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सवाल: पहली शताब्दी ट्रेन किस स्टेशन पर सबसे पहले पहुंची थी? पढ़ें ये रोचक FACT

Updated: IST shatabdi express
क्या आप जानते हैं ये ट्रेनें क्यों शुरू की गई, पहली राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस कहां से और कब शुरू हुई...जानें कुछ ऐसी ही रोचक बातें...

भोपाल। राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस जल्द ही ऑटोमैटिक लॉकिंग सिस्टम से काम करने लगेंगी। रेलवे ने सफर के दौरानयात्रियोंकी सुरक्षा बढ़ाने और आपराधिक गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से इन ट्रेनों में इस बदलाव का निर्णय लिया है। यात्रियों की सुविधाओं का ध्यान रखते हुए ही समय-समय पर इन ट्रेनों में कई बदलाव किए गए हैं। पर क्या आप जानते हैं ये ट्रेनें क्यों शुरू की गई, पहली राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस कहां से और कब शुरू हुई...भोपाल से शताब्दी एक्सप्रेस का नाता...जानें इतिहास की कुछ ऐसी ही रोचक बातें...

जल्द दिखेगा ये बदलाव
सफर के दौरान यात्रियों के साथ होने वाली आपराधिक घटनाओं को रोकने और अन्य तरीकों से यात्रिओं की सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से रेलवे ने राजधानी और शताब्दी में मेट्रो की तर्ज पर ऑटोमेटिक ऑपन एंड क्लॉज सिस्टम वाले दरवाजे की व्यवस्था करने का निर्णय लिया है।

ऐसे रखा जाएगा नियंत्रण
इस नई प्रणाली को ट्रेन का गार्ड अपने केबिन में बैठकर नियंत्रित करेगा। इस सिस्टम के तहत ट्रेन जब स्टेशन पर पहुंचेगी, तब इसका दरवाजा अपने आप ही खुल जाएगा और ट्रेन के रवाना होने से पहले खुद ही बंद हो जाएगा।

पायलट परियोजना के तहत होगा काम
रेल मंत्रालय के मुताबिक एक पायलट परियोजना के तहत इस वर्ष अप्रैल तक ऐसी दो राजधानी और दो शताब्दी ट्रेनों का परिचालन शुरू हो जाएगा, जिनके दरवाजों में ऑटोमैटिक लॉकिंग सिस्टम लगा होगा।

ये हैं रोचक फैक्ट
* शताब्दी एक्सप्रेस 1988 में भारत के पहले प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य मे शुरू की गई थी।
* शताब्दी एक्सप्रेस तत्कालीन रेल मंत्री श्री माधवराव सिंधिया की सोच का नतीजा थीं।
* पहली शताब्दी एक्सप्रेस को नई दिल्ली से झांसी के बीच शुरू किया गया था, जिसे बाद मे बढा़कर भोपाल तक कर दिया गया।
* अब इस गाड़ी को भोपाल शताब्दी के नाम से जाना जाता है।
* शताब्दी को कुछ परिस्थितियों मे अन्य रेलगाडिय़ों की तुलना में प्राथमिकता दी जाती है और अधिकांश समय ये ट्रेन स्टेशन के श्रेष्ठ प्लेटफार्म या प्लेटफॉर्म नंबर एक पर आती है।

* शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन भारत की सबसे तेज चलने वाली रेलगाडी़ है और इसकी औसत गति से लगभग 130 किमी/घंटा है। * नई दिल्ली-भोपाल शताब्दी की गति नई दिल्ली और आगरा स्टेशनों के बीच लगभग 150 किमी/घंटा है, जो भारत में सबसे अधिक है।
* शताब्दी एक्सप्रेस का एक संस्करण है, जिसे स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस के नाम से जाना जाता है।
* यह गाडी़ भारतीय रेल की सबसे शानदार रेल मानी जाती है।
* भारतीय रेल ने बाद में शताब्दी एक्सप्रेस का एक बिना वातानुकूलन और कम किराए वाला संस्करण शुरू किया, जिसे जन शताब्दी के नाम से जाना जाता है।
* जब यह भारत में 1988 में शुरू की गई थी, उस समय इस ट्रेन को एक बडी़ उपलब्धि माना जाता था।
* इसको समाज के एक वर्ग के द्वारा भारी आलोचना का शिकार भी होना पड़ा।

* उनके मुताबिक भारत जैसे एक गरीब देश मे इन विलासिता पूर्ण गाडिय़ों की कोई आवश्यकता नहीं थी।
* शताब्दी दो स्टेशनों के बीच सबसे तेज गति से अपना सफर तय करती है और मार्ग में इसके स्टेशनों की संख्या भी बहुत कम होती है।
* ये पूरी तरह से वातानुकूलित और भारतीय रेल डिब्बों की तुलना में इनका स्तर बहुत अधिक होता है।

* शताब्दी एक्सप्रेस मे यात्रियों को नाश्ता/ भोजन, कॉफी/ चाय, फलों का रस आदि परोसा जाता है। साथ ही एक लीटर पानी की बोतल भी दी जाती है जो रेलवे के स्वामित्व वाली सहायक रेलवे रेल नीर प्रदान करती है।
* भारतीय रेल, शताब्दी एक्सप्रेस की 12 और जनशताब्दी एक्सप्रेस की 16 जोडिय़ों के साथ परिचालन करती है। शताब्दी एक्सप्रेस की 12 जोडिय़ों मे से 8 नई दिल्ली से शुरू होती हैं (2 भोपाल, लखनऊ के लिए, 2 अमृतसर के लिए, 2 कालका, अजमेर और देहरादून के लिए), चेन्नई से दो (बंगलोर और मैसूर के लिए) और एक कोलकाता से (रांची के लिए) और एक मुंबई (अहमदाबाद के लिए)।

1969 में भारत में दौड़ी थी पहली राजधानी एक्सप्रेस

* राजधानी एक्सप्रेस भारतीय रेल की एक पैसेंजर रेल सेवा है, जो भारत की राजधानी दिल्ली को देश के सभी राज्यों की राजधानी से जोड़ती है।
* सबसे पहले राजधानी एक्सप्रेस की शुरुआत 1969 में तेज चलने वाली ट्रेन सेवा के रूप में की गई थी।
* इसकी गति आम रेलों (70 किलोमीटर/प्रति घंटा) की तुलना में काफी अधिक (140 किलोमीटर /घंटा) रखी गई थी।
* इन रेलों को भारतीय रेल सेवा में उच्च वरीयता वाली श्रेणी में रखा गया है।

* ये ट्रेनें पूरी तरह वातानुकूलित होती हैं। इनमें सफर करने वाले यात्रियों को सोने के लिए बिस्तरों के साथ-साथ भोजन भी दिया जाता है, जिसकी लागत इस ट्रेन के यात्री किराये में शामिल होती है।
* इन सभी ट्रेनों में तीन श्रेणियाँ होती हैं - प्रथम श्रेणी वाता, जिसमें 2 से 4 बर्थ होते हैं और इन्हें अंदर से कमरे की तरह बंद किया जा सकता है, द्वितीय श्रेणी वाता, जिसमें दोनों तरफ दो-दो बर्थ होते हैं और थोड़ी निजता के लिए पर्दे लगे होते हैं, तृतीय श्रेणी वाता, जिसमें दोनों तरफ तीन-तीन बर्थ होते हैं और इनमे पर्दे नहीं लगे होते।
* वर्तमान में लगभग 15 जोड़ी राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन संचालित की जा रही हैं।
* इनमें नयी दिल्ली को अहमदाबाद, बंगलोर, भुवनेश्वर, बिलसपुर, चेन्नई, गुवाहाटी/डिब्रूगढ़, रांची, कोलकाता, जम्मू, मुंबई, पटना, सिकंदराबाद तथा त्रिवेंद्रम से जोड़ती है।

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