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ये है आरती और कीर्तन के दौरान बजाई जाने वाली तालियों के पीछे का रहस्य

Updated: IST clapping
वैसे तो ताली बजाने को आस्था और भक्ति से जोड़ा जाता है लेकिन क्या आपको बता है कि मंदिरों में भगवान की आरती के समय, भजन संध्या के दौरान, कीर्तन के समय ये तालियां क्यों बजाई जाती हैं?

भोपाल। जब भी हम किसी मंदिर या फिर अपने घर में पूजा अर्चना करते हैं तो तालियां जरूर बजाते हैं। यह परंपरा प्राचीनकाल से चली आ रही है। वैसे तो ताली बजाने को आस्था और भक्ति से जोड़ा जाता है लेकिन क्या आपको बता है कि मंदिरों में भगवान की आरती के समय, भजन संध्या के दौरान, कीर्तन के समय ये तालियां क्यों बजाई जाती हैं? आईये पं. जगदीश शर्मा से जानते हैं ताली बजाने के पीछे का रहस्य...

तालियां बजाने से ध्यान लगाने में होते है मदद
हिंदू धर्म में आरती और भजन के दौरान ताली बजाने की आवाज़ को शुभ माना जाता है। इसके साथ ही सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार आरती के दौरान उसके साथ संयोजित करके ताली बजाने को भगवान में ध्यान लगाने का सही तरीका बताया गया है।

बढ़ती है सकारात्मकता
ध्यान लगाने के साथ-साथ आरती के दौरान तलाने बजाने के और भी फायदे हैं। इसका एक और सबसे बड़ा फायदा ये है कि खुशी के मौकों पर बजाए जाने वाली तालियों की आवाज़ हमारे कानों को अच्छी लगती है जिससे कि हमारे आसपास के वातावरण में सकारात्मकता बढ़ती है।

आस्ता के साथ होता है व्यायाम
ताली बजाना हमारे शरीर के लिए भी बहुत ही अच्छा माना जाता है। इसलिए ताली बजाकर हम भगवान की भक्ति करने के साथ-साथ व्यायाम भी कर लेते हैं।

मांसपेशियां के लिए भी है फायदेमंद
ताली बजाना भावनात्मक रूप के साथ-साथ शारीरिक रूप से भी बहुत ही फायदेमंद है। हम जब भी ताली बजाते हैं तो हमारे शरीर में उत्तेजना पैदा होती है जिससे हमारे पूरे शरीर में एक खिंचाव उत्पन्न होने लगता है और इससे हमारी मांसपेशियां सक्रिय हो जाती हैं।

रक्त संचार पर भी होता है असर
ताली बजाना एक्यूप्रेशर पद्धति में बहुत लाभकारी माना जाता है। इसकी वजह है एक्यूप्रेशर बिंदुओं पर दबाव पड़ना। जब हम ताली बजाते हैं तो हमारे शरीर के विभिन्न एक्यूप्रेशर बिंदुओं पर दबाव है जिससे हमारे शरीर के सभी अंगों तक रक्त संचार बढ़ जाता है।

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