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इन सिद्ध मंत्रों से प्रसन्न होती हैं मां पार्वती, शीघ्र कहती हैं तथास्तू

Updated: IST Parvati Mantra
mp.patrika.com आपको बताने जा रहा है हिन्दू धर्म में मंत्रों का महत्व। इन मंत्रों का जाप करके आप भी मनोकामना पूरी कर सकते हैं। कुंवारी कन्याओं के लिए तो माता पार्वती का यह मंत्र वरदान ही है...।

आदिशक्ति के रूप में प्रसिद्ध मां पार्वती का ह्रदय भक्तों के प्रति अति निर्मल होता है। पार्वती अपने भक्तों पर जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं। खासकर जो अविवाहित कन्याएं और महिलाएं माता पार्वती की पूजा और व्रत करती हैं, वे उनकी मुरादें भी पूरी कर देती हैं।

भागवत पुराण में माता पार्वती के बारे में बताया गया है। उन्हें दुर्गा, काली का रूप माना जाता है। इन्हें गौरी और अम्बे मां भी कहा जाता है। देवी पार्वती भगवान भोलेनाथ की पत्नी हैं। मान्यता है कि पार्वती जी का व्यवहार दया, कृपा और करुणा से भरा हुआ है।

ऐसा है माता पार्वती का स्वरूप
पुराणों के अनुसार माता पार्वती का मुख उज्ज्वल और तेजमय है। गौर वर्ण होने के कारण इन्हें माता गौरी भी कहा जाता है। इनके आठ हाथों में त्रिशूल, पास, अंकुशा, शंख, चक्र, तलवार, कमल विद्यमान हैं। माता का वाहन वृषभ बताया गया है। सफेद वस्त्र धारण करने वाली ममतामयी स्वभाव वाली पार्वती को मां अम्बे भी पुकारा जाता है।

यह है माता पार्वती की जन्म कथा
पुराणों में बताया गया है कि एक बार सती अपने पिता प्रजापति दक्ष की ओर से आयोजित यज्ञ में शामिल होने गई थीं। वहां उनके पिता ने शिव के बारे में बहुत अपशब्द कहा था, जिसे सुनने के बाद क्रोध में आकर माता पार्वती ने पिता के यज्ञ कुंड में ही अपने आप को भस्म कर दिया था। इसके बाद शिव को पति रूप में पाने के लिए पार्वती रूप में जन्म लिया और कठोर तप से शिवजी की अर्धांगिनी बन गईं।

पार्वती जी और उनका परिवार
माता पार्वती हिमालय के राजा हिमावन और मैनावती की बेटी हैं। माता पार्वती के दो पुत्र गणेश और कार्तिकेय हैं। कई पुराणों में शिव परिवार में शिवजी और माता पार्वती की एक पुत्री का भी उल्लेख है।

देश में यह है प्रसिद्ध पार्वती मंदिर
खजुराहो- पार्वती मंदिर
उत्तराखंड- गिरजा देवी मंदिर
गुजरात- अम्बाजी मंदिर
कोची- तिरुवैरानिकुलम पार्वती मंदिर वाराणसी-विशालाक्षी मंदिर

यह पूजन सामग्री जरूर रखें
भवानी मंदिर के पुजारी पं. जगदीश शर्मा के मुताबिक देवी मां की आराधना के लिए यह सामग्री जरूरी होती हैं। गणेशजी की मूर्ति के स्नान के लिए तांबे का पात्र, तांबे का लोटा, कलश, दूध, देव वस्त्र और आभूषण रखें। चावल, दीपक, तेल, रुई,कुमकुम, धूपबत्ती, अष्टगंध। गुलाब के फूल, प्रसाद के फल, दूध, मिठाई, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, शक्कर, पान, दक्षिणा।

पूजा में जरूरी होता है संकल्प
पूजन से पहले संकल्प जरूर लें। हाथों में जल, फूल और अक्षत लेकर जिस दिन पूजा कर रहे हैं उसकी तिथि, वर्ष, वार और जगह का नाम अपना गोत्र लेकर अपनी इच्छा का स्मरण करें। संकल्प के बाद जल को जमीन पर छोड़ दें।

यह है पूजा विधि
प्रथम पूज्य भगवान गणेश की पूजा किसी भी शुभ कार्य में करना चाहिए। सुखदाता, मंगलकारी और मनोवांछित फल के दादा गणेशजी को सर्वप्रथम पूजने का वरदान प्राप्त है। भगवान को स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करें। गंध, पुष्प, अक्षत अर्पित करें। अब माता पार्वती का पूजन करें। माता पार्वती की मूर्ति भगवान शिव के बायीं तरफ स्थापित करना चाहिए। माता का आह्वान करें। पार्वती को घर में आसन दें। अब देवी को स्नान कराएं। जल से स्नान कराएं, फिर पंचामृत से और फिर स्वच्छ जल से स्नान कराएं। माता को वस्त्र अर्पित करने के बाद आभूषण पहनाएं। पुष्पमाला अर्पित करें। इत्र लगाकर तिलक करें। धूप और दीप जलाकर फूल और चावल अर्पित करें। घी या तेल का दीपक लगा सकते हैं। इसके बाद आरती करें। परिक्रमा के बाद नेवैद्य अर्पित करें।

पूजन के दौरान इन मंत्रों का उच्चारण करें
कामना पूरी करने के लिए भक्त मां को प्रन्न करने के लिए इन मंत्रों का जाप करते हैं। इस मंत्र के नियमित जाप से घर में सुख- शांति और समृद्धि मिल जाती है। मां पार्वती की आराधना करते वक्त यह मंत्र जपना चाहिए।

यह मंत्र है माता को पसंद
ऊँ उमामहेश्वराभ्यां नमः
ऊँ पार्वत्यै नमः

शिव-पार्वती को करें प्रसन्न
ऊँ साम्ब शिवाय नमः
ऊँ गौर्ये नमः

घर में सुख-शांति के लिए विशेष मंत्र
मुनि अनुशासन गनपति हि पूजेहु शंभु भवानि।
कोउ सुनि संशय करै जनि सुर अनादि जिय जानि‘...।

मनपसंद वर के लिए सिद्ध मंत्र
हे गौरी शंकरार्धांगी। यथा त्वं शंकर प्रिया।
तथा मां कुरु कल्याणी, कान्त कान्तां सुदुर्लभाम्।।

कार्य सिद्ध के लिए यह है खास मंत्र
ऊँ ह्लीं वाग्वादिनी भगवती ममं कार्य सिद्धि कुरु कुरु फट् स्वाहा।

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