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MP में प्राइवेट प्रेक्टिस नहीं करेंगे डाक्टर, घर पर मुफ्त देंगे परामर्श

Updated: IST medical
सरकार ने गुपचुप तरीके से 11 अप्रैल की कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सरकार ने करीब चार साल पहले ऐसा आदेश निकाला था, लेकिन कानूनी अड़चनों के चलते अब जाकर इसे दोबारा लागू किया जा सका है।

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश में सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रेक्टिस पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब सरकारी डॉक्टर घरों में इलाज नहीं कर सकेंगे। इसके लिए नियम-कायदे भी कड़े किए गए हैं, ताकि डॉक्टर नियमों को तोड़ेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी। डॉक्टरों की प्राइवेट प्रेक्टिस पर प्रतिबंध के साथ ही घर पर केवल परामर्श देने की मंजूरी रहेगी। ये भी साफ कर दिया गया है कि किसी भी निजी अस्पताल में प्रेक्टिस नहीं कर पाएंगे और ना ही खोल सकेंगे।

प्रदेश सरकार ने गुपचुप तरीके से 11 अप्रैल की कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सरकार ने करीब चार साल पहले ऐसा आदेश निकाला था, लेकिन कानूनी अड़चनों के चलते अब जाकर इसे दोबारा लागू किया जा सका है। सरकार के नए फैसले के मुताबिक सरकारी डॉक्टरों को गाइडलाइन के हिसाब से चलना होगा। इसका उल्लंघन करने पर कार्रवाई होगी। हालांकि अभी आदेश के पालन में कुछ समय लगने के आसार है।

डॉक्टरों के लिए ऐसे बदले नियम
- सरकारी डॉक्टर अब ड्यूटी पूरी होने के बाद ही निजी प्रेक्टिस कर पाएंगे। इसके तहत भी केवल मरीजों को परामर्श दिया जा सकेगा।
- सरकारी डॉक्टर कोई क्लिनिक, नर्सिंग होम या निजी अस्पताल को अपने या अपने रिश्तेदारों के नाम से नहीं चला सकेंगे।
- सरकारी डॉक्टरों को किसी नर्सिंग होम, निजी अस्पताल या निजी क्लिनिक में परामर्श सहित बाकी सेवा प्रदान करने की मंजूरी नहीं मिलेगी।

ये कर पाएंगे
सरकारी डॉक्टर अपने घर पर मरीजों को परामर्श दे पाएंगे। वे केवल बुनियादी चिकित्सा परीक्षा उपकरण और यंत्र जैसे स्टेथोस्कोप, बीपी यंत्र, नेत्ररक्षक, ऑटो क्षेत्र, ईसीजी मशीन आदि रख पाएंगे। इसके अलावा कोई भी जांच की मशीन नहीं रखी जा सकेगी।

ये नहीं रख सकते
सरकारी डॉक्टर अपने घरों में लाइसेंस लगने वाली कोई मशीन नहीं रख पाएंगे। वे एक्स-रे मशीन, यूएसजी, इको-कार्डियोग्राफी जैसी मशीनें नहीं रख सकेंगे। इसके अलावा अपने स्वयं के या उनके रिश्तेदारों के नाम पर अपने निवास पर उपयोग के लिए किसी मशीन का पंजीयन नहीं करा सकेंगे। इसी तरह ऑपरेशन से जुड़ी दांत की कुर्सी, लेजर मशीन, सर्जरी से जुड़ी मशीन और बाकी उपकरण नहीं लगाए जा सकेंगे।

नियम तोडऩे पर ऐसा होगा
अगर कोई भी सरकारी डॉक्टर इस नए फैसला का उल्लंघन करेगा तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। डॉक्टर के खिलाफ मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम तथा 16 के उप-नियम (4) के उल्लंघन का दोषी माना जाएगा। डॉक्टर मध्यप्रदेश सेवा नियम 1966 के तहत दंडनीय अपराधी होगा।

इतनी नई भर्तियां हुई
सरकार ने बीते तीन साल में करीब दो हजार नए डॉक्टरों की भर्ती की है। नए आदेश के पीछे स्वास्थ्य मंत्री रूस्तम सिंह का तर्क है कि नई भर्तियों के होने से डॉक्टरों की कमी काफी हद तक पूरी करने के प्रयास किए जा रहे हैं। निजी प्रेक्टिस बंद होने से निश्चित ही सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज बढ़ेगा।

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