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खुद पढ़ सकें भजन-आरती इसलिए 100 साल की उम्र में कर रही पढ़ाई

Updated: IST zumabai gave the examination
नवसाक्षर परीक्षा में बैठीं झुम्मा बाई बोलीं- पढ़ाई के लिए उम्र बंधन नहीं।

भोपाल/सीहोर। पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती है,बस इच्छा शक्ति मजबूत होना चाहिए। इस कहावत को 100 साल की पगारिया राम की झुम्मा बाई से साबित कर दिखाया है।

जिले में रविवार को हुई नवसाक्षर परीक्षा में शामिल झुम्मा बाई ने बताया कि इस उम्र में वे इसलिए पढ़ रहीं हैं, ताकि वे भगवान की आरती और भजन पढ़ सकें। परीक्षा में झुम्मा बाई की तरह कई प्रौढ़ महिलाओं एवं पुरुषों ने साक्षर होने की परीक्षा दी।

साहस का सम्मान:
ऐसे विरले ही मौके आते हैं जब 100 साल की उम्र में कोई इंसान पढ़ाई की शुरुआत कर रहा हो। नवसाक्षर परीक्षा का आयोजन देखने नई दिल्ली से केंद्र सरकार के अफसर भी यहां पहुंचे।

संचालक प्रौढ़ शिक्षा निधि कोषालय डा.रमन सिंह ने जब 100 वर्षीय झुम्माबाई को परीक्षा हॉल में देखा तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने झुम्माबाई का फूलों की माला पहनाकर सम्मान किया।

90 के देवनारायण भी परीक्षार्थियों में :
इछावर विकास खंड के शासकीय माध्यमिक शाला अमलाहा में 90 वर्ष के परीक्षार्थी देवनारायण ने भी इस उम्र में इसलिए पढ़ाई की ताकि वे रोज रामायण का पाठ कर सकें। उनका कहना था कि ईश्वर मिल गया तो सब मिल गया।

39 हजार प्रौढ़ हुए शामिल:
परीक्षा में जिले के 45 हजार नव साक्षरों को परीक्षा में सम्मिलित किए जाने का लक्ष्य था। रविवार को इसमें से 39 हजार नव साक्षरों ने परीक्षा दी।

शिक्षा की अलख जगाएं:
दल ने शासकीय उमावि रुपेटा का भी निरीक्षण किया। इस केन्द्र पर डीपीसी ने सभी से निवेदन किया कि वह साक्षर होने के बाद शिक्षा की अलख जगाते रहे एवं शिक्षा के इस ज्ञान को सभी में बंाटे।

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