक्षित क्षेत्र घोषित करने की फाइल को आगे बढ़ाने का फैसला कर लिया है। अब कुछ हेक्टेयर से लेकर 05 वर्ग किमी तक के टुकड़ों में प्रस्तावित संरक्षित क्षेत्रों में वाइल्ड लाइफ के विकास के लिए योजनागत कार्य किए जाएंगे। तय किया गया है कि जंगल के अंदर ही बाघों के लिए भोजन उपलब्ध कराने से लेकर शाकाहारी वन्य प्राणियों की संख्या बढ़ाई जाएगी। साथ ही बाघों और वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए तकनीक विकसित करने के साथ ही जंगली इलाकों में रहने वालों की समितियां बनाकर उन्हें वन्य प्राणियों की सुरक्षा से जोड़ा जाएगा। जल्द ही संशोधित प्रस्ताव वन्य प्राणि विभाग के पास भेजा जाएगा।

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दरअसल बाघों की उपस्थिति वाले जंगलों को टाइगर रिजर्व अथवा पार्क आदि घोषित किए जाने में लगने वाले समय एवं बाधाओं को देखते हुए वाइल्ड लाइफ एक्ट में वर्ष 2002 में संशोधन किया है। इसके तहत जंगल को छोटे-छोटे टुकड़ों में संरक्षित कर लोक संरिक्षत क्षेत्र बनाए जाने का प्रावधान रखा गया।

रातापानी की बाधा को देख वन विभाग ने निकाला रास्ता

उच्चतम न्यायालय द्वारा रातापानी सेंचुरी को टाइगर रिजर्व घोषित किए जाने के आदेश के बावजूद पिछले पांच साल से प्रदेश सरकार द्वारा इसका नोटीफिकेशन जारी नहीं किए जाने के बाद वन विभाग ने यह रास्ता निकाला है। विभाग ने यहां के जंगलों को लोक संरक्षित क्षेत्र घोषित कर कड़ाई किए जाने की योजना तैयार की है।

25 साल में तीन गुना बढ़ा भोपाल का जंगल

प्रदेश में भले ही जंगल घटे हों, लेकिन भोपाल जिले में पिछले 25 सालों में जंगल तीन गुना बढ़ा है। यही कारण है कि यहां तेजी से बाघ भी बढ़ रहे हैं और अपनी टेराटरी बनाने के लिए प्रयासरत हैं। एफएसएआई के आंकड़ों के अनुसार 1990 में जिले में 47 वर्ग किमी जंगल था जो कि वर्ष 2015 में बढ़कर 123 वर्ग किमी हो गया।

वाइल्ड लाइफ एक्ट में 2002 में संशोधन कर जंगलों को लोक संरक्षित क्षेत्र घोषित किए जाने का प्रावधान किया गया था। इसी के तहत राजधानी के जंगलों को लोक संरक्षित घोषित कराने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है ताकि यहां जंगलों के बेहतर विकास के साथ ही वन्य प्राणियों की सुरक्षा बढ़ाई जा सके।

एसपी तिवारी, कंजर्वेटर फारेस्ट भोपाल वृत्त

&वन विभाग यदि इस तरह का प्रस्ताव लाता है तो उसे अनुमति देने में हमे कोई आपत्ति नहीं है। हमारा उद्देश्य बाघों, जंगलों एवं वन्य प्राणियों की रक्षा करना है।

जितेंद्र अग्रवाल, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ

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