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एमपी में अनोखे पत्थर: बजाओ तो घंटी की आवाज और देखो तो नजर आते हैं लोहा 

Updated: IST magical stone in india
देश भर में करीब 11 तरह के आश्चर्यजनक पत्थर मिलते हैं, इनमें से दो तरह के पत्थर केवल मध्यप्रदेश में ही मिलते है।

भोपाल। दुनिया भर में कई प्रकार के आश्चर्यजनक पत्थर पाए जाते हैं। इनमें से ११ तरह के पत्थर तो केवल भारत में ही पाए जाते हैं। हो सकता है कि इस समय आप किसी प्रामार की मणि या नग के बारे में सोच रहे हो। लेकिन नहीं, दरअसल हम सच में इस समय पत्थरों के बारे में ही बात कर रहे हैं।

यहां हम आपको बता रहे हैं ऐसे पत्थरों के बारे मे जिनके बारे में सुनकर एक बार तो आप भी आश्चर्यचकित रह जाएंगे।
वैसे भी दुनियाभर में लाखों, करोड़ों तरह के पत्थर होते हैं। कुछ रंग-बिरंगे तो कुछ छोटे-बड़े। हालांकि पत्थरों के कई प्रकार होते हैं जैसे बालु पत्थर, चूना पत्थर, संगमरमर पत्थर, काला पत्थर, सफेद पत्थर, ग्रेनाइट, रत्न, आग्नेय शैल आदि।

फिर भी पत्थर तो पत्थर ही होते हैं, लेकिन क्या आप कुछ ऐसे पत्थरों के बारे में भी जानते हैं, जो महज पत्थर नहीं है। आइए हम आपको बताते हैं ऐसे ही चमत्कारिक पत्थरों के बारे में। लेकिन सबसे पहले हम उन पत्थरों की बात करते हैं जो मध्यप्रदेश में पाए जाते हैं, और इन्हें देखने या सुनने वाला व्यक्ति इनके सम्मोहन में बंधकर इन्हें सुनता या देखता ही रह जाता है।

>> सिंगिंग स्टोन : दुनियाभर में ऐसे कई पत्थर है जिनको ठोकने से उनमें से घंटी का स्वर उत्पन्न होता है। मध्यप्रदेश के देवास जिले के एक गांव उदरनगर के पास एक ऐसी पहाड़ी है जिसे देखकर यह लगता है कि मानो इतने सारे पत्थर किसी ने लाकर जाम दिये हों। कहते हैं यह कारनामा भीम ने किया था।

वहीं बिलासपुर के अम्बिकापुर के पास दरिमा हवाई अड्डे के पास भी कुछ ऐसे ही पत्थर मिलते हैं, जिन्हें ठिनठिन पत्थर कहते हैं। यह पत्थर मूलत: ज्वालमुखी से निकलने वाले लावा के आसपास के इलाकों में पाया जाता है। ठिनठिनी वह पत्थर हंै, जिन्हें आपस में टकराने पर संगीत के स्वर निकलते हैं। इसका असली नाम फोनोटिक स्टोन है। लेकिन इन पत्थरों को किसी दूसरे पत्थर से टकराने पर स्वरों की पुनरावृत्ति नहीं होती है।

>> कावडिय़ा पहाड़ : देखने में तो यह पत्थरों के पिल्लरों का ढेर है, लेकिन इसे पहाड़ कहना मजबूरी है। यह पिल्लर कहां से आए और इन्हें यहां किसने रखा यह अभी तक आश्चर्य का विषय है। इसी कारण कुछ लोग इसे वंडर ऑफ नेचर भी कहते हैं। स्थानीय लोग मानते हैं कि यहां ये पत्थर भीम ने लाकर रखे थे।

singing stone

इस जगह की खासियत यह है कि यहां ज़मीन से 50-60 फीट ऊंची पत्थरों की लंबी-लंबी चट्टानें हैं जो किसी बड़ी छड़ों का आभास देती हैं। ये लगभग एक जैसे शेप और साइज़ में हैं। ऐसा लगता है जैसे इन्हें किसी फैक्टरी में बनाकर यहां लगा दिया गया हो। इन्होंने एक छोटे पहाड़ का आकार ग्रहण कर लिया है। इसे ही कावडिय़ा पहाड़ कहते हैं।

ये चट्टानें या छड़ें दूर से लोहे की बनी दिखाई देती हैं लेकिन ये पत्थरों, मिट्टी और खनिजों से मिलकर बनी हैं। इन्हें किसी छोटे पत्थर या धातु से बजाने पर इनमें से लोहे की रॉड से निकलने वाली जैसी आवाज़ सुनाई देती है। मध्यप्रदेश के इंदौर जिले से 75 किलोमीटर दूर यह जगह देवास जिले के अंतर्गत आती है। देवास की बागली तहसील के उदयपुरा गांव पहुंचने के बाद यहां से करीब ६ किलोमीटर अंदर जंगल के हरे-भरे रास्ते से गुजरते हुए यहां पहुंचा जा सकता है।

ये हैं देश में पाए जाने वाले आश्चर्यजनक पत्थर:
1. रिकॉर्डर पत्थर:
यह ऐसे भी पत्थर होते हैं जो आपकी आवाज को रिकॉर्ड कर लेते हैं। एक बार ओशो ने जानकारी दी थी कि 1937 में तिब्बत और चीन के बीच बोकाना पर्वत की एक गुफा में 716 पत्थर के रिकॉर्डर मिले हैं। जी हां, पत्थर के! आकार में वे रिकॉर्ड हैं। महावीर से 10,000 साल पुराने यानी आज से कोई 13,500 हजार साल पुराने। ये रिकॉर्डर बड़े आश्चर्यजनक हैं, क्योंकि ये रिकॉर्डर ठीक वैसे ही हैं, जैसे ग्रामोफोन का रिकॉर्ड होता है। ठीक उसके बीच में एक छेद है और पत्थर पर ग्रूव्ज है, जैसे कि ग्रामोफोन के रिकॉर्ड पर होते हैं। अब तक यह राज नहीं खोला जा सका है कि वे किस यंत्र पर बजाए जाते रहे होंगे या बजाए जा सकेंगे।

2. पारस पत्थर:
इस पत्थर का जिक्र पौराणिक ग्रंथों और लोककथाओं में मिलता है। पारस के संबंध में हजारों किस्से-कहानियां समाज में प्रचलित हैं। कई लोग यह दावा भी करते हैं कि हमने पारस पत्थर देखा है। पारस पत्थर एक प्रकार का सफेद चमकता हुआ पत्थर होता है। इसी चमक के कारण इसे पारस मणि भी कहते हैं। इसके बारे में मान्यता है कि इसे लोहे की किसी भी वस्तु से छुआ देने से वह वस्तु सोने की बन जाती है। अब सवाल यह उठता है कि यह पत्थर मिलता कहां है? शास्त्रों की कहानियां बताती हैं कि हिमालय के जंगलों में बड़ी आसानी से पारस मणि मिल जाती है, बस कोई व्यक्ति उनकी पहचान करना जानता हो।

3. शालिग्राम :
भगवान विष्णु का प्रतीक यह पत्थर आजकल बहुत कम लोगों के घरों में मिलता है। शिवलिंग की तरह शालिग्राम भी बहुत दुर्लभ है। अधिकतर शालिग्राम नेपाल के मुक्तिनाथ, काली गण्डकी नदी के तट पर पाया जाता है। काले और भूरे शालिग्राम के अलावा सफेद, नीले और ज्योतियुक्त शालिग्राम का पाया जाना तो और भी दुर्लभ है। पूर्ण शालिग्राम में भगवाण विष्णु के चक्र की आकृति अंकित होती है। मान्यता है कि शालिग्राम को घर में रख कर नित्य उसकी चंदन लगाकर पूजा करने से सुख, शांति और समृद्धि बरकरार रहती है।

4. शिवलिंग :
शिवलिंग को भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। निराकार रूप में भगवान शिव को शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है। शिवलिंग की पूजा का विधान बहुत ही विस्तृत है इसे किसी पुजारी के माध्यम से ही सम्पन्न किया जाता है।

5. तैरने वाला पत्थर :
आपने तैरने वाला पत्थर देखा होगा। नहीं देखा तो सुना होगा। कहते हैं कि इसी पत्थर से रामसेतु बनाया गया था। रामसेतु का असली नाम नल-नील सेतु है। भारत के दक्षिणी भाग के अलावा श्रीलंका, जापान सहित अनेक स्थानों में ऐसे पत्थर मिलते हैं। ये सामान्यत: द्वीपों, समुद्र तट, ज्वालामुखी के नजदीकी क्षेत्रों पर काफी मात्रा में मिलते हैं।

6. आसमानी मदद पत्थर :
कहा जाता है यदि ये पत्थर आपके पास है तो आपको आसमानी मदद मिलेगी। माना जाता है कि नाविक और समुद्र में ही रहने वालों के लिए ये पत्थर बहुत काम आते हैं। ये पत्थर गोल और चिकने होते हैं। इसकी माला भी बनाई जा सकती है और इसको गृह-सज्जा के काम में भी इस्तेमाल किया जाता है। यह अंडाकार होता है। इसे गौर से देखने पर इसकी लकीरें हिलती-डुलती नजर आती हैं।

7. अजीबोगरीब पत्थर :
दक्षिण भारत के महाबलीपुरम में 1200 वर्ष पुराना एक पत्थर बहुत ही अजीबो-गरीब तरीके से रखा हुआ है। इसे देखकर लगता है कि यह जरा सा छूने भर से नीचे गिर पड़ेगा, लेकिन ऐसा नहीं है। इस पत्थर की चौड़ाई 5 मीटर तथा ऊंचाई 20 फीट है।
सन् 1908 में इस पत्थर पर उस समय के मद्रास गवर्नर आर्थर की नजर पड़ी तो उनको लगा कि यह पत्थर किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है इसलिए उन्होंने इस पत्थर को उसके स्थान से हटवाने के लिए 7 हाथियों से खिंचवाया पर यह पत्थर अपनी जगह से 1 इंच भी नहीं खिसका। ग्रेविटी के नियमों की उपेक्षा करते हुए यह पत्थर एक ढलान वाली पहाड़ी पर 45 डिग्री के कोण पर बिना लुढक़े टिका हुआ है। लोग इस पत्थर को 'कृष्ण की मक्खन गेंद' भी कहते हैं क्योंकि उनका मानना है कि यह पत्थर मक्खन की गेंद है जिसको कृष्ण ने अपनी बाल्य अवस्था में नीचे गिरा दिया था।

8. शनिदेव की प्रतिमा :
महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित शिंगणापुर का शनि मंदिर बहुत ही प्राचीन है। यहां शनिदेव के प्रतिक रूप में जो पत्थर विद्यमान है वह साक्षात शनिदेव ही हैं। इस चमत्कारिक पत्थर के दर्शन करने से सभी तरह के कष्ट दूर रहो जाते हैं। शिंगणापुर के इस चमत्कारी शनि मंदिर में स्थित शनिदेव की प्रतिमा लगभग 5 फीट 9 इंच ऊंची व लगभग 1फीट 6 इंच चौड़ी है।

9. टूटकर जुडऩे वाला शिवलिंग :
यह अनोखा मंदिर हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में स्थित है और इसे बिजली महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। कुल्लू शहर में ब्यास और पार्वती नदी के संगम स्थल के नजदीक एक पहाड़ पर शिव का यह प्राचीन मंदिर स्थित है। यहां हर 12 साल में एक बार शिवलिंग पर बिजली गिरती है। बिजली गिरने के बाद शिवलिंग चकनाचूर हो जाता है। मंदिर के पुजारी शिवलिंग के अंशों मक्खन में लपेट कर रख देते हैं। शिव के चमत्कार से वह फिर से ठोस बन बन जाता है। जैसे कुछ हुआ ही न हो।

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