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विदेशों में आनंद के राज खोजने जाएंगे एमपी के अफसर, ये है PLAN

Updated: IST  anandam, aanand ministry, anand ministry in madhy
प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बताते हुए भूटान में इस क्षेत्र में हो रहे कामकाज का अध्ययन कराने के निदेज़्श दिए हैं।

भोपाल। मध्यप्रदेश में 'आनंद' महकमे का खाका बनाने में जुटे अफसर अब मैदानी कामकाज का अध्ययन करने भूटान प्रवास पर जाएंगे। सरकार ने चार अफसरों की यात्रा को हरी झंडी दे दी है। अप्रैल में ये लोग वहां की सरकार द्वारा 'हैप्पीनेस' के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों का अध्ययन करेंगे। भूटान में पिछले 45 साल से 'हैप्पीनेस मंत्रालय' चल रहा है।

एमपी ऐसा पहला राज्य
देश में आनंद विभाग बनाने वाला मप्र पहला राज्य है, जबकि दुनिया में भूटान ही ऐसा देश है, जहां साढ़े चार दशक पहले वहां की सरकार ने इसका मंत्रालय का गठन किया था। मप्र में इस विभाग की शुरुआती रूपरेखा तैयार कर रहे अफसरों को सरकार ने भूटान भेजने का निर्णय लिया है। अधिकारियों के दल में विभाग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मनोहर दुबे, डायरेक्टर प्रवीण गंगराडे, संदीप दीक्षित और नीरज वशिष्ठ और अशोक जनवदे में से एक का नाम शामिल किया गया है।

मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश
प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बताते हुए भूटान में इस क्षेत्र में हो रहे कामकाज का अध्ययन कराने के निदेज़्श दिए हैं। पिछले महीने प्रदेश के अधिकारियों का एक दल गुवाहाटी की यात्रा भी कर चुका है। वहां इस विषय पर एक वर्कशाप बुलाई गई थी, लेकिन वहां जमीनी स्तर पर कामकाज नहीं दिखे।

कोई नहीं करता आत्महत्या
उल्लेखनीय है कि भूटान ही एकमात्र ऐसा देश है, जहां के लोग ज्यादा खुश रहते हैं। वहां विकास का पैमाना जीडीपी के बजाय हैप्पीनेस इंडेक्स को माना जाता है। दैनिक जीवन में वहां लोग तनाव व अवसाद के शिकार कम होते हैं। यही वजह है कि कोई भी व्यक्ति आत्महत्या नहीं करता। इन्हीं सब बातों का अध्ययन किया जाएगा। साथ ही वहां की सरकार से हैप्पीनेस मंत्रालय की योजनाओं का ब्योरा भी हासिल किया जाएगा। बौद्ध धर्म मानने वाले पड़ौसी देश भूटान में 1972 में तत्कालीन नरेश जिग्मे सिंग्ये वांगचुक ने हैप्पीनेस मंत्रालय का गठन किया था।

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