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Video Icon यंगिस्तान में जज्बा जगाने मैनिट पहुंचे देश के जाने-माने स्पीकर, जानिए क्या कहा उन्होंने...

Updated: IST MANIT
भारत का सवर्णिम काल तो चन्द इतिहासकारों को छोड़कर किसी को पता नहीं, तभी तो आर्यभट्ट के काम का क्रेडिट न्यूटन को मिल जाता है, हम खुद को पिछड़ा समझते हैं।

भोपाल। ट्रैफिक सिग्नल पर 250 रुपए के चालान के एवज में 50 रुपए की रिश्वत दे देते हैं, फिर कहते हैं कि मेरे देश में भ्रष्टाचार बहुत है। दरअसल, बुरा व्यक्ति तभी बलवान होता है जब 100 मजबूत लोग शान्त होते हैं। इसलिए जब तक देश के युवा भ्रष्टाचार के खिलाफ चुप्पी नहीं तोड़ेंगे तब तक देश में बदलाव सम्भव नहीं है। समाज व युवा में यही बदलाव लाने की एक पहल की है मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (मैनिट) और 'पत्रिका ने। मैनिट की थिंक इंडिया सोसायटी की ओर से मंगलवार को इसी पहल के तहत 'अभ्युदय-2016 का आयोजन किया गया। इसमें तीन प्रमुख विषयों पर चर्चित हस्तियों ने अपने विचार रखें। चरित्र पर बात की उप-लोकायुक्त, मप्र जस्टिस यूसी माहेश्वरी ने। अतुल्य भारत पर प्रांत सह-संयोजक, प्रज्ञा प्रवाह, मध्य भारत दीपक शर्मा और शौर्य पर अपने विचार साझा किए डिफेंस एनालिस्ट, मेजर गौरव आर्य ने।

किसी भी समाज, देश या राष्ट्र को बदलने के लिए क्या चाहिए? सबसे पहले भाषा में परिवर्तन करो, सिविलाइजेशन बदलो और फिर तीज-त्योहार, संस्कृति बदल दो। आज यही सब हमारे देश में किया जा रहा है। हमें जितना इतिहास पढ़ाया जाता है वो तो महज 300 साल पुराना है। भारत का सवर्णिम काल तो चन्द इतिहासकारों को छोड़कर किसी को पता नहीं, तभी तो आर्यभट्ट के काम का क्रेडिट न्यूटन को मिल जाता है, हम खुद को पिछड़ा समझते हैं। एक बार गलती हो गई, दोबारा से वही गलती ना करे वो व्यक्ति ईमानदार है। दरअसल, हम तात्कालिक लाभ के लिए समझौता कर लेते हैं। भौतिक सुख की चाह ने ही हमें भ्रष्ट किया है। भ्रष्टाचार आन्तरिक व बाह्य दो तरह का होता है। बाह्य भ्रष्टाचार तो मिट जाएगा लेकिन अपने अन्दर जो भ्रष्टाचार है उसकी कोई दवा नहीं। आज 80 फीसदी लोग अवसर पडऩे पर रिश्वत देते हैं।

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इन पंक्तियों से की अपनी बात खत्म
रात इस तरह से गुजारो कि सुबह दुनिया को मुंह दिखाने के काबिल रहो।
दिन कुछ इस तरह से गुजारो कि रात को चैन से नींद आए।
जवानी कुछ इस तरह से गुजारो की बुढ़ापे में पछताना ना पड़े,
बुढ़ापा कुछ इस तरह से गुजारो कि किसी के आगे हाथ फैलाना ना पड़े।

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हम गलत दिशा में कर रहे एफर्ट
एक दौर था जब टॉप 10 में से 7 विश्वविद्यालय भारतवर्ष के ही होते थे आज टॉप 200 विश्वविद्यालयों में भी हमें जगह नहीं मिल पाती है। ईस्ट इन्डिया कम्पनी के भारत आगमन के बाद से ही हमारी हर चीज को खत्म किया गया। हमें हमारा पारम्परिक ज्ञान सिखाया नहीं सिर्फ वेस्टर्न नॉलेज दी जाती है। आज वेस्टर्न कल्चर को देखते हुए एजुकेशन व्यवसाय बन गई है और हमारी पौराणिक चीजों को मिथ करार दिया जाता है। 1947 में हम आजाद हुए, लेकिन अभी स्वाभिमान की रेखा से ऊपर उठना बाकी है। स्वामी विवेकानन्द ने शिकागो में और अटल बिहारी बाजपेयी ने जो पोखरण में साबित किया वही आज देश के हर युवा को साबित करना है। अभी जो सर्जिकल स्ट्राइक हुई है वो एक मैसेज था कि हमें भूगोल बदलना भी आता है। दरअसल, आजादी के बाद से हम गलत डायरेक्शन में एफर्ट कर रहे हैं। आज टाटा, अम्बानी, बिड़ला जितना पैसा विदेश से भारत में लाते हैं उससे ज्यादा पैसा तो विदेशों में रहने वाले भारतीय भेज देते हैं। तभी तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब भी विदेश यात्रा पर जाते हैं तो वहां रहने वाले भारतीयों से मुलाकात करते हैं।

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रावलपिंडी में है आतंकवाद का नल, वहां करना होगा हमला
पाकिस्तान लड़ाई क्यों करता है? दरअसल, उसके पास 1000 मीटर लंबी और 300 मील चौड़ी जमीन है। लड़ाई के लिए उसे जमीन चाहिए, वो हमसे 4 जंग हार चुका है, इसलिए अब आमने-सामने आने की कूबत नहीं है उसकी। इसलिए वो कभी 26/11, तो कभी पठानकोट में अपने आतंकी भेजता है। पाकिस्तानी सेना को एक आतंकी उनके एक फौजी से सस्ता पड़ता है। इसलिए वो एक रणनीति के तहत इन आतंकियों को भारत में भेजते हैं। सर्जिकल स्ट्राइक आखिर है क्या? यह एक रेड थी, जब सरकार पर पॉलिटिकल प्रेशर पड़ा तो एलओसी पार कर हमारे जवानों ने सात आतंकी अड्डों पर हमला किया। मेरी एक आला अधिकारी से मीटिंग हुई तो मैंने पूछा कि सर्जिकल स्ट्राइक में कितने आतंकी मारे? तो उनका जवाब था कि गिने नहीं मारते गए, उसमें टेरेरिस्ट ट्रेनिंग कैम्प के अलावा पाकिस्तानी सेना के जवान भी थे। आतंकवाद का नल रावलपिंडी में है। हमें वहां एक्शन लेना पड़ेगा। तभी आतंकवाद की समस्या खत्म होगी, नहीं तो अगले 50 साल तक कश्मीर का मुद्दा यूं ही चलता रहेगा।

दरअसल, हमारी डिफेंसिव मानसिकता है उसकी तरफ से कोई अटैक हो इसका इन्तजार नहीं करना चाहिए। हमें पाकिस्तान पर अटैक करते रहना चाहिए, इससे उसमें डर बना रहेगा जोकि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से बना हुआ है।

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