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क्रिकेटर बनना चाहता था ये एक्टर, पर एक सबक ने इस बना दिया हीरो

Updated: IST irrfan khan,irrfan birthday,irrfan in bhopal,mp
अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीतने वाले इरफान खान की कामयाबी की कहानी संघर्षों के ऐसे रास्ते से शुरू होती है, जहां मुश्किलों में भी उनके कदम बढ़ते रहे।

भोपाल।28 मई 2016 को भोपाल के होटल जहांनुमा पैलेस में आयोजित 'पत्रिका की नोट : द एनुअल आइडिया फेस्ट 2016' में भोपाल पहुंचे अभिनेता इरफान खान ने कहा था कि 'जब तक मैं एक्टर की तरह समाज को रिफ्लेक्ट नहीं कर पाऊंगा, तो मेरा काम बेमानी है।' अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीतने वाले इरफान खान की कामयाबी की कहानी संघर्षों के ऐसे रास्ते से शुरू होती है, जहां मुश्किलों में भी उनके कदम बढ़ते रहे। संघर्षों के इस रास्ते में एक लड़की ने उनका हाथ थामा और आज वो कामयाबी के ऐसे शिखर पर हैं, जहां पहुंचकर उम्मीद चेहरे पर ऐसा नूर बिखेरती है, कि हर कोई कह उठे रात का अंधेरा जब गहरा होने लगे, तो सुबह बेहद करीब होती है।

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पिता बनाते थे पंचर

इरफान का जन्म राजस्थान की राजधानी जयपुर के आमेरओड़ इलाके के एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता की एक टॉयर पंचर बनाने की दुकान थी। चुकी इरफान बड़े बेटे थे तो जिम्मेदारियां भी ज्यादा थीं। घरवालों को उम्मीद थी कि इरफान जल्द कमाना शुरू कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वह घर से झूठ बोलकर दिल्ली आ गए। यहां राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में प्रवेश की कोशिश की। लेकिन उनके पास न्यूनत अर्हता (10 नाटक का अनुभव जरूरी) नहीं थी। हालांकि बाद में उनका दाखिला एनएसडी में हो गया। इरफान जब 19 साल के थे, तो उसी वक्त उनके पिता का निधन हो गया।

बनना चाहते थे क्रिकेटर

इरफान को क्रिकेट खेलना बहुत पसंद था। वो अपने पड़ोस में और चौगान स्टेडियम में जाकर क्रिकेट खेलना पसंद करते थे। वे चाहते थे कि वे एक बेहतरीन क्रिकेट खिलाड़ी बनें। एक बार सीके नायडू ट्रॉफी के लिए उनका सिलेक्शन भी हो गया था। पर घर के लोगों ने इजाजत नहीं दी। इस तरह उनका क्रिकेट छूट गया।

फैलोशिप से चलाना पड़ा घर

पिता के देहांत के बाद घर की आय का जरिया खत्म हो गया था। फिर छोटे बेटे इमरान ने टायर पंचर की दुकान संभाली। लेकिन उस दुकान से आय इतनी अधिक भी नहीं थी कि इरफान के लिए पैसे भेजे जा सकें। एनएसडी से मिलने वाली फेलोशिप ही सहारा थी। घरेलू परेशानियों के साथ एनएसडी की परेशानियां सहते-सहते इरफान टूटते जा रहे थे। तभी साथ काम करने वाली एक लड़की इरफान का सहारा बनी। जो उनके साथ ही पढ़ती थी।

उस लड़की ने दिया साथ

एक दौर ऐसा भी आया, जब इरफान के पास खाने के लाले पड़ गए। उस दौर में उस दिल्ली की एक लड़की ने इरफान का साथ दिया। वह टिफिन लाती और इरफान को खिलाती। ऐसे कई दिन बीते जब इरफान का पेट उस दिल्ली की लड़की के टिफिन से भरा। धीरे-धीरे एनएसडी की पढ़ाई पूरी हो गई। लेकिन इरफान यहां कोई बड़ा कमाल नहीं कर पाए।

टेलीफिल्म से भी नहीं मिली सफलता

फिल्मकार मीरा नायर ने उन्हें सलाम बांबे के लिए चुना। पर बाद में किन्हीं कारणों से हटा दिया। इस पर इरफान बहुत रोए। इसके बाद गोविंद निहलानी ने उन्हें बॉम्बे बुला लिया, लेकिन इससे हालत और बिगड़ गए। वहां निहलानी जी की टीवी के लिए बनाई गई तीन टेलिफिल्मों में उन्होंने काम किया।

दिल्ली वाली लड़की से हुआ प्यार

मुंबई आकर इरफान मरीन लाइन्स में एक पीजी में रहने लगे। वहां से अपने कमरे की फोटो क्लिक कर वे दिल्ली वाली लड़की को भेजा करते थे। धीरे-धीरे उन्हें महसूस हुआ कि वे दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे हैं। लेकिन इरफान का कॅरियर देखकर कौन उनसे शादी करने के बारे में सोचता। लेकिन इस मामले में वही दिल्ली वाली लड़की इरफान खान के संपर्क में बनी रही। उसने हर संघर्ष में इरफान का साथ दिया। चूंकि वह खुद भी एनएसडी से पढ़ी हुई थी, तो वह खुद भी फिल्मों में आना चाहती थी। उन्हें उनके हिसाब के कुछ काम मिलने भी शुरू हो गए थे।

टीवी में मिलने लगा काम

कुछ दिनों में इरफान को टीवी में काम मिलना शुरू हुआ। लेकिन उससे इरफान को कोई वैसा खास पहचान नहीं मिली न ही आर्थिक तौर पर उनकी हालत सुधरी नहीं। उन दिनों इरफान की इकलौती साथी, उनकी सहपाठी ही थीं।

दोनों ने कर ली शादी

एक दौर आया जब सिनेमा की दुनिया में इरफान और उनकी सहपाठी को बराबर के काम मिलने लगे। तभी इरफान की सहपाठी ने फैसला किया कि अब वे लोग शादी करेंगे। यह लड़की थी सुतपा सिकंदर। 1995 में दोनों ने शादी कर ली। शादी कर ली। ये वही सुपना हैं, जिन्होंने सुपारी और शब्द जैसी फिल्में लिखी हैं।

आज इरफान देश के बेस्ट एक्टर्स में गिने जाते हैं। हॉलीवुड फिल्मों ए माइटी हार्ट, स्लमडॉग मिलियनेयर और द अमेजिंग स्पाइडर मैन फिल्मों में काम कर चुके इरफान को 2011 में भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया।

एक्स्ट्रा शॉट

* स्कूल के दिनों में वो पढऩे में बहुत तेज स्टूडेंट नहीं थे।
* सुबह 6.30 बजे स्कूल जाना और दोपहर में 4 बजे तक वापस आना उन्हें बहुत बोरिंग काम लगता था।
*इरफान बचपन में अपने पिताजी के साथ शिकार खेलने जाया करते थे।
* सलाम बॉम्बे इरफान की पहली बॉलीवुड फिल्म थी।
* 2007 में इरफान को 'लाइफ इन ए मेट्रो में अभिनय के लिए फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर अवार्ड मिला।
* इरफान के दो बच्चों बबली और अयान के पिता हैं।

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