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पेंच को छोड़ बाकी नेशनल पार्कों में बढ़ गई बाघों की संख्या

Updated: IST tiger
पेंच नेशनल पार्क को यदि छोड़ दिया जाए तो शेष चार में बाघों की संख्या बढ़ी है।

भोपाल. प्रदेश के पांच नेशनल पार्कों में की गई बाघों की गणना के आंकड़े बता रहे हैं कि लगभग डेढ़ दर्जन बाघों की मौत के बाावजूद प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़ रही है। पेंच नेशनल पार्क को यदि छोड़ दिया जाए तो शेष चार में इनकी संख्या बढ़ी है। बुधवार को प्रशासन अकादमी में आयोजित जैवविविधता की उपयोगिता और संरक्षण के विषय पर जागरूकता कार्यशाला में यह जानकारी वनमंत्री शेजवार ने दी।

इस दौरान उन्होंने स्टेटस रिपोर्ट टाईगर्स कोप्रेडिटेटर्स एण्ड प्रे 2016 पुस्तक का विमोचन किया। जिसमें इन पांच नेशनल पार्क में बाघों की गणना की जानकारी प्रदान की गई। इसमें बताया गया कि पेच नेशनल पार्क में बाघों की संख्या घटी है जबकि शेष में बाघों की संख्या बढ़ी है। पिछले साल की तुलना में बाघों की संख्या इस वर्ष 231 से बढ़कर 251 हो गई है। इस दौरान जैव विविधिता की जागरूकता के संबंध में मंत्री ने कहा कि ग्राम स्तर तक जागरूकता के साथ ही सुदृढ़ता देने की आवश्यकता है। वन समिति की तरह ग्राम.स्तर पर जैव.विविधता समिति बनाए जाने की आवश्यकता उन्होंने बतायी।

कार्यशाला में उपस्थित अपर मुख्य सचिव वन दीपक खाण्डेकर ने कार्यशाला में हुए विचार.विमर्श के बाद निष्कर्ष और क्रियान्वयन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जैवविविधता के क्षेत्र में सक्रिय जन.भागीदारी से सफलता मिलेगी। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन (बल प्रमुख ) डॉ. अनिमेष शुक्ला ने बताया कि कार्यशाला में जैव.विविधता पर विशेषज्ञों और प्रतिभागियों ने सुझाव दिये हैं। इन सुझावों से जैव.विविधता क्षेत्र में सफल क्रियान्वयन हो सकेगा। राज्य जैव.विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव आर श्रीनिवासमूर्ति ने वन मंत्री को स्मृति.चिन्ह भेंट किया। कार्यशाला में वन विभाग और जैव.विविधता बोर्ड के 80 अधिकारी एवं चेन्नई और शिमला से जैव.विविधता के विशेषज्ञ शामिल हुए।

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