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GAS TRAGEDY: 32 साल बाद जहरीला कचरा जलाने की एक और कोशिश, जानिए कैसे...

Updated: IST Bhopal gas tragedy toxic waste
पर्यावरण मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि धार जिले में रामकी इंसीनरेटर में पायलट बेसिस पर यूका का 10 टन कचरा जलाया गया था।

भोपाल। भोपाल गैस त्रासदी को हुए 32 साल से ज्यादा समय हो चुका है। यहां यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री की जमीन में आज भी 332 मीट्रिक टन जहरीला कचरा धंसा हुआ है। इस कचरे के निष्पादन के लिए केंद्र सरकार एक और प्रयास करने जा रही है। खबर है कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने इस पर खर्च होने वाली राशि का भुगतान करने के लिए सहमति दे दी है। अब केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय इस बात पर विचार कर रहा है कि कचरे को जलाने के लिए टेंडर केंद्र निकाले या मध्यप्रदेश सरकार? फैसला होते ही टेंडर निकाल दिए जाएंगे।

इंसीनरेटर ही एक मात्र विकल्प
पर्यावरण मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि धार जिले में रामकी इंसीनरेटर में पायलट बेसिस पर यूका का 10 टन कचरा जलाया गया था। इसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को भेजी गई थी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कचरा जलने से निकलने वाला प्रदूषण स्वीकृत सीमा के अंदर है। ऐसे में शेष कचरे को भी इन्सीनरेटर के माध्यम से जलाया जा सकता है। चूंकि कचरे को जलाने के लिए दूसरे राज्य सहमत नहीं होंगे, इसलिए इसे मध्यप्रदेश में ही कहीं जलाया जाएगा।

500 करोड़ आएगा खर्च
अधिकारी के मुताबिक, 10 टन कचरे को जलाने पर 15 करोड़ रुपए का खर्च आया था, ऐसे में हमारा अनुमान है कि 332 मीट्रिक टन कचरे के निपटारे पर करीब 500 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। अब चूंकि वित्त मंत्रालय से अनुमति मिल गई है, ऐसे में पैसे की समस्या नहीं होगी। अब इस बात पर फैसला होना बाकी है कि इस टेंडर को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय जारी करेगा या मध्य सरकार? जैसे ही यह फैसला हो जाएगा, टेंडर जारी कर दिया जाएगा। यह पूछे जाने पर कि टेंडर में अधिकतम कितना समय लगेगा? अधिकारी ने कहा कि अधिकतम एक महीने में टेंडर जारी कर दिया जाएगा।

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