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RTI से खुली IIT की पोल, पढ़ाने वालों की 35 फीसदी पोस्ट खाली

Updated: IST class room
सीट्स लिमिटिड हैं और उम्मीदवार कई सारे, लेकिन यही बात आईआईटी प्रोफेसर्स के ऊपर बिल्कुल उलट साबित होती है। देशभर के 23 आईआईटी में शिक्षकों के औसतन 35 स्वीकृत पद खाली हैं।

भोपाल/नई दिल्ली। देश में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए सर्वश्रेष्ठ संस्थान के तौर पर पहचान रखने वाले इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में दाखिले के हर साल लाखों स्टूडेन्ट्स कोशिश करते हैं, लेकिन उनमें से कुछ प्रतिशत को ही यहां एडमिशन मिल पाता है।

सीट्स लिमिटिड हैं और उम्मीदवार कई सारे, लेकिन यही बात आईआईटी प्रोफेसर्स के ऊपर बिल्कुल उलट साबित होती है। देशभर के 23 आईआईटी में शिक्षकों के औसतन 35 स्वीकृत पद खाली हैं। ये बात नीमच के एक आरटीआई कार्यकर्ता को मिल जानकारी के बाद सामने आई है।

देश में शिक्षा व्यवस्था के हाल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जैसे संस्थान भी शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। देशभर के 23 आईआईटी में शिक्षकों के औसतन 35 फीसदी स्वीकृत पद खाली है।

नीमच के RTI एक्टिविस्ट ने मांगी थी जानकारी
मध्य प्रदेश के नीमच निवासी सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने आरटीआई से यह खुलासा किया है। आरटीआई के जवाब में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 1 अक्टूबर 2016 तक की स्थिति के मुताबिक यह जानकारी दी है। आठ पुराने आईआईटी में शिक्षकों के 37 फीसदी पद कम हैं।

82,603 विद्यार्थी, शिक्षक सिर्फ 5,072
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि देश के 23 आईआईटी में कुल 82,603 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। जबकि इनमें काम कर रहे शिक्षकों की संख्या सिर्फ 5,072 है। इन संस्थानों में अध्यापकों के कुल 7,744 पद स्वीकृत हैं यानी 2,672 पद खाली रहने के कारण इनमें 35 प्रतिशत शिक्षकों की कमी है।

16 छात्रों पर एक शिक्षक
आरटीआई के तहत दिए गए जवाब में यह भी बताया गया कि देश के सभी आईआईटी में शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात 1:10 रखने यानी हर 10 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक नियुक्त करने की कोशिश होती है। लेकिन फिलहाल सभी 23 शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थानों में औसतन हर 16 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक मौजूद है।

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